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चिंतन: एनएसजी में भारत पर चर्चा से चीन बेनकाब

एनएसजी देशों की 24 जून को भारत की सदस्यता पर चर्चा होगी।

चिंतन: एनएसजी में भारत पर चर्चा से चीन बेनकाब
नई दिल्ली. भारत के लिए वो घड़ी आ गई है, जिसका इंतजार था। न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) देशों की 24 जून को सिओल में हो रही बैठक में भारत की सदस्यता पर चर्चा होगी। अहम बैठक से पहले एजेंडे पर सहमति के लिए एक दिन पहले 23 की शाम में एनएसजी सदस्य देशों की हुई बैठक में जापान ने भारत की सदस्यता का मुद्दा उठाया। इसके बाद चीन की पोल खुल गुई है। अब तक चीन कह रहा था कि सिओल बैठक में भारत की सदस्यता पर चर्चा एजेंडे में नहीं है। जब से भारत एमसीटीआर का सदस्य बना है और एनएसजी की सदस्यता के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किया है, तब से ही चीन बार-बार कह रहा है एनएसजी बैठक में भारत पर चर्चा नहीं हुई है। इससे पहले नौ जून को विएना में भी एनएसजी देशों की बैठक हुई थी, उस बैठक के बाद चीन ने कहा था कि इसमें भारत की सदस्यता पर चर्चा ही नहीं हुई। तब से वह लगातार भारत का कूटनीतिक विरोध कर रहा है।
ड्रैगन इस बात का रट लगाए बैठा है कि जिस देश ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किया है, उसे एनएसजी का सदस्य नहीं बनाया जा सकता है। भारत पहले एनपीटी पर हस्ताक्षर करे, फिर उसे एनएसजी की सदस्ता दी जाए। इसके बाद जब भारत तर्क देता है कि फ्रांस ने भी एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किया है, फिर भी उसे एनएसजी की सदस्यता दी गई, उस समय चीन ने क्यों नहीं एनपीटी वाला मसला उठाया था। अब भारत की बारी के समय वह क्यों एनपीटी का राग अलाप रहा है। चूंकि फ्रांस को बिना एनपीटी एनएसजी की सदस्यता मिली है, इसलिए भारत की दावेदारी भी पुख्ता है। इसके बाद चीन का तर्क है कि यदि भारत को सदस्यता दी जाती है तो पाक को भी दी जाय। लेकिन परमाणु हथियार और तकनीक को लेकर पाकिस्तान का ट्रैक रिकार्ड अच्छा नहीं है।
पाकिस्तान पर उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को तकनीक बेचने का आरोप लगा है। यह आरोप खुद अमेरिका ने लगाया है। इतना ही नहीं पाकिस्तान में सैकड़ों आतंकवादी गुट वहां के हुक्मरानों की सरपरस्ती में एक्टिव हैं। ऐसे में विश्व समुदाय पाकिस्तान को एनएसजी की सदस्यता देने का जोखिम मोल नहीं ले सकता है। परमाणु कार्यक्रमों के बारे में भारत का ट्रैक रिकार्ड क्लीन रहा है। एक दिन पहले ही 22 जून को फ्रांस ने भी भारत की दावेदारी का सर्मथन किया है। फ्रांस ने तो अमेरिका की तर्ज पर सभी एनएसजी सदस्यों से अपील की है कि वह भारत का सर्मथन करे। न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका का रुख भारत के प्रति नरम हुआ है। 48 में से केवल तीन देश चीन, तुर्की और आयरलैंड अभी विरोध में हैं।
ताशकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एनएसजी पर निष्पक्ष व तटस्थ आंकलन के आधार पर भारत के लिए सर्मथन मांगा है। अब 24 की बैठक में भारत को लेकर अगर चीन अपनी जिद पर अड़ा रहेगा तो निश्चित ही उसके सामने अलग-थलग पड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। हालांकि भारत चीन और यूएस के बीच संतुलन बना कर रखना चाहता है। लेकिन चीन का पाक प्रेम उस पर भारी पड़ रहा है। इस बार अगर भारत सदस्य नहीं भी बना तो भी एनएसजी की बैठक में भारत पर चर्चा होना ही हमारी कूटनीतिक जीत होगी। उम्मीद है इस साल के अंत तक हम सदस्य बन ही जाएंगे। इसके बाद भारत का अगला टार्गेट संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने का रहेगा। कह सकते हैं कि मोदी सरकार कूटनीतिक पेशबंदी में अभी तक सफल साबित हो रही है।
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