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निरंकार सिंह का लेख : जंग को तैयार चीन-अमेरिका

अमेरिका और चीन जंग के लिए तैयारी कर रहे हैं। यह जंग कभी भी हो सकती है। चीन पर पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैलाने का आरोप है। इससे दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए वह अपने पड़ोसी देशों को धमका रहा है। भारत से भी लद्दाख की सीमा पर चीन की तनातनी बनी हुई है, लेकिन चीन-अमेरिका के बीच जंग शुरू होते ही यह विश्व युद्ध में बदल जाएगी। इसमें उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे देश भी शामिल हो जाएंगे।

निरंकार सिंह का लेख :  जंग को तैयार चीन-अमेरिका
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निरंकार सिंह

चीन और अमेरिका के बीच दक्षिणी चीन सागर, हांगकांग और ताइवान को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। दोनों देश एक दूसरे से जंग के लिए तैयारी कर रहे हैं। यह जंग कभी भी हो सकती है। चीन पर पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैलाने का आरोप है। इससे दुनिया के तमाम देश उससे नाराज हैं। इससे दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए वह अपने पड़ोसी देशों को धमका रहा है। भारत से भी लद्दाख की सीमा पर चीन की तनातनी बनी हुई है, लेकिन चीन-अमेरिका के बीच जंग शुरू होते ही यह विश्व युद्ध में बदल जाएगी। इसमें उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे देश भी शामिल हो जाएंगे और अंततः पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ जाएगी। इस विश्वयुद्ध में कोई भी देश परमाणु बम इस्तेमाल करके दुनिया को परमाणु युद्ध में झोक देगा।

पिछले दो महीने में कोरोना वायरस को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तीखी बयानबाजी हुई है। चीन यहां तक कह चुका है कि अगर अमेरिका ने उकसाया तो 66 साल पहले की जंग फिर दोहराई जाएगी। अमेरिका को पिछले चार दशकों में इतनी सीधी धमकी किसी देश ने नहीं दी। 1950-53 की लड़ाई में अमेरिका और चीन के बीच हुई लड़ाई के तौर पर देखा गया। दोनों तरफ के 3 लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। अब एक बार फिर विवाद बढ़ता जा रहा है। आलम ये है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार चीन पर पाबंदियां लगाते जा रहे हैं। उन्होंने अपने ताजा फैसले में चीन से आने वाले यात्री विमानों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। 16 जून से दोनों देशों के बीच विमान सेवाएं बंद हो जाएंगी। इससे चीन की मुश्किलें बढ़नी तय मानी जा रही हैं। ये सब कुछ ऐसे समय में हो रहा है जब कोरोना की महामारी का दंश झेल रहे देशों की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने की कवायद जोर-शोर से चल रही है। अमेरिका और चीन के बीच की ये तनातनी यूं तो काफी लंबे समय से है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से इसमें विवादों की खाई और अधिक चौड़ी हो गई है। दक्षिण चीन सागर, दोनों देशों के बीच छिड़े ट्रेड वार, कोरोना उत्पत्ति को लेकर उठे सवाल और तीखी होती बयानबाजी के बीच अब ताइवान और हांगकांग का मुद्दा भी इसमें अपनी भूमिका निभाने लगा है। यही वजह है कि दोनों जिस तरह का रुख इख्तियार कर रहे हैं उससे लगता है कि ये आर-पार की जंग के लिए कहीं न कहीं तैयार हो रहे हैं।

चीन के सरकारी मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि चीन अमेरिका के साथ संभावित सैन्य टकराव की तैयारियों में जुट गया है। ये खबरें ऐसे वक्त में आई हैं जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि दक्षिणी चीन सागर विवाद और अन्य मुद्दों पर बीजिंग के दावों का मुकाबला करने के लिए वह पहले से ज्यादा सख्त नीति अमल में लाएंगे। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की आधिकारिक वेबसाइट पर एक आलेख में कहा गया कि एशिया-प्रशांत में पहले से ज्यादा जटिल सुरक्षा स्थिति के बीच युद्ध की आशंका ज्यादा प्रबल हो गई है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता सीन स्पाइसर ने कहा कि अमेरिका दक्षिणी चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय जलसीमा क्षेत्रों पर नियंत्रण करने से चीन को रोकेगा। यदि अमेरिकी प्रशासन ने यही राह अपनाई और यही रवैया दिखाया तो चीन और अमेरिका के बीच युद्ध होगा और इसका मतलब अमेरिकी इतिहास का अंत या पूरी मानवता का अंत होगा। कैनरोंग ने कहा, अमेरिका पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में तीन विमानवाहक पोत भेजने की योजना बना रहा है। यदि उन्होंने दक्षिणी चीन सागर पर आक्रमण किया तो तीन की बात ही छोड़ दें, हम 10 पोत भेजने पर भी उन्हें तबाह करने की क्षमता रखते हैं।

अमेरिका चीन को कई बार उत्तरी कोरिया पर भी लगाम लगाने के लिए कह चुका है, लेकिन उत्तर कोरिया लगातार मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है। उसका इरादा अमेरिका तक मार करने वाली बैलास्टिक मिसाइल का बनाना है। उधर अमेरिका प्रशांत महासागर और इसके विवादित हिस्से दक्षिणी चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देख नाराज है। दोनाें देश इस समुद्र का अघोषित राजा बनना चाहते हैं। इसीलिए चीन यहां अपने एयर बेस और अड्डे बनाने में जुटा है तो अमेरिका अपने वाॅरशिप और प्लेन भेज उसे छेड़ देता है। चीन अमेरिका के दक्षिणी चीन सागर मामले में दखल देने से नाराज है। चीन इसे अपना इलाका बताता है। जबकि उसके पड़ोसी देश वियतनाम, मलेशिया, ब्रूनेई, फिलीपीन्स और ताइवान अपना। हाल में तनाव और गहरा गया जब अमेरिकी टोही विमान ईपी-3 एरीज ने इस इलाके के ऊपर उड़ान भरी। इसके बाद दो चीनी जे-11 लड़ाकू विमानों ने अमेरिकी विमान का पीछा किया। फिर चीन ने अमेरिका को जासूसी न करने की धमकी दी। लेकिन अमेरिका फिर भी नहीं माना। उसने अपना मिसाइल डेस्ट्रायर शिप चीन समुद्र में 22 किमी. अंदर तक भेज दिया।

इस इलाके के द्वीप पर चीन ने एक एयरपोर्ट बनवाया है। माना जा रहा है कि लड़ाकू विनामों को तैनात करने के लिए ऐसा किया गया है। अमेरिका और चीन में प्रशांत महासागर पर ताकत और वर्चस्व की होड़ है। चीन पहली बार इस क्षेत्र में परमाणु मिसाइलों से लैस पनडुब्बियां भेजने की तैयारी कर रहा है। वहीं अमेरिका इस क्षेत्र में पहले ही अपने कई आधुनिक हथियार तैनात कर चुका है। साथ ही उसने चीन के विरोधी देश साउथ कोरिया में एंटी बैलिस्टिक सिस्टम और हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल तैनात की हैं। ये मिसाइल एक घंटे के भीतर चीन को निशाना बनाने में सक्षम है। समुद्री इलाके को लेकर चीन और वियतनाम में वर्षों से झगड़ा है। इसका फायदा उठा अमेरिका वियतनाम के नजदीक आ रहा है। अमेरिका ने वियतनाम पर हथियारों की डील पर लगी वर्षो पुरानी पाबंदी तक हटा दी। चीन ने सीधे तौर पर इसे अपने ऊपर हमला माना।

कुछ दिनों पहले पेंटागन ने चीनी सैन्य क्षमताओं को लेकर एक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा गया कि चीन गलत तरकीबें इस्तेमाल कर अपनी ताकत बढ़ा रहा है। उसका पूरा ध्यान समुद्री द्वीपों के सैन्यीकरण पर है। इस पर चीन बौखलाया है। उसने कहा कि रिपोर्ट में हमारी रक्षा नीतियों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। यह कहकर अमेरिका ने हमारा भरोसा तोड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है। राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने यह भी कहा था कि अगर चीन के साथ व्यापारिक युद्ध भी छिड़ जाता है तो भी हमारे लिए चिंता की बात नहीं होगी। अमेरिकी परमाणु विशेषज्ञों के मुताबिक चीन अथवा उत्तरी कोरिया अंतरिक्ष के परमाणु विस्फोट करके दुनिया के तमाम देशों को घुटनों पर ला सकता है। इसमें धरती पर मौजूद आधारभूत ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचेगा, लेकिन ऐसे विस्फोट से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगे पैदा होंगी जिससे संचार, खुफिया निगरानी, सैन्य तंत्र ध्वस्त हो जाएगा। दुनिया फिर से पाषाण युग में लौट जाएगी।

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