Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

निरंकार सिंह का लेख : चीन बना भू-माफिया

चीन के सभी प्रमुख पड़ोसी दुश्मन भी इसके इर्दगिर्द ही हैं। साउथा चाइना सी में कब्जा हो जाने से चीन दुनिया के लगभग तीन ट्रिलियन डॉलर के व्यापार वाले इस समुद्री रास्ते को बाकियों से छीनने में और अपने मंसूबों को पूरा करने में कामयाब हो जाएगा। ये तो अच्छा हुआ कि वक्त पर चीन का असली चेहरा पूरी दुनिया के सामने आ गया और सारी दुनिया चीन के खतरे को समझ कर उसके खिलाफ गोलबन्द हो गई है, वरना ये ड्रैगन सारी दुनिया को खा जाने की साजिश में लगा था।

निरंकार सिंह का लेख : चीन बना भू-माफिया
X

निरंकार सिंह।

निरंकार सिंह

दक्षिणी चीन सागर से लेकर प्रशांत, भूमध्य और हिंद महासागर तक कई देशों की सेनाएं और जंगी जहाज आमने-सामने हैं। इसके अलावा चीन हर वक्त अपने पड़ोसी देशों की जमीन हड़पने की कोशिश करता रहता है। उसकी शह पर उत्तर कोरिया के निशाने पर दक्षिण कोरिया जापान और अमेरिका हैं। वह ईरान को भी सऊदी अरब और अमेरिका के खिलाफ भड़काता रहता है। पाकिस्तान और चीन भारत की सीमा में घुसने की लगातार कोशिश करते रहते हैं। अपने पाले पोसे आतंकियों एवं नक्सलियों को भारत में भेजकर अशांति फैलाना ही उनका मकसद बन गया है। सीरिया बहुत पहले से ही अमेरिका और रूस के बीच जंग का अखाड़ा बना हुअा है। इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष लंबे समय से चल रहा है। बेलारूस को लेकर अमेरिका और रूस के बीच तनातनी है, लेकिन सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति और चीन की उसके पड़ोसियों के साथ बनी हुई है। ऐसे में कोई छोटी सी चिंगारी भी किसी भी टकराव को बहुत बड़ा रूप दे सकती है।

कोरोना वायरस को लेकर चीन और अमेरिका में पहले से ही ठनी हुई है, लेकिन अब साउथ चाइना सी में अपने सैन्य अभ्यास के दौरान चीन ने चार मध्यम दूरी की मिसाइलें दागकर तनाव को और बढ़ा दिया है। चीन की ओर से ये मिसाइलें हैनान द्वीप समूह और पारासेल द्वीप समूह के बीच वाले इलाकों में दागी गईं। पेंटागन ने कहा कि रक्षा मंत्रालय दक्षिण चीन सागर में पारासेल द्वीप समूह के आस-पास 23 से 29 अगस्त के बीच बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण समेत अन्य सैन्य अभ्यास करने के चीन के हालिया फैसले को लेकर चिंतित है। दक्षिण चीन सागर में विवादित क्षेत्र में सैन्य अभ्यास करना तनाव कम करने और स्थिरता को बरकरार रखने के उलट है। और ये कार्रवाई दक्षिण चीन सागर में स्थिति को और अस्थिर करती है। ऐसे अभ्यास दक्षिण चीन सागर में पक्षों के आचरण पर 2002 की घोषणा के तहत चीन की प्रतिबद्धताओं का भी उल्लंघन करते हैं। यह घोषणा उन गतिविधियों से बचने के लिए की गई थी जो विवादों को और जटिल बना सकती हैं या बढ़ा सकती हैं तथा शांति एवं स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।

