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चीन का रक्षा बजट: ताकत बढ़ाने के प्रयास में चीन, अमेरिका को दे रहा टक्कर

चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के प्रवक्ता की ओर से हर साल वार्षिक संसद सम्मेलन के ठीक पहले देश के रक्षा बजट का ऐलान किया जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया।

चीन का रक्षा बजट: ताकत बढ़ाने के प्रयास में चीन, अमेरिका को दे रहा टक्कर
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चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के प्रवक्ता की ओर से हर साल वार्षिक संसद सम्मेलन के ठीक पहले देश के रक्षा बजट का ऐलान किया जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया। यह सम्मेलन हर साल मार्च के प्रथम सप्ताह में होता है। झांग येसुई इस समय नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के प्रवक्ता हैं, जो कि पूर्व विदेश उपमंत्री रह चुके हैं। झांग ने इस बार न तो रक्षा बजट की जानकारी दी और न ही यह बताया कि इसमें कितने प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।

हालांकि उन्होंने चीन की रक्षा जरूरतों में वृद्धि को सही ठहराया है। उनका कहना है कि चीन के उभार के साथ रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी जरूरी है। उन्होंने कहा कि चीन शान्तिपूर्ण विकास की राह पर आगे बढ़ता रहेगा। चीन की रक्षा नीति जो स्वभाव से ही रक्षात्मक है और उसका विकास किसी भी देश के लिए खतरा पैदा नहीं करेगा। चीन ने पिछले वर्ष अपने रक्षा बजट को 150.5 अरब अमेरिकी डाॅलर की ऊंचाई पर पहंुचा दिया था।

यह हाल ही में पेश किए गए भारत के रक्षा बजट के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। अब जो बढ़ोत्तरी की गई है वह निश्िचत रूप से इससे काफी ज्यादा होगी, क्योंकि उसकी अनेक सामरिक योजनाएं जारी हैं। इनमें खासकर चीन दो नए एयरक्राफ्ट कैरियर बना रहा है, जबकि एक एयरक्राफ्ट कैरियर उसके पास पहले से ही है। उल्लेखनीय है कि चीन की नौसेना भी अपनी वैश्िवक पहंुच बढ़ा रही है। इसके अलावा वन बेल्ट वन रोड परियोजना भी एक सामरिक योजना ही है।

झांग ने इस बढ़ोत्तरी का बचाव करते हुए कहा कि चीन रक्षा के क्षेत्र में जो खर्च कर रहा है वह तमाम अन्य बड़े देशों की तुलना में काफी कम है। संप्रति दुनिया में अमेरिका का रक्षा बजट सबसे ज्यादा 602.8 अरब अमेरिकी डाॅलर है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते विवाद एवं अमेरिका से तनातनी के बीच चीन ने पिछले साल अपना रक्षा बजट सात प्रतिशत बढ़ाया था। इससे पहले वर्ष 2016 में चीन का रक्षा बजट 7.6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ 94435 करोड़ युआन था।

अब यह एक लाख करोड़ युआन को पार कर चुका है। चीन का कहना है कि देश की संप्रभुता एवं सुरक्षा के लिए चीन की सैन्य क्षमता का विस्तार जारी रहेगा। इस साल के रक्षा बजट का मुख्य जोर नौसेना के विकास पर रहेगा, क्योंकि दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर पर उसके दावे तथा समुद्री आवागमन के लिहाज से इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है, इसलिए दक्षिण चीन सागर सहित सामुद्रिक क्षेत्र में चीन अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।

उसके रक्षा अधिकारियों के मुताबिक दक्षिण चीन सागर में अमेरिका की बराबरी में आने के लिए विमानवाहक पोत व पनडुब्बियों की जरूरत है। चीन के सामने सबसे बड़ी चिंता अपने तीन लाख सैनिकों को लेकर भी है। साल 2015 में शी जिनफिंग द्वारा अपनी सेना में तीन लाख की सैन्य संख्या घटाने की घोषणा की गई थी। यह कटौती 2018 में भी जारी रहनी है। चीन का कहना है कि हम देश की सुरक्षा एवं सशस्त्र बलों के सुधार के प्रयासों का समर्थन करेंगे।

ठोस सुरक्षा और मजबूत सशस्त्र बल चीन की विश्वस्तरीय ताकत के अनुरूप है। यह हमारी सुरक्षा और विकास के हितों के पक्ष में है। हम सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा तैयारी बढ़ाएंगे ताकि हमारी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के हित सुनिश्िचत हो सके। हम निश्िचत तौर पर अपनी समुद्री और वायु सुरक्षा मजबूत करेंगे। देश के सैन्य खर्च में बढ़ोत्तरी खासतौर पर नौसेना के लिए खर्च में वृद्धि का मकसद विदेशों में तेजी से विस्तारित होती देशी हितों की रक्षा करना है।

इसके अलावा एशिया प्रशांत क्षेत्र में अस्थिर सुरक्षा स्थिति को देखते हुए उसके जवाब के तौर पर तैयार होना है। सशक्त नौसेना के अभाव में चीन किस प्रकार से विदेशों में रहने वाले अपने लाखों लोगों की और बड़ी मात्रा में विदेशी निवेश की रक्षा कर पाएगा। विदित हो कि वर्ष 2016 में चीन का विदेशी निवेश 221 अरब डाॅलर तक पहंुच गया था। अब इसे और बढ़ाना है। ऐसे में चीन को विश्वभर में अपने प्रमुख व्यापार मार्गों की रक्षा करने में सक्षम होना होगा।

चीन ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद साल 2016 में रक्षा बजट को 7.6 प्रतिशत बढ़ाकर 146 अरब डाॅलर यानी कि 9771 अरब रुपये किया था। इससें पहले वर्ष 2015 में चीन का रक्षा बजट 145 अरब डाॅलर यानी कि नाै लाख चौहत्तर हजार सात सौ बासठ करोड़ रुपये था। चीन ने वर्ष 2011 से 2015 तक रक्षा बजट में सालाना वृद्धि औसतन तेरह फीसदी की थी। चीन लगातार पांच वर्षों से रक्षा बजट में सालाना 10 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि कर रहा था।

उसने अपने रक्षा बजट में वर्ष 2011 में 12.7 फीसदी, वर्ष 2012 में 11.2 फीसदी एवं वर्ष 2013 में 11 प्रतिशत से अधिक, वर्ष 2014 में 12.2 प्रतिशत, साल 2015 में 10.1 प्रतिशत, वर्ष 2016 में 7.6 प्रतिशत तथा वर्ष 2017 में सात प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की थी। इस साल के चीनी कदम को सेना के आधुनिकीकरण के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद चीन ने अपने रक्षा बजट में वृद्धि सैन्यीकरण के प्रयासों को तेजी देने के लिए ही की है।

निश्िचत है कि वह अपनी सामरिक क्षमता बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। चीन ने अपने रक्षा बजट में वृद्धि को उचित ठहराते हुए यह भी कहा कि अमेरिका एशिया- प्रशान्त क्षेत्र का सैन्यीकरण कर रहा है। इसके साथ ही खास बात यह भी है कि खासकर दक्षिण चीन सागर को लेकर खींचतान सबसे ज्यादा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान दोनों देशों के बीच यह तनाव का कारण बना हुआ है।

दक्षिण चीन सागर के सैन्यीकरण के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराना भ्रम पैदा करने के लिए है। चीनी नेतृत्व हमेशा से ही रक्षा खर्चों में बढ़ोत्तरी का समर्थन करता आया है। चीन ने इससे पहले भी कहा था कि देश की सुरक्षा जरूरतों, आर्थिक विकास और राजकोषीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए रक्षा बजट बढ़ाने का फैसला किया गया है।

पड़ोसी देशों के साथ जमीनी और समुद्री सीमा पर टकराव के बीच चीन सैन्य आधुनिकीकरण के संबंध में विश्व की बड़ी सैन्य ताकत अमेरिका से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। इस तरह यह स्पष्ट हो जाता है कि चीन ने रक्षा क्षेत्र के लिए धनराशि भले ही घोषित न किया हो, लेकिन तेजी से बदलते हुए वैश्िवक परिवेश में उसका इरादा यही है कि वह सैन्य क्षेत्र में दुनिया के शक्ितशाली देशों की तुलना में सबसे ऊपर रहना चाहता है।

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