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सावधान भारत, चीन आपको चारों तरफ से घेर रहा है

चीन का रक्षा बजट 15 लाख 68 हजार करोड़ रुपये है। वहीं भारत का रक्षा बजट 4 लाख 39 हजार करोड़ रुपये है। चीन भारत से तीन गुना से भी ज्यादा रक्षा के मद में खर्च करता है। चीन की तरफ से जो चुनातियां मिल रहीं हैं वह भारत के लिए चिन्तनीय हैं। खासतौर पर हमें यह ध्यान में रखना होगा कि जिस तरह से वह हमारे पूर्वोत्तर के राज्यों पर नजर जमाए हुए है या भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश कर रहा है, हमें चुनौती दे रहा है।

सावधान भारत, चीन आपको चारों तरफ से घेर रहा है
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चीन का रक्षा बजट 15 लाख 68 हजार करोड़ रुपये है। वहीं भारत का रक्षा बजट 4 लाख 39 हजार करोड़ रुपये है। चीन भारत से तीन गुना से भी ज्यादा रक्षा के मद में खर्च करता है। चीन की तरफ से जो चुनातियां मिल रहीं हैं वह भारत के लिए चिन्तनीय हैं। खासतौर पर हमें यह ध्यान में रखना होगा कि जिस तरह से वह हमारे पूर्वोत्तर के राज्यों पर नजर जमाए हुए है या भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश कर रहा है, हमें चुनौती दे रहा है।

वर्तमान में चीन स्वयं को विश्व की एक महान शक्ति के रूप में स्थापित करने में यथा संभव पूरी ताकत लगाए हुए है। अभी हाल में 6 अगस्त को सैन्य क्षमता बढ़ाने के क्षेत्र में उसने एक नई सफलता हासिल कर ली है। सैनिक क्षेत्र की यह उपलब्धि भारत सहित चीन के समस्त पड़ोसी देशों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। चीन ने ध्वनि से ज्यादा तेज गति वाले हाइपरसोनिक विमान शिंगकाॅन्ग-2 या स्टारी स्काय-2 का सफलता पूर्वक परीक्षण किया है।

इसे एक राॅकेट की मदद से आसमान में लांच किया गया। इसके 10 मिनट बाद इसे हवा में छोड़ा गया। इसने स्वतंत्र रूप से उड़ते हुए आसमान में विभिन्न प्रकार की कलाबाजियां भी दिखाई। अपने करतब दिखाने के बाद यह विमान वहां लौट आया जहां से उड़ान भरी थी। इस हाइपरसोनिक विमान का डिजाइन चाइना एकेडमी आॅफ एयरोस्पेस एयरोडायनाॅमिक्स एवं चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नालाॅजी कारपोरेशन ने संयुक्त रूप से किया है।

आज यह पूरी दुनिया का दूसरा सफल वेवराइडर विमान है। चीन से पहले अमेरिका इस तरह का विमान बना चुका है। अमेरिका के इस वेवराइडर विमान का नाम बोइंग एक्स -51 है। अमेरिका अब तक इसके कई परीक्षण कर चुका है। वेवराइडर इस तरह के विमान होते हैं जो अपनी हाइपरसोनिक उड़ान के दौरान पैदा होने वाले वाली शाॅकवेव की मदद से अत्यधिक तेज गति में भी हवा में तैरता रहता है।

चाइना एकेडमी आॅफ एयरोस्पेस एयरोडायनाॅमिक्स का यह विमान परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। इसके अलावा यह संसार की किसी भी मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली को भेदने की क्षमता रखता है। सम्प्रति विश्व के अनेक देशों के पास जो मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली है वह धीमी गति से चलने वाली क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों का आसानी से पता लगा सकती है। इस कारण इन्हें रोका जा सकता है।

जबकि हाइपरसोनिक विमान को उसकी तेज गति के कारण उसका पता लगाना एक बड़ी चुनौती है। इसलिए इन्हें रोकना एक तरह से नामुमकिन हो सकता है। चीन की सेना में शामिल किए जाने से पहले अभी इसके कई और परीक्षण किए जाएंगे। रूस भी हाइपरसोनिक विमान का परीक्षण कर चुका है। भारत में फिलहाल हाइपरसोनिक प्रणाली पर काम चल रहा है।

चीन ने जब इस विमान का परीक्षण किया तो यह 30 किलोमीटर की उंचाई तक उड़ान भरने में सफल रहा था। इसकी ध्वनि की रफ्तार 0.343 किलोमीटर प्रति सेकेंड है। जबकि विमान की रफ्तार 2.04 किलोमीटर प्रति सेकेंड है अर्थात यह 5.5 से 6 मैक की गति से उड़ता है। मैक से तात्पर्य यह है कि जिस माध्यम में विमान उड़ रहा है उससे विमान की गति से ध्वनि की गति के अनुपात को मैक नम्बर कहा जाता है।

इस विमान को किसी भी राॅकेट से लांच किया जा सकता है। यह पारम्परिक व परमाणु दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है। इसके परीक्षण के बाद चीन, अमेरिका व रूस से बराबरी के मुकाबले पर आ गया है। चीन की वायुसेना में शामिल किए जाने के अलावा यह सार्वजनिक सेवा में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मौजूदा जनरेशन क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए की गई है जिन्हें रोकना सम्भव है।

जबकि चीन का हाइपरसोनिक एयरक्राफ्ट इतना तेज उड़ता है कि यह मौजूदा एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए एक चुनौती है। चीन का पड़ोसी होने के नाते भारत को अपनी सुरक्षात्मक विकास गति तेज करनी होगी। भारत ने इस साल ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। वर्तमान समय में यह मिसाइल मैक 2.8 ध्वनि रफ्तार पर उड़ान भर रही है।

अगले पांच सालों में इसकी रफ्तार 3.5 से 5 मैक तक पहुंच जाने की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में भारत को हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम बनाने के लिए सात से दस साल और लगेंगे। भारत इस चुनौती से निपटने के लिए रूस से विमान भेदी मिसाइल प्रणाली एस-400 ट्राॅयम्फ खरीदने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए दोनों देशों की सरकारें शर्तों पर सामान्य बातचीत कर रही हैं।

चीन स्वतंत्र तिब्बतीय क्षेत्र में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल्टा तकनाीक से लैस राॅकेट तैनात करने की योजना बना रहा है। इस तकनीक की मदद से ये राॅकेट उंचाई वाले इलाकों में 200 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होंगे। इसी माह की शुरुआत में चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अन्तर्गत हान जुनली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक राॅकेट आर्टीलरी को विकसित करने पर काम कर रहे हैं।

हान जुनली इंजीनियरिंग एकेडमी के मा टोमिंग से प्रेरित हैं। मा टोमिंग को चीन में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल्टा तकनीक का जनक माना जाता है। चीन के पहाड़ी क्षेत्रों में यह तकनीक काम आती है। हान के मुताबिक चीन के पास लंबे पहाड़ी और पठारी क्षेत्र हैं जहां इस तरह के राॅकेट पहंुचाए जा सकते हैं। इसके जरिए चीन सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर स्थित शत्रुओं को भी आसानी से अपने इलाके से निकाल सकता है।

आने वाले दिनों में उसकी यह तकनीक जंगी जहाजों में भी इस्तेमाल की जाएगी। विदित हो कि पिछले माह पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की एक विशेष टुकड़ी ने तिब्बत में युद्धाभ्यास भी किया था। यह उनका दूसरा युद्धाभ्यास था। इस युद्धाभ्यास के दौरान पायलटों और विशेष बल के जवानों को हेलीकाॅप्टर से उतरने का प्रशिक्षण दिया गया था। निश्चित है कि चीनी सेना के ये युद्धाभ्यास सम्भवतः भारत के साथ टकराव की स्थिति में तैयारियों के मद्देनजर किए गए हैं

क्योंकि डोकलाम पर कभी तनाव बढ़ सकता है। चीन का ताकतवर होना स्वाभाविक है क्योंकि रक्षा खर्च में भारत चीन से कोसों दूर है। बीते 25 जुलाई को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में रक्षा राज्य मंत्री ने चीन व भारत के बीच रक्षा मद में होने वाले खर्च की तुलनात्मक स्थिति पेश की थी। सरकार ने चीन के मुकाबले देश में रक्षा मद में खर्च किए जाने का जो ब्योरा पेश किया उसके अनुसार चीन का रक्षा बजट तकरीबन 22823 करोड़ डाॅलर अर्थात 15 लाख 68 हजार करोड़ रुपये है।

वहीं दूसरी तरफ भारत का रक्षा बजट 6392 करोड़ डाॅलर यानि कि लगभग 4 लाख 39 हजार करोड़ रुपये है। इस तरह चीन भारत से तीन गुना से भी ज्यादा रक्षा के मद में खर्च करता है। ऐसे में हमें अपना रक्षा खर्च बढ़ाना होगा। चीन की तरफ से जो चुनातियां मिल रहीं हैं वह भारत के लिए चिन्तनीय हैं। खासतौर पर हमें यह ध्यान में रखना होगा कि जिस तरह से वह हमारे पूर्वोत्तर के राज्यों पर नजर जमाए हुए है या भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश कर रहा है उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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