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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2018: बनी ये नई रणनीति, भारत को होगा ये फायदा

दसवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2018 के माध्यम से दुनिया को यह जोरदार संदेश दिया गया है कि बहुध्रुवीय दुनिया का निर्माण ब्रिक्स के घोषित लक्ष्यों में से एक है, लिहाजा अमेरिका के संरक्षणवादी कदमों और वैश्विक आतंकवाद की प्रवृत्ति का मुकाबला करने के लिए ब्रिक्स के कदम अब तेजी से आगे बढ़ेंगे।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2018: बनी ये नई रणनीति, भारत को होगा ये फायदा

अब ब्रिक्स के सभी देश पूरी ताकत से आतंकवादियों को मिलने वाले धन के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई करेंगे और साइबर स्पेस में कट्टरपंथी प्रभाव पर नजर रखेंगे। दसवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2018 के माध्यम से दुनिया को यह जोरदार संदेश दिया गया है कि बहुध्रुवीय दुनिया का निर्माण ब्रिक्स के घोषित लक्ष्यों में से एक है, लिहाजा अमेरिका के संरक्षणवादी कदमों और वैश्विक आतंकवाद की प्रवृत्ति का मुकाबला करने के लिए ब्रिक्स के कदम अब तेजी से आगे बढ़ेंगे।

हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में आयोजित हुए दसवें ब्रिक्स ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शिखर सम्मेलन की ओर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई थी। इस सम्मेलन का विशेष महत्व इसलिए था, क्योंकि इस समय पूरा विश्व अमेरिकी संरक्षणवाद और वैश्विक आतंकवाद के खतरे का सामना कर रहा है। ब्रिक्स के सामने व्यापार युद्ध और आतंकवाद के असर से न केवल खुद को वरना पूरी दुनिया को बचाने की जिम्मेदारी है।

27 जुलाई को ब्रिक्स सम्मेलन का जो घोषणापत्र जारी किया गया, उसमें अमेरिकी व्यापार संरक्षणवाद और वैश्विक आतंकवाद से निपटने के लिए एक समग्र रूख का आह्वान किया गया है। घोषणापत्र में कट्टरपंथ से निपटने, आतंकवादियों के वित्त पोषण के माध्यमों को अवरूद्ध करने, आतंकी शिविरों को तबाह करने और आतंकी संगठनों द्वारा इंटरनेट के दुरूपयोग को रोकने जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं।

ब्रिक्स देशों के समूह ने कहा कि आतंकी कृत्यों को अंजाम देने, उनके साजिशकर्ताओं या उनमें मदद देने वालों को निश्चित रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। गौरतलब है कि 17 वर्ष पूर्व 2001 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के जिस ब्रिक्स समूह ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी परिदृश्य में एकजुट होकर आगे बढ़ने के लिए कदम उठाए थे, वही समूह 2011 में दक्षिण अफ्रीका को साथ लेकर ब्रिक्स के नाम से चमकते हुए तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

ब्रिक्स की स्थापना का मुख्य उद्देश्य अपने सदस्य देशों की सहायता करना है। ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी का करीब 30 फीसदी हिस्सा है। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 10वें ब्रिक्स सम्मेलन में किया गया संबोधन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। मोदी द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे अमेरिकी संरक्षणवाद और आतंकवाद के मुद्दे को उठाया गया।

मोदी ने बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नियम आधारित विश्व व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। साथ ही कहा कि मुक्त व्यापार एवं वाणिज्य से करोड़ों लोगों को गरीबी से निकलने में मदद मिली है। मोदी ने कहा कि डिजिटल क्रांति ब्रिक्स और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए अवसर लेकर आई है। यह अहम है कि ज्यादातर देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स की ओर से लाए जा रहे बदलावों के लिए तैयार हैं।

मोदी ने युवाओं के भविष्य के लिए मौजूदा पाठ्यक्रम में बदलाव की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें सुनिश्चत करना होगा कि तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव के अनुसार ही हमारे पाठ्यक्रम भी अपडेट होते रहें। भारत में इसी उद्देश्य के लिए कौशल विकास योजना की शुरुआत की गई है। ब्रिक्स सम्मेलन के इतर मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से जो मुलाकात की, वह भारत के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

