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हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं

छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिला नक्सलियों के आतंक के लिए कुख्यात रहा है।

हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं
छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिला नक्सलियों के आतंक के लिए कुख्यात रहा है। ऐसे में यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जाना और रैली को संबोधित करना कई तरह से महत्वपूर्ण है। देश में ऐसे दो सौ से ज्यादा जिले हैं जहां नक्सलियों का प्रभाव है। एक सच्चाईयह भी है कि इन आदिवासी इलाकों में आजादी के छह दशक बीत जाने के बाद भी विकास की धारा नहीं पहुंच पाई है। वे अब भी विकास की बाट जोह रहे हैं। आदिवासियों के बंदूक उठाने में शासन तंत्र की विफलता भी कहीं न कहीं जिम्मेदार है।
प्रधानमंत्री मोदी इन पिछड़े इलाके में न केवल विकास का संदेश लेकर गए, बल्कि उन्होंने कुछ बड़ी कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत भी की। इसी दौरान उन्होंने भटके हुए नक्सलियों को हथियार छोड़कर शांति और विकास के रास्ते पर चलने की नसीहत भी दी। नरेंद्र मोदी इससे पहले भी नक्सलियों को ऐसी नसीहत दे चुके हैं। उनकी हिंसक गतिविधियों को देखते हुए यह कहना कठिन है कि प्रधानमंत्री की नसीहत का अभी उन पर कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और वे यह समझने के लिए तैयार होंगे कि हिंसा के रास्ते पर चलकर कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। आशा इसलिए भी नहीं है क्योंकि उनके दंतेवाड़ा आगमन से पूर्व ही नक्सली उनके विरोधस्वरूप पड़ोस के सुकमा जिले के एक गांव के करीब तीन सौ लोगों को बंधक बना लिए थे। साथ ही सड़कों, रेल की पटरियों को जगह-जगह क्षतिग्रस्त कर दिए थे।
इससे साफ है कि वे हिंसा के रास्ते को आसानी से नहीं छोड़ेंगे। वे पुलिस और सुरक्षा बलों की निर्मम हत्या कर रहे हैं। एक तरफ नक्सली आरोप लगा रहे हैं कि शासन तंत्र गरीब, शोषित और वंचितों के लिए कुछ नहीं कर रहा है और दूसरी तरफ वे विकास कार्यों में बाधा पहुंचा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि उनको आदिवासियों की कोई परवाह नहीं है। सड़क, रेल पटरी, पुल-पुलिया, स्कूल, अस्पताल और मोबाइल टावर का निर्माण होगा तो आदिवासियों और दलितों को ही राहत मिलेगी। यह सही है कि नक्सलवाद एक आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन आज यह अपने रास्ते से भटक गया है। इसमें तमाम ऐसी बुराइयों का समावेश हो गया है जो भारत जैसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं। गरीबों और वंचितों के हितों की रक्षा के नाम पर वे एक प्रकार के गिरोह का रूप ले चुके हैं, जिनका उद्देश्य उगाही करना और फिरौती वसूलना है।
यही वजह है कि आज नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब में आतंकवाद की तरह नक्सलवाद को भी खत्म करने का इरादा जताया है। केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि जहां सख्ती की जरूरत होगी वहां वह बल प्रयोग करेगी और जो इलाके विकास की धारा से अछूते रह गए हैं, वहां विकास कार्यों में और तेजी लाएगी। हालांकि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ें और उनका लाभ अंतिम व्यक्ति को जरूर मिले। नक्सलियों को भी हिंसा छोड़ बातचीत के जरिए समस्याओं के समाधान खोजने के प्रयास करने चाहिए। उनको एक बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि हिंसा से किसी का भी भला नहीं होगा।
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