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Editorial : राष्ट्रीय प्लान बनाने पर काम करे केंद्र सरकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी की है कि ‘लोगों में नैतिकता खत्म हो चुकी है, मिलकर कोरोना से लड़ने की बजाय दवाओं, ऑक्सीजन आदि की कालाबाजारी कर रहे हैं।’ यह स्थिति बेहद शर्मनाक है, यह केंद्र व राज्य सरकारों की नीतिगत उदासीनता को दिखाती है।

Editorial : राष्ट्रीय प्लान बनाने पर काम करे केंद्र सरकार
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : देश में कोरोना को लेकर जो हाहाकारी स्थिति है, उसमें अदालतों की सख्त टिप्पणी सरकारों के लिए आईना की तरह है। अभी सरकार के लिए यक्ष प्रश्न होना चाहिए कि इलाज में कमी के चलते किसी नागरिक की मौत ना हो। देश में रोजाना जिस तरह रिकार्ड नए केस आ रहे हैं और कोविड-19 से मौतें हो रही हैं, उसमें अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी, वेंटिलेटर व जीवनरक्षक दवाओं की किल्लत की बातें सामने आ रही हैं। इस वक्त, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

अब तक स्थिति संभालने में कामयाब रहे केरल में भी कोरोना विस्फोट की खबर आ रही है। वहां 24 घंटे में 42 हजार नए केस आने की मीडिया रिपोर्ट है। केरल की सरकार ने 16 मई तक के लिए पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया है। 6 मई को एक बार फिर नए केस का आंकड़ा चार लाख पार कर गया है और करीब 39 सौ से अधिक लोगों की मौत हुई है। इससे पहले 30 अप्रैल को चार लाख से अधिक नए केस आए थे। चिकित्सा विज्ञानियों के अनुमानों के मुताबिक भारत अभी दूसरी लहर की पीक की ओर बढ़ रहा है और आगे तीसरी तहर के भी आने की संभावना है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा है कि अगर तीसरी लहर की चपेट में बच्चे आए तो मां-बाप क्या करेंगे, अस्पताल में रहेंगे या क्या करेंगे? शीर्ष अदालत ने कहा कि अभी हम दिल्ली को देख रहे लेकिन ग्रामीण इलाकों का क्या, जहां ज्यादातर लोग झेल रहे हैं, आप सिर्फ आज की स्थिति को देख रहे हैं लेकिन हम भविष्य को देख रहे हैं, उसके लिए आपके पास क्या प्लान है? जरूरत राष्ट्रीय प्लान की है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी की है कि 'लोगों में नैतिकता खत्म हो चुकी है, मिलकर कोरोना से लड़ने की बजाय दवाओं, ऑक्सीजन आदि की कालाबाजारी कर रहे हैं।' यह स्थिति बेहद शर्मनाक है, यह केंद्र व राज्य सरकारों की नीतिगत उदासीनता को दिखाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना के हालात पर एक बैठक की और हरेक राज्य में मरीजों की स्थिति की जानकारी ली। पीएम ने टीकाकरण की गति में कमी नहीं आने देने और दवाइयों की कमी नहीं रहने देने के राज्यों को निर्देश दिए। पीएम ने कोरोना की रोकथाम के लिए त्वरित और समग्र उपायों को सुनिश्चित करने के उपाय करने को कहा है। अभी कोरोना से निपटने में बड़ा सवाल ऑक्सीजन की कमी का आ रहा है। कोरोना के इलाज को लेकर अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई लगती है। कहीं दवा की कालाबाजारी हो रही है, कहीं ऑक्सीजन की कमी है, हर कोई अपने स्तर पर ऑक्सीजन के इंतजाम में जुटे हैं।

यह स्थिति अफरातफरी को दर्शाती है। कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए केंद्रीय स्तर पर होना यह चाहिए था कि सरकार ऑक्सीजन उत्पादन, परिवहन और अस्पतालों को आपूर्ति अपने हाथ में ले लेती, वेंटिलेटर, आईसीयू आदि केवल जरूरतमंदों को सरकार की निगरानी में ही दी जाती। कोरोना मरीजों के लिए सभी प्रकार की दवाएं केवल सरकार उपलब्ध करवाती। सरकार निजी क्षेत्र के अस्पतालों को पैनल में जरूर शामिल करती, लेकिन वहां ऑक्सीजन से लेकर दवाओं तक की आपूर्ति सरकारी एजेंसी करती। सरकारी व निजी दोनों प्रकार के अस्पतालों में कोरोना का इलाज या तो मुफ्त में किया जाता या सभी मेडिकल सुविधाओं के चार्ज तय कर दिए जाते। इससे अराजकता नहीं फैलती, कालाबाजारी नहीं होती और लोगों में सरकार के प्रति भरोसा जमता कि अगर कोरोना होगा तो उनका इलाज होगा। इस वक्त लोगों को सरकार से सही सूचना के साथ भरोसा चाहिए कि वे महफूज हैं, इसलिए कोरोना से निपटने के लिए केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की बात सुनते हुए राष्ट्रीय प्लान बनाने पर काम करना चाहिए।

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