चीनी गतिविधियां दक्षिण चीन सागर का सैन्यीकरण न करने की उस प्रतिज्ञा के उलट हैं और मुक्त एवं स्वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अमेरिकी दृष्टिकोण के भी विपरीत हैं जिसमें सभी राष्ट्र, छोटे एवं बड़े, संप्रभुता के लिहाज से सुरक्षित हैं, दबाव से मुक्त हैं और स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप आर्थिक विकास आगे बढ़ाने में सक्षम हैं। यह सैन्य अभ्यास दक्षिण चीन सागर में गैरकानूनी समुद्री दावों पर जोर देने और अपने दक्षिणपूर्वी एशियाई पड़ोसियों को नुकसान पहुंचाने के लिए चीन की ओर से लगातार की जा रही कार्रवाइयों में से हुई हालिया कार्रवाई है। पेंटागन ने जुलाई में चीन को चेतावनी दी थी कि वह स्थिति की निगरानी करना जारी रखेगा। वहीं उसने ये उम्मीद भी जताई थी कि चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्यीकरण की कार्रवाई और पड़ोसियों पर दबाव दोनों को कम करेगा। उसने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कार्यबल एलिस की तैनाती करने की भी घोषणा की जो नवंबर 2020 तक वहां सुरक्षा सहयोग गतिविधियों का संचालन करेगा। अमेरिका ने इससे पहले दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीपों के निर्माण एवं उपयोग को लेकर 24 चीनी कंपनियों को प्रतिबंधित किया था, जिसकी चीन ने कड़ी आलोचना की थी। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ऐसा कर के चीन के आंतरिक मामलों में दखल दे रहा है।

चीन का इस क्षेत्र के अन्य सभी देशों के साथ सीमा को लेकर विवाद हैं, फिर भी बीजिंग दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर अपना दावा जताता है। इस समुद्री रास्ते से हर साल 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के माल का आवागमन होता है। चीन तो यहां तक दावा करता है कि समुद्र के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से पर उसका ऐतिहासिक अधिकार है। इसके लिए वह यू-आकार की नाइन-डैश लाइन का उपयोग करता है जिसमें वियतनाम के एक्सक्लूजिव इकॉनॉमिक जोन, साथ ही पारासेल के द्वीप समूह और स्प्रैटली द्वीप समूह क्षेत्र भी शामिल हैं।

इतना ही नहीं यह ब्रूनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम के ईईजेड को भी ओवरलैप करता है। चीन के ऐसे ही कारनामों के चलते वियतनाम और फिलीपींस ने पिछले महीने ही इस क्षेत्र में चीन द्वारा किए गए सैन्य अभ्यास की आलोचना की थी। इससे पहले जून में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी दक्षिण चीन सागर पर अपनी स्थिति को सख्त कर दिया था। उसने चीन पर समुद्री साम्राज्य बनाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया है।

चीन की नीति विस्तारवादी हैं। वह आसपास की महत्वपूर्ण जमीनों पर कब्जा करना चाहता है। भारत सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ उसकी सीमा विवाद चल रहा है। चीन की गंदी नजर सिर्फ गलवान पर ही नहीं है। वह दुनिया में बहुत सारी जमीनों को हड़पने की साजिश में लगा हुआ है। अपने बारह पड़ोसी देशों की जमीन हड़पने के बाद भी चीन की लालची नजर ढाई सौ अन्य द्वीपों को भी हड़प जाने की है। साउथ चाइना सी को लेकर क्यों चीन की लार टपकती है, ये बात अब सारी दुनिया को समझ में आ गई है। दरअसल साउथ चाइना सी में करीब 250 द्वीप हैं और इन सभी पर चीन कब्जा करना चाहता है। साउथ चाइना सी में अपनी दादागिरी चलाने की कोशिश में लगा चीन बेवजह अमेरिका से नहीं भिड़ने की तैयारी में है। साउथ चाइना सी के ढाई सौ द्वीपों के अलावा यहां से होकर जाने वाला रास्ता भी बेशकीमती है जहां से दुनिया के करीब एक तिहाई व्यापार के लिए जहाजों के आने-जाने का रास्ता है। इन द्वीपों पर काबिज होकर चीन यहां से गुजरने वाले जहाजों पर भी नजर बनाए रख सकता है।

साउथ चाइना सी की भौगोलिक स्थिति भी चीन के लिए सामरिक दृष्टि से बहुमूल्य है। चीन के सभी प्रमुख पड़ोसी दुश्मन भी इसके इर्दगिर्द ही हैं। साउथा चाइना सी में कब्जा हो जाने से चीन दुनिया के लगभग तीन ट्रिलियन डॉलर के व्यापार वाले इस समुद्री रास्ते को बाकियों से छीनने में और अपने मंसूबों को पूरा करने में कामयाब हो जाएगा। ये तो अच्छा हुआ कि वक्त पर चीन का असली चेहरा पूरी दुनिया के सामने आ गया और सारी दुनिया चीन के खतरे को समझ कर उसके खिलाफ गोलबन्द हो गई है, वरना ये ड्रैगन धीरे-धीरे सारी दुनिया को खा जाने की साजिश में लगा था। - (यह लेखक के अपने विचार हैं।)

Next Story