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देश में बच्चा गोद लेना हुआ आसान

विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों में जेजे अधिनियम की धारा 61 के तहत गोद लेने के मुद्दे के लिए जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को अधिकृत किया गया है ताकि ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके और जवाबदेही तय की जा सके। जिला मजिस्ट्रेट को अधिनियम के तहत और अधिक अधिकार देते हुए कानून के सुचारु क्रियान्यवन का भी अधिकार दिया गया है।

देश में बच्चा गोद लेना हुआ आसान
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : सरकार ने बच्चा गोद लेना आसान बना दिया है। यह स्वागत योग्य है। कोरोना के दौरान देश में अनेक बच्चे अनाथ हो गए। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मार्च 2020 के बाद कोरोना काल में देश में कुल 1742 बच्चे अनाथ हो गए हैं, करीब 7464 बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने दोनों में से किसी एक अभिभावक को खोया है, जबकि 140 बच्चों को ऐसे ही छोड़ दिया गया। सरकार के गोद लेने के आसान नियम से ऐसे अनाज बच्चों को गोद लेना आसान होगा।

वैसे तो सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कोरोना के दौरान कोविड से अनाथ हुए बच्चे समेत सभी अनाथ हुए बच्चों को केंद्रीय मदद देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ उन्हीं बच्चों तक पीएम केयर फंड के तहत वेलफेयर स्कीम का लाभ सीमित नहीं रहना चाहिए जिन बच्चों के पैरेंट्स कोविड के कारण चल बसे बल्कि उन तमाम अनाथ बच्चों को वेलफेयर स्कीम का लाभ मिलना चाहिए जो महामारी के दौरान अनाथ हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने कई स्कीम पेपर पर देखी हैं। हम चाहते हैं कि अनाथ बच्चों तक असलियत में स्कीम का लाभ पहुंचे। उसके बाद केंद्र सरकार ने अनाथ बच्चों के लिए बड़ा ऐलान किया था, जिसमें कहा गया था कि केंद्र ऐसे अनाथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया उठाया जाएगा, 18 साल होने पर बच्चों को छात्रवृत्ति मिलेगी, 23 साल की उम्र में होने पर 10 लाख रुपये का फंड मिलेगा, सभी बच्चों को आयुष्मान भारत का कवर दिया जाएगा। कोरोना के चलते ही सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 में बच्चों की सुरक्षा के मद में बजट पिछले साल के 60 करोड़ रुपये बढ़ा कर 1,500 करोड़ रुपये कर दिया है। सरकार ने इन ऐलानों से साफ है कि सरकार अनाथ बच्चों के संरक्षण व भविष्य के प्रति गंभीर है। और अब नए संशोधन विधेयक के कानून बन जाने से अनाथ बच्चों को लीगल वारिस मिलना भी आसान होगा।

विपक्ष के हंगामे के बीच किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल व संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 राज्यसभा में पास हुआ। लोकसभा में यह विधेयक 24 मार्च को पारित हो चुका है। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून के रूप ले लेगा। इससे पहले 2015 में इस एक्ट में संशोधन किया गया था। अब नया संशोधन विधेयक बच्चों के हितों की रक्षा के लिए आगामी पीढ़ी की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बाल कल्याण समितियों को ज्यादा ताकत दी जा रही है। इससे बच्चों का बेहतर संरक्षण करने में मदद मिलेगी। केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के मुताबिक, 'जवेनाइल जस्टिस अमेंडमेंट विधेयक में बच्चों से जुड़े मामलों का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित करने और जवाबदेही बढ़ाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट व अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को ज्यादा शक्तियां देकर सशक्त बनाया गया है।' बच्चों के संरक्षण के ढांचे को जिलावार व प्रदेशवार मजबूत बनाने के उपाय किए गए हैं।

विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों में जेजे अधिनियम की धारा 61 के तहत गोद लेने के मुद्दे के लिए जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को अधिकृत किया गया है ताकि ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके और जवाबदेही तय की जा सके। जिला मजिस्ट्रेट को अधिनियम के तहत और अधिक अधिकार देते हुए कानून के सुचारु क्रियान्यवन का भी अधिकार दिया गया है। बच्चों के गोद लिए जाने से संबंधित देभर में करीब 1,000 ज्यादा मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) देश में अनाथ, छोड़ दिए गए और आत्म-समर्पण करने वाले बच्चों के अडॉप्शन के लिए काम करती है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब जिला स्तर पर गोद लेना आसान होगा और सभी तरह के अनाथ बच्चों को इसका लाभ मिलेगा और जिला के संबंधित अधिकारी अपने अधिकार का दुरुपयोग नहीं करेंगे।

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