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जयंतीलाल भंडारी का लेख : छोटे उद्योगों में फूंकें नई जान

वर्ष 2021-22 के बजट में एमएसएमई पर विशेष फोकस इसलिए संभावित है, क्योंकि छोटे उद्योग देश में विकास दर और रोजगार बढ़ाने के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। देश में कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार एमएसएमई क्षेत्र द्वारा ही दिया जा रहा है। देश की जीडीपी में छोटे और मझोले उद्योग-कारोबार का हिस्सा करीब 30 फीसदी तथा देश के निर्यात में योगदान करीब 48 फीसदी है। उम्मीद है कि इस बजट में छोटी और मझौली इकाइयों में नई जान फूंकने के लिए ज्यादा व सस्ते कर्ज की सुविधा, पेंशन फंड के सृजन, आयकर छूट के लाभ, तकनीकी उन्नयन राहत तथा निर्यात प्रोत्साहनों से सुसज्जित करेगी।

जयंतीलाल भंडारी का लेख : छोटे उद्योगों में फूंकें नई जान
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डॉ. जयंतीलाल भंडारी 

जयंतीलाल भंडारी

इन दिनों देश के सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) से संबद्ध उद्यमियों की निगाहें 1 फरवरी 2021 को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले वित्तवर्ष 2021-22 के नए बजट की और लगी हुई हैं। नए बजट से एमएसएमई को उम्मीद है कि कोविड-19 की चुनौतियों के कारण जो एमएसएमई मांग में सुस्ती और विभिन्न संकटों के दौर से गुजर रहा है, उसे नए बजट से नई जान मिल सकेगी। वित्तमंत्री सीतारमण नए बजट में एमएसएमई के लिए विशेष प्रावधान सुनिश्चित करने का संकेत भी दे चुकी हैं। चूंकि छोटी और मझौली औद्योगिक-कारोबारी इकाइयां देश की अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा हैं, अत: कोविड-19 की आर्थिक सुस्ती के दौर में नए बजट से इस क्षेत्र के लिए भी कारोबार सुगमता जरूरी है।

वर्ष 2021-22 के आगामी बजट में एमएसएमई पर विशेष फोकस इसलिए संभावित है, क्योंकि छोटे उद्योग देश में विकास दर और रोजगार बढ़ाने के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। देश में कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार एमएसएमई क्षेत्र के द्वारा ही दिया जा रहा है। देश की जीडीपी में छोटे और मझोले उद्योग-कारोबार का हिस्सा करीब 30 फीसदी तथा देश के निर्यात में योगदान करीब 48 फीसदी है। देश में एमएसएमई के तहत करीब 6.5 करोड़ उद्यम आते हैं जो 15 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया करवा रहे हैं और देश की लगभग आधी आबादी इनसे जुड़ी है।

गौरतलब है कि कोरोना काल में एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के कोलैट्रल फ्री लोन, स्ट्रेस्ड एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ रुपये और अच्छी रेटिंग वाले एमएसएमई के लिए 50,000 रुपये करोड़ दिए गए हैं। चूंकि पिछले वर्ष नवंबर और दिसंबर 2020 के महीनों में जीएसटी संग्रह अधिक हुआ है और आगे भी इसके बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। इसलिए सरकार एमएसएमई को बड़ा प्रभावी बजट दे सकती है। पिछले वर्ष 2020 में एमएसएमई से तय लक्ष्य से अधिक सार्वजनिक खरीदारी की गई, लेकिन नए बजट में एमएसएमई से होने वाली खरीदारी में आम सहभागिता को बढ़ाने के लिए सरकार विशेष प्रावधान निश्चित कर सकती है। कोरोना काल के दौरान जो एमएसएमई एनपीए हो गए हैं, उनके लिए भी सरकार कोई नया रास्ता निकाल सकती है। नए बजट में एमएसएमई के भुगतान में होने वाली देरी का समाधान निकल सकता है।

वर्तमान कानून के मुताबिक 45 दिन के भीतर एमएसएमई को भुगतान नहीं मिलने पर एमएसएमई फैसिलिटेशन सेंटर जा सकता है, लेकिन वहां पहले से ही बड़ी संख्या में कुछ साल पुराने मामले चल रहे हैं। ऐसे में एमएसएमई के लिए समय से भुगतान के नए प्रावधान सुनिश्चित किए जा सकते हैं। नए बजट के तहत एमएसएमई के लिए तकनीकी विकास और नवाचार संबंधी लाभ के लिए सरकार नई व्यवस्था सुनिश्चित कर सकती है। खासतौर से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी छोटे उद्यमी और कारोबारी जो नवाचार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह नए बजट से पूरी हो सकती है। सरकार एमएसएमई को नवीनतम तकनीक के इस्तेमाल के लिए वित्तीय सहायता देने का प्रावधान कर सकती है। भारत के आधे से अधिक एमएसएमई अन्य देशों के एमएसएमई की तरह तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं परिणामस्वरूप वे अब भी परंपरागत तरीके से कारोबार कर रहे हैं।