मोदी और शी ने कहा कि उनकी हालिया बैठकों ने द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती दी है और सहयोग के नए अवसर भी मुहैया किए हैं। मोदी ने कहा कि जोहानिसबर्ग बैठक ने उन्हें दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी को और मजबूत करने का मौका दिया है। दोनों नेताओं ने सेनाओं के बीच संचार को बढ़ाने के लिए अपनी-अपनी सेनाओं को जरूरी निर्देश देने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता कायम रखने के प्रति खुद के तैयार होने की बात दोहराई है।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति शी ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि वह एक अनौपचारिक बैठक के लिए अगले साल भारत यात्रा के उनके न्योते को स्वीकार कर काफी खुश हैं और इससे चीन के साथ भारत के कारोबार में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि यह फैसला किया गया है कि एक भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल 1-2 अगस्त को चीन की यात्रा करेगा।

सोया, चीनी और गैर बासमती चावल के निर्यात पर चर्चा करेगा और वह चीन से यूरिया के संभावित आयात पर भी गौर करेगा। मोदी ने जोहानिसबर्ग में रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से द्विपक्षीय वार्ता की और कहा कि भारत तथा रूस के बीच दोस्ती बहुत गहरी है। दोनों नेताओं ने आपसी हितों खासतौर से व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और पर्यटन संबंधी द्विपक्षीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

निश्चित रूप से 10वां ब्रिक्स सम्मेलन पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत के लिए बहुत उपयोगी रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन में इस बात पर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया कि यदि विश्व व्यापार व्यवस्था वैसे काम नहीं करती जैसे कि उसे करना चाहिए तो डब्ल्यूटीओ ही एक ऐसा संगठन है जहां इसे दुरुस्त किया जा सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो दुनियाभर में विनाशकारी व्यापार लड़ाइयां ही 21वीं शताब्दी की हकीकत बन जाएंगी।

डब्ल्यूटीओ के अस्तित्व को बनाए रखने की इच्छा रखने वाले देशों के द्वारा यह बात भी गहराई से आगे बढ़ाई जानी होगी कि विभिन्न देश एक-दूसरे को व्यापारिक हानि पहुंचाने की होड़ लगाने की बजाय डब्ल्यूटीओ के मंच से ही वैश्वीकरण के दिखाई दे रहे नकारात्मक प्रभावों का उपयुक्त हल निकालें। इस शिखर सम्मेलन से सामूहिक रूप से संगठित होकर ट्रेड वार की धार पलटने का प्रयास हुआ है।

चूंकि अभी चीन के खिलाफ खुलकर और भारत पर छिटपुट हमलों की शक्ल में अमेरिका का ट्रेड वॉर चल रहा है। रूस पर अमेरिका के कई तरह के प्रतिबंध पहले से ही जारी हैं। ब्राजील से अमेरिका का अच्छा व्यापारिक रिश्ता कभी रहा ही नहीं। ऐसे में सम्मेलन में ब्रिक्स देश अमेरिका के इस आक्रामक रवैये को लेकर रणनीति बनाकर आगे बढ़े हैं।

आर्थिक मुद्दों के अलावा आतंकवाद को समाप्त करने में सभी बिक्स देशों का सहयोग, संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में सुधार, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ आतंकवाद से लड़ने के लिए रणनीति बनाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब ब्रिक्स के सभी देश पूरी ताकत से आतंकवादियों को मिलने वाले धन के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई करेंगे और साइबर स्पेस में कट्टरपंथी प्रभाव पर नजर रखेंगे, इससे आतंकवाद से संघर्ष में काफी सहायता मिलेगी।

निश्चित रूप से दसवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पिछली बार के सम्मेलन से कहीं ज्यादा जोरदार ढंग से खुली और समावेशी विश्व अर्थव्यवस्था की मांग दोहराई गई। दसवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के माध्यम से दुनिया को यह जोरदार संदेश दिया गया है कि बहुध्रुवीय दुनिया का निर्माण ब्रिक्स के घोषित लक्ष्यों में से एक है, लिहाजा अमेरिका के संरक्षणवादी कदमों और वैश्विक आतंकवाद की प्रवृत्ति का मुकाबला करने के लिए ब्रिक्स के कदम अब तेजी से आगे बढ़ेंगे।

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