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बजट 2019 विश्लेषण : लोकसभा चुनाव के बाद अंतरिम बजट में देखेगी पूर्ण बजट की झलक

नरेंद्र सांवरिया | UPDATED Feb 2 2019 6:20PM IST
बजट 2019 विश्लेषण : लोकसभा चुनाव के बाद अंतरिम बजट में देखेगी पूर्ण बजट की झलक

Budget 2019 : इस अंतरिम बजट को चुनाव के लोकलुभावन आईने से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है। यह बजट चुनावी वर्ष में जरूर पेश हुआ है और इसका स्वरूप जरूर अंतरिम है, लेकिन इसकी दृष्टि व्यापक है, समग्र है और समावेशी है। समावेशी विकास को परिलक्षित करने वाली हर खूबी इस बजट में है। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बजट में हर वर्ग को साधने करने की कोशिश की है, जिसमें उन्होंने वित्त वर्ष 2019-20 का मजबूत आधार रख दिया है।

चुनाव बाद जब जुलाई में पूर्ण बजट आएगा, तो उसमें इस अंतरिम बजट के आधार का विस्तार देखने को मिलेगा। बजट में किसान, नौकरीपेशा, श्रमिक, महिलाएं, जवान, कारोबारी हर किसी को राहत दी गई है। करीब 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) तक जमीन वाले किसानों को तीन बार में सालाना छह हजार देने का ऐलान किया गया।

देश के किसान जिस तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और वे अपनी छोटी-छोटी कृषि जरूरत के लिए मोहताज रहते हैं, उनके लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिये सीधे 6 हजार खाते में देने का ऐलान क्रांतिकारी कदम है। यह रकम जरूर छोटी लगती है, लेकिन किसानों के लिए संजीवनी साबित होगी। 12 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।

यह योजना 1 दिसंबर 2018 से लागू की जा रही है। मोदी सरकार के चार साल के प्रयासों से देश में बड़े पैमाने पर नियो मिडिल क्लास का नया वर्ग उभरा है। अब वे उड़ना चाहते हैं। पांच लाख तक की सालाना आय पर टैक्स छूट के ऐलान से इस वर्ग को खुलकर खर्च करने का अवसर मिलेगा। बाकी टैक्स छूट प्रावधानों को जोड़ दिया जाय तो करीब 6.5 से 7 लाख तक की वार्षिक आय टैक्स छूट के दायरे में होगी।

54 हजार तक मासिक कमाने वाले नौकरीपेशा लोगों को यह बड़ी राहत है। इससे तीन करोड़ लोग सीधे लाभान्वित होंगे। इस छूट से कंज्यूमर ड्यूरेबल, एफएमसीजी, ऑटो, टूरिज्म व रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। टैक्स रिटर्न भरने को सरल बनाया गया है। दो साल में आईटीआर का वेरिफिकेशन तुरंत ऑनलाइन होगा। जल्द ही 24 घंटे में सभी इनकम टैक्स रिटर्न प्रोसेस होंगे और तुरंत रिफंड दिए जाएंगे।

टैक्स फ्री ग्रैच्युटी 30 लाख हो गई। इससे सरकारी कर्मियों को लाभ होगा। असंगठित क्षेत्र के कर्मियों पर खास ध्यान दिया गया है। 15 हजार तक मासिक सैलरी पाने वाले असंगठित क्षेत्र के कर्मियों के लिए 3 हजार रुपये की मासिक पेंशन की व्यवस्था की गई है। इस स्कीम से 10 करोड़ से अधिक श्रमिक लाभान्वित होंगे। अब किसी श्रमिक की मौत पर अब 2.5 लाख रुपये की बजाय 6 लाख रुपये मुआवाजा मिलेगा।

नई पेंशन स्कीम में सरकार के योगदान को 4 फीसदी से 14 फीसदी कर दिया है। उद्योग पर किसी तरह का भार नहीं लादा गया है। एक लाख डिजिटल गांव बनाने के ऐलान से देश में डिजिटल क्रांति का सपना साकार होगा। मनरेगा के लिए भी 60 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में जॉब गारंटी को मजबूती मिलेगी।

घर खरीदने वालों को जीएसटी से राहत, शूटिंग की मंजूरी के लिए सिंग विंडो, महिलाओं को बैंक से 40 हजार तक के ब्याज पर टीडीएस छूट, पहली बार 3 लाख करोड़ से अधिक का रक्षा बजट, गोपालकों के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन, मछुआरों के लिए ब्याज में 2 फीसदी तक की छूट आदि ऐसी घोषणाएं हैं, जिनसे एक बड़े वर्ग को लाभ मिलेगा।

चुनावी साल होने के नाते यह जरूर कहा जा सकता है कि बजट में सबको लुभाने के मंत्र हैं, लेकिन इसमें हर्ज नहीं है। सभी सत्ताधारी पार्टियां चुनाव जीतने के लिए घोषणाएं करती रही हैं। राजग को भी यह हक है। इस बजट से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, अधिक से अधिक गरीबों को लाभ मिलेगा, वे आत्मनिर्भर बनेंगे। इसमें सबके विकास का संकल्प है, गरीबी उन्मूलन का खाका है और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दृष्टि है।


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