इससे उनकी उत्पादकता कम होती है और लागत अधिक लगती है। ऐसे में नए बजट में सरकार की तरफ से तकनीक की सुविधा मुहैया होने से एमएसएमई के कारोबार को नया रंग-रूप दिया जा सकेगा। निसंदेह आर्थिक सुस्ती के वर्तमान दौर में वर्ष 2021-22 के नए बजट के माध्यम से सरकार के द्वारा छोटी-मझौली इकाइयों की कारोबारी सुगमता के लिए देश की वित्तीय और औद्योगिक संस्थाओं को मजबूती दी जानी होगी। इस क्षेत्र की आर्थिक स्थिति और मौजूदा नकदी संकट को देखते हुए सरकार द्वारा इस क्षेत्र के लिए समर्पित कोष बनाना जरूरी दिखाई दे रहा है। इस हेतु नए बजट में एक बड़े आकार के एमएसएमई कोष की जरूरत है। साथ ही इस कोष से दिए जाने वाले ऋण पर कोई जमानत न मांगी जाए। एमएसएमई की वृद्धि बहाल करने के लिए ऐसी वित्तीय पहुंच बढ़ाई जानी जरूरी है। चूंकि एमएसएमई क्षेत्र में कर्ज पर ब्याज बहुत ज्यादा है। अत: नए बजट के तहत इस क्षेत्र के लिए कारोबार की लागत भी कम करना होगी। छोटे कारोबार पर कर कम होना चाहिए। इस श्रेणी में आने वाले व्यक्तियों के लिए आयकर ढांचा बदलकर लाभ देना चाहिए। निसंदेह नए बजट के माध्यम से सरकार के द्वारा छोटी-मझौली इकाइयों की कारोबारी सुगमता के लिए देश की वित्तीय और औद्योगिक संस्थाओं को मजबूती दी जानी होगी।

एमएसएमई को डिजिटल बनाने के लिए सरकार को बजट में इंसेंटिव का प्रावधान कर सकती है। इसका फायदा यह होगा कि एमएसएमई को किसी भी वित्तीय संस्था से कर्ज मिलने में आसानी हो सकेगी। डिजिटल कारोबार करने से एमएसएमई से संबंद्ध उद्यमियों की बैलेंस शीट उपयुक्त रूप से तैयार हो जाएगी। नए बजट के तहत नए एमएसएमई की लोन सुविधा के लिए एक ऐसे पोर्टल का निर्माण किया जा सकता है। जहां नए एमएसएमई के लोन की सैद्धांतिक मंजूरी मिल सके। अभी इस प्रकार की सुविधा सिर्फ पहले से काम कर रहे एमएसएमई के लिए है। कुल कारोबार का 70 फीसद तक निर्यात करने वाले एमएसएमई को नए बजट में विशेष दर्जा देने की घोषणा हो सकती है। इन्हें सस्ती दरों पर जमीन की सुविधा के साथ कम ब्याज दरों पर कर्ज मुहैया कराया जा सकता है। निर्यात में अग्रणी एमएसएमई को प्लांट एवं मशीनरी के निवेश पर भी सब्सिडी दी जा सकती है। चूंकि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार देश को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाना चाहती है और यह उत्पादन में विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन से ही संभव है। अतएव नए बजट के तहत सभी प्रकार के एमएसएमई के लिए ब्याज दरों पर छूट की घोषणा की जा सकती है और यह छूट दो फीसद तक की हो सकती है। सरकार बजट में सभी एमएसएमई के दो करोड़ रुपये तक के कर्ज की गारंटी लेने की घोषणा कर सकती है, ताकि एमएसएमई को बैंक सरलता से कर्ज दे सकेंगे।

हम उम्मीद करें कि वित्तमंत्री नए बजट में सूक्ष्म, छोटी और मझौली इकाइयों में नई जान फूंकने हेतु ज्यादा व सस्ते कर्ज की सुविधा, पेंशन फंड के सृजन, आयकर छूट के लाभ, तकनीकी उन्नयन राहत तथा निर्यात प्रोत्साहनों से सुसज्जित करेगी। निश्चित रूप से कोविड-19 की चुनौतियों के बीच यदि नए बