Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख : कोरोना के बीच रियायतों का बजट

इस अभूतपूर्व बजट के माध्यम से वित्तमंत्री ने विभिन्न वर्गों और विभिन्न सेक्टरों के लिए भारी भरकम बजट आवंटित करते हुए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 68 फीसदी तक विस्तारित करने में संकोच नहीं किया है। गौरतलब है कि यह बजट आजादी के बाद अर्थव्यवस्था के सबसे अधिक 7.7 फीसदी की विकास दर में गिरावट और संकुचन वाले दौर से गुजरने के बीच पेश किया गया है। देश में संकुचन के बाद पेश हुए पिछले तीन बजटों में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के जिस तरह भारी प्रोत्साहन दिए गए थे, इस बार कोरोना के बाद संकुचित अर्थव्यवस्था को गतिशील करने के लिए और प्रोत्साहन वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में दिखाई दे रहे हैं।

डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख : कोरोना के बीच रियायतों का बजट
X

डॉ. जयंतीलाल भंडारी 

डॉ. जयंतीलाल भंडारी

यकीनन वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा पेश किया गया वित्त वर्ष 2021-22 का बजट कोविड-19 के कारण आजादी के बाद से अब तक की सबसे अधिक आर्थिक निराशाजनक पृष्ठभूमि की चुनौतियों के बीच भी सर्वाधिक आर्थिक उम्मीदों भरा बजट दिखाई दे रहा है। इस अभूतपूर्व बजट के माध्यम से वित्तमंत्री ने विभिन्न वर्गों और विभिन्न सेक्टरों के लिए भारी भरकम बजट आवंटित करते हुए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 68 फीसदी तक विस्तारित करने में संकोच नहीं किया है।

गौरतलब है कि यह बजट आजादी के बाद अर्थव्यवस्था के सबसे अधिक 7.7 फीसदी की विकास दर में गिरावट और संकुचन वाले दौर से गुजरने के बीच पेश किया गया है। यदि हम संकुचन के बीच पेश किए जाने वाले पिछले आम बजटों की ओर देखें तो पाते हैं कि आजादी के बाद विभिन्न आर्थिक चुनौतियों के कारण जिन तीन वर्षों में बजट संकुचन की पृष्ठभूमि में पेश हुए हैं, वे वर्ष हैं 1966-67, 1973-74 तथा 1980-81। देश में संकुचन के बाद पेश हुए पिछले तीन बजटों में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के जिस तरह भारी प्रोत्साहन दिए गए थे, इस बार कोरोना के बाद संकुचित अर्थव्यवस्था को गतिशील करने के लिए और प्रोत्साहन वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में दिखाई दे रहे हैं।

नए बजट की तस्वीर में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कोरोना से निर्मित अप्रत्यशित आर्थिक सुस्ती का मुकाबला करने और विभिन्न वर्गों को राहत देने के लिए बड़े पैमाने पर आवंटन बढ़ाए गए हैं। रोजगार के नए अवसर पैदा करने के प्रयास किए गए हैं। तेजी से घटे हुए निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक प्रावधान किए गए हैं। बैंकों में लगातार बढ़ते हुए एनपीए को नियंत्रित करने और क्रेडिट सपोर्ट को जारी रखने की नई व्यवस्थाएं की गई हैं। नए बजट में महंगाई पर नियंत्रण और नई मांग का निर्माण करने की रणनीति है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च में भारी वृद्धि की गई है। निस्संदेह बजट से खेती और किसानों को विशेष रूप से लाभान्िवत करते हुए दिखाई दी हैं। बजट में किसानों के लिए सरल कर्ज के लिए 16.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

किसानों को उनकी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से डेढ़ गुना ज्यादा कीमत दी जानी निर्धारित की गई है। सरकार ने ऐसे नए उद्यमों तथा कृषि बाजारों को प्रोत्साहन दिया है, जिनसे कृषि उत्पादों को लाभदायक कीमत दिलाने में मदद करने के साथ उपभोक्ताओं को ये उत्पाद मुनासिब दाम पर पहुंचाने में मदद हो सके। वित्तमंत्री द्वारा बजट के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के उपायों के साथ कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास के माध्यम से बेरोजगारी और गरीबी को दूर करने वाले कामों को प्रोत्साहन दिया गया है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि वित्तमंत्री ने इस बार एमएसएमई को 15700 करोड़ रुपये का बड़ा प्रभावी बजट दिया है। छोटे उद्योग की परिभाषा बदली गई है। कोरोना काल के दौरान जो एमएसएमई एनपीए हो गए हैं, उनके लिए भी वित्तमंत्री नया रास्ता निकालते हुए दिखाई दी हैं। नए बजट के तहत एमएसएमई के लिए तकनीकी विकास और नवाचार संबंधी लाभ के लिए वित्तमंत्री के द्वारा नई व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। सरकार ने एमएसएमई को नवीनतम तकनीक के इस्तेमाल के लिए वित्तीय सहायता देने का प्रावधान सुनिश्चित किया है। नए बजट में सरकार की तरफ से तकनीक की सुविधा मुहैया होने से एमएसएमई के कारोबार को नया रंग-रूप मिलते हुए दिखेेगा।

चूंकि कोविड-19 के कारण देश के पर्यटन उद्योग, होटल उद्योग सहित जो विभिन्न उद्योग-कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, ऐसे में उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए बजट में बड़ी धनराशि रखी गई है। नए बजट के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर आवंटन बढ़ाकर 2.38 लाख करोड़ रुपये किया गया है। बजट में नई शिक्षा प्रणाली और कौशल विकास, शासकीय स्कूलों की गुणवत्ता, सार्वजनिक परिवहन जैसे विभिन्न आवश्यक क्षेत्रों के साथ-साथ रोजगार वृद्धि के लिए टैक्सटाइल सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए बड़े बजट आवंटन दिखाई दे रहे हैं। बीमा सेक्टर में एफडीआई सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी किए जाने का ऐलान किया गया है। आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाया गया है। शोध एवं नवाचार, निर्यात डेवलपमेंट फंड तथा फॉर्मा उद्योग आदि के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए गए हैं। जीएसटी को आसान बनाने का ऐलान भी किया गया है।

जहां शेयर बाजार में जोखिमों को कम करने के उपयुक्त प्रावधान किए किए गए हैं। वहीं शेयर बाजार को और अधिक लाभप्रद बनाने के प्रावधान भी सुनिश्चित किए गए हैं। सिक्योरिटी मार्केट के लिए उठाया गया कदम लाभप्रद है। मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन देने के लिए कुछ ऑटो पार्ट्स एवं इलेक्ट्राॅनिक वस्तुओं व मोबाइल उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई गई है। निस्संदेह बजट से छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग को मुस्कराहट नहीं मिली है। जहां कोरोना संकट के कारण बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार गए, लोगों के वेतन-पारिश्रमिक में कटौती हुई, वर्क फ्राॅम होम की वजह से टैक्स में छूट के कुछ माध्यम कम हो गए, वहीं बड़ी संख्या में लोगों के लिए डिजिटल तकनीक, ब्रॉडबैंड, बिजली का बिल जैसे खर्चों के भुगतान बढ़ने से करदाताओं की आमदनी घट गई है। ऐसे में कोरोना के कारण पैदा हुए आर्थिक हालात से लड़ने और छोटे करदाताओं व मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति बढ़ाने के सरकार के द्वारा नए वित्त वर्ष के बजट में टैक्स का बोझ कम करने के लिए बड़ी अपेक्षाएं की जा रही थी। बजट के माध्यम से बचत से जुड़ी हुई आयकर छूट की अपेक्षा भी पूरी नहीं हुई है। मौजूदा समय में धारा 80सी के तहत 1.50 लाख रुपये की छूट मिलती है। मकानों की बढ़ती हुई कीमत को देखते हुए धारा 80सी के तहत 1.50 लाख की छूट पर्याप्त नहीं है। घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के मद्देजनर इस बार सरकार को होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की अपेक्षा की जा रही थी।

निश्चित रूप से कोविड-19 के बीच अप्रत्याशित सुस्ती के दौर से अर्थव्यवस्था को निकालने, रोजगार अवसरों को बढ़ाने, निवेश के लिए प्रोत्साहन देने तथा विभिन्न वर्गों को राहत देने के लिए बड़े बजट आवंटनों के कारण राजकोषीय घाटे को 6.8 प्रतिशत तक विस्तारित किया जाना चिंताजनक नहीं माना जाएगा। इससे एक ओर आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे नई मांग का निर्माण होगा और उद्योग-कारोबार की गतिशीलता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर बढ़े हुए सार्वजनिक व्यय और सार्वजनिक निवेश से बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। ऐसा होने पर अर्थव्यवस्था गतिशील होगी और विकास दर बढ़ेगी।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

Next Story