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एमएसपी में लागत से बंपर बढ़ोत्तरी, मोदी सरकार ने पूरा किया वादा-किसानों की आय में होगा डेढ़ गुना इजाफा

मोदी सरकार किसानों से किए वादे पूरा करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ती दिख रही है। केंद्र सरकार ने धान, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और रागी सहित खरीफ की सभी 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में लागत से डेढ़ गुना तक की बंपर बढ़ोत्तरी की है।

एमएसपी में लागत से बंपर बढ़ोत्तरी, मोदी सरकार ने पूरा किया वादा-किसानों की आय में होगा डेढ़ गुना इजाफा
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मोदी सरकार किसानों से किए वादे पूरा करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ती दिख रही है। केंद्र सरकार ने धान, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और रागी सहित खरीफ की सभी 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में लागत से डेढ़ गुना तक की बंपर बढ़ोत्तरी की है।

इस साल बजट में सरकार ने किसानों को उनकी फसल की लागत से डेढ़ गुना ज्यादा एमएसपी देने का वादा किया था। दस साल में पहली बार धान के समर्थन मूल्य में सबसे ज्यादा 200 रुपये क्विंटल का इजाफा किया है।

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मोटे अनाज- ज्वार, बाजरा और रागी के एमएसपी में 900 रुपये प्रति क्विंटल तक, मूंग की एमएसपी में प्रति क्विंटल 300 रुपये व तुअर दाल की एमएसपी में प्रति क्विंटल 225 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

रागी पर सबसे ज्यादा एमएसपी 52.5 फीसदी बढ़ाया गया है। ज्वार पर 42 फीसदी व बाजरे पर 36.8 फीसदी समर्थन मूल्य बढ़ाए गए हैं। एमएसपी इजाफे से केंद्र पर 33500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा।

गत 29 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों से मुलाकात की थी, इसमें उन्होंने एमएसपी समेत किसानों की समस्याओं को हल करने का वादा किया था।

पीएम मोदी 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना चाहते हैं। एमएसपी में वृद्धि उसी ओर प्रयास है। इससे पहले सरकार फसल बीमा योजना और सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम लांच कर चुकी है। पिछले चार बजट से सिंचाई योजना को भी विस्तार दिया जा रहा है, ताकि वर्षा पर निर्भरता कम हो।

एमएसपी में बढ़ोतरी से पहले मोदी सरकार ने गन्ना किसानों को राहत देने के लिए 8,500 करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान भी कर चुकी है। हालांकि इस बार करीब एक माह की देरी से खरीफ फसलों के लिए एमएसपी ऐलान किया गया है।

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इसके बावजूद यह बड़ा कदम है। सरकार फसल के बिक्री मूल्य में गिरावट को रोकने के लिए एमएसपी तय करती है, इससे किसान नुकसान उठाने से बच जाते हैं। अभी व्यापक नई खरीद नीति की घोषणा करना जरूरी था, क्योंकि दाल, तिलहन और कॉटन की खरीद प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत होती है, लेकिन इसमें कई खामियां हैं।

मौजूदा समय में किसानों को मूंगफली, सोयाबीन, रागी, मक्का, बाजरा और ज्वार सहित 23 अधूसूचित फसलों पर दाम एमएसपी से कम मिल रहा है। अब सरकार इन फसलों की खरीद पर संबंधित एजेंसियों को हो रहे नुकसान की भी भरपाई करेगी।

एमएसपी बढ़ने का सकारात्मक असर शेयर बाजार पर भी देखा गया। सेंसेक्स 267 अंक उछला तो निफ्टी 10750 के पार चला गया। एमएसपी में वृद्धि के राजनीतिक मायने भी हैं। मोदी सरकार ने यह फैसला वैसे समय में लिया है, जब देश भर में उसे किसानों के असंतोष का सामना करना पड़ा है।

कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल मोदी सरकार को किसान विरोधी साबित करने में जुटे हुए हैं। किसानों के मुद्दे के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार पीएम मोदी को घेरते रहे हैं। ऐसे में एमएसपी में तगड़े इजाफे के फैसले से जहां किसानों को फायदा होगा, वहीं विपक्ष के आरोपों की धार कुंद होगी।

किसानों के बीच मोदी सरकार की छवि सुधरेगी। इस फैसले को मोदी सरकार का राजनीतिक मास्टर सट्रोक माना जा सकता है। इससे 2019 में लोकसभा व इस साल विधानसभा के चुनावों में राजग को लाभ मिल सकता है, जैसे मनमोहन सरकार ने यूपीए-1 के कार्यकाल के आखिरी साल 2008 में एमएसपी में बढ़ोतरी की थी और अगले साल चुनाव में यूपीए की वापसी हुई थी।

पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, हरियाणा, बिहार, कर्नाटक, गुजरात और छत्तीसगढ़ में किसान चुनावों को प्रभावित करते हैं। एमएसपी वृद्धि से कृषि क्षेत्र की मौजूदा विकास दर एक फीसदी से कम को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। दहाई अंक में जीडीपी दर को ले जाने के लिए कृषि क्षेत्र की विकास दर चार फीसदी के करीब होना चाहिए।

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