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डाॅ. एल. एस. यादव का लेख : चीन- पाक- तालिबान गठजोड़ चुनौती

अफगानिस्तान से विदेशी नागरिकों और अफगान सहयोगियों को निकालने का अभियान अब लगभग पूरा हो गया है। इनकी वापसी के बाद अब पंजशीर घाटी को छोड़कर पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन स्थापित हो गया है। तालिबानी शासन की स्थापना के साथ ही भारत को अब चीन-पाकिस्तान-तालिबान के त्रिकोणीय गठबंधन की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इधर भारत भी इस गठबंधन के संभावित खतरों से निपटने की तैयारी में लग गया है। अब तालिबान के सत्ता पर काबिज हो जाने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अफगास्तिान के साथ भारतीय रणनीति कैसी होगी।

डाॅ. एल. एस. यादव का लेख : चीन- पाक- तालिबान गठजोड़ चुनौती
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डाॅ. एलएस यादव 

डाॅ. एल. एस. यादव

अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाओं ने बीस साल मौजूदगी दर्ज कराने के बाद अफगानिस्तान को पूर्ण तरीके से छोड़ दिया है। इस तरह अफगानिस्तान से विदेशी नागरिकों और अफगान सहयोगियों को निकालने का अभियान अब लगभग पूरा हो गया है। इनकी वापसी के बाद अब पंजशीर घाटी को छोड़कर पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन स्थापित हो गया है। तालिबानी शासन की स्थापना के साथ ही भारत को अब चीन-पाकिस्तान-तालिबान के त्रिकोणीय गठबंधन की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इधर भारत भी इस गठबंधन के संभावित खतरों से निपटने की तैयारी में लग गया है। अब तालिबान के सत्ता पर काबिज हो जाने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अफगास्तिान के साथ भारतीय रणनीति कैसी होगी। यह भी उल्लेखनीय है कि 31 अगस्त को तालिबान के साथ सकारात्मक रुख के साथ हुई है। वहीं भारत पूर्णतया सतर्क भी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर नजर रखने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल एवं वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी है।

अफगानिस्तान में तालिबान का राज स्थापित होने के बाद आतंकवादी अब फिर सिर उठाने लग गए हैं। इसी का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान कश्मीर पर नई साजिश रचने में लग गया है। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में तैनात सेना के कमांडर कई बार यह बात कह चुके हैं कि नियंत्रण रेखा के पार करीब 200 आतंकी मौजूद हैं जो घुसपैठ करने के फिराक में हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी अफगानिस्तान में तालिबान के साथ दहशतगर्दी मचाकर लौटे इन आतंकियों भारतीय क्षेत्र में धकेलने की कोशिश में है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े खुफिया सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्वाधिक आतंकी ट्रेनिंग कैम्प जिला राजौरी और पुंछ की नियंत्रण रेखा के पार के इलाकों में स्थित हैं। इनमें एलओसी पार कोटली, मुजफ्फराबाद, मीरपुर एवं रावलाकोट के इलाके शामिल हैं। रावलाकोट इलाके में स्थित हजीरा आतंकी शिविर में हलचलें तेज हो गई हैं। यहां पर अधिकांश आतंकी अफगानिस्तान से लौटे हैं। अफगानिस्तान पर तालिबानी सत्ता के कब्जे के बाद चीन व पाक उसके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। तालिबान के स्थापित होने के बाद भारत के खिलाफ चीन व पाकिस्तान के संबंध और मजबूत होंगे। भारत इन सब पर नजर रखे हुए है और इसीलिए सधी हुई प्रतिक्रियाएं दी गई हैं। अब तक तालिबानी सहयोग में पाकिस्तान की जो भूमिका रही है उससे यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान तालिबानी सत्ता को अपने इशारों पर चलाने वाली सत्ता बना लेगा। दूसरी तरफ पाकिस्तान चीन के इशारों पर चलने वाला देश है। ऐसे में चीन अपने स्वार्थ पहले पूरे करने का प्रयास करेगा। इस तरह चीन-पाक-तालिबान गठजोड़ भारत के लिए नई चुनौती पेश करेगा। चीन सवप्रथम अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड परियोजना को पूरी करने का प्रयास करेगा, क्योंकि पिछले कुछ समय से अमेरिका व भारत सहित कुछ देशों ने चीन के द्वारा दूसरे देशों में चलाई जा रही ढांचागत परियोजनाओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। अब चीन इस परियोजना को बढ़ाकर अफगानिस्तान तक ले जाएगा। चीन पाकिस्तान इकोनोमिक काॅरिडोर परियोजना (सीपीईसी) को नया प्रोत्साहन मिलेगा और उसे अब अफगानिस्तान तक जोड़ा जा सकेगा। चीन की यह भी इच्छा है कि वह अफगानिस्तान में भी दूसरे देशों की तरह भारी भरकम परियोजनाएं शुरू करे। अब इन परियोजनाओं को बलूचिस्तान की ग्वादर परियोजना से जोड़ा जा सकता है। गौरतलब बात यह है कि चीन की सीपीईसी परियोजना का विरोध करने वाला पहला देश भारत ही है। दरअसल इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा पीओके से होकर गुजरता है। उल्लेखनीय है कि पीओके भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर का अभिन्न अंग है।

पाकिस्तान ने यह काॅरिडोर बनाने के लिए कुछ समय पहले चीन से करार किया था जिसके तहत तीन हजार किलोमीटर लंबे इस आर्थिक गलियारे का लगभग 634 किलोमीटर का हिस्सा गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरेगा। इसी कारण जम्मू-कश्मीर के उत्तर में स्थित यह क्षेत्र चीन के साथ महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में जाना जाता है और सीपीईसी के प्रमुख मार्ग पर स्थित है। यह सड़कों, राजमार्गों, रेलवे और निवेश पार्कों के नेटवर्क के जरिए दक्षिणी पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से पश्चिमी चीन के काशगर को जोड़ता है। गुलाम कश्मीर के रास्ते सीपीईसी बनाए जाने को लेकर भारत कई बार आपत्ति जता चुका है। इसके बाद से ही चीन इस क्षेत्र में निवेश को लेकर चिंतित है क्योंकि विवादित क्षेत्र होने के कारण इस इलाके में निवेश सुरक्षित नहीं हैं। इस गलियारे के बन जाने से चीन सबसे अधिक फायदे में रहेगा। चीन को तेल-गैस आयात के लिए पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह तक सड़क, रेल व पाइपलाइन का नेटवर्क प्राप्त हो जाएगा। इसके बाद उसे पश्चिम और अफ्रीका के बीच व्यापार करने के लिए बड़ा मार्ग मिल जाएगा। इसके साथ ही दक्षिण सागर से कारोबारी मार्ग छोड़कर चीन वहां पर निडर होकर ताकत आजमाएगा। भारत को दक्षिण चीन सागर में तेल निकालने के लिए रोकने में चीनी सेना सक्षम बन जाएगी। इस हाईवे के बाद चीनी निवेश का सीधा नेटवर्क हो जाएगा। पाकिस्तान व चीन का सामरिक कारोबारी रिश्ता भारत के लिए बड़ी चुनौती प्रस्तुत करेगा। इस आर्थिक गलियारे का उपयोग सामरिक उद्देश्यों के तहत भारत को घेरने के लिए भी किया जाएगा। इस रास्ते के बनने से भारत की पश्चिमी सीमा पर चीनी सेनाओं की गतिविधियां काफी बढ़ जाएंगी। चीन की सामरिकी यह भी होगी कि वह भारत को पश्चिम और मध्य एशिया के संपर्कों से काट दिया जाए।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से भारत के लिए अफगानिस्तान विशेष रूप से महत्व रखता है। अमेरिका न्यू सिल्क रोड स्त्रातजी का विचार मध्य एशिया, विशेषत भारत को अफगानिस्तान के जरिये व्यापार, पारगमन और ऊर्जा मार्गों से जोड़ना था। भारत की ओर से ईरान में चाबहार बंदरगाह और अफगानिस्तान में जरांज-डेलाराम रोड पर निवेश इसी रणनीति का हिस्सा थे। जो चीन की वजह से परेशानी में आ सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में अमेरिका, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान को लेकर क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने पर केन्द्रित एक नया क्वाडिलेट्रल डिप्लोमैटिक प्लेटफाॅर्म बनाने के लिए सहमति जताई थी जिसे बदले हालात में चीन स्वयं इसका फायदा उठा सकता है। चीन के उभार का मुकाबला करने के लिए भारत, हिन्द-प्रशांत क्षे़त्र में अमेरिका के साथ काम करना चाहता था, परंतु अब दक्षिण मध्य एशिया में चीन-पाकिस्तान-तालिबान गठजोड़ इसके लिए परेशानियां खड़ी कर सकता है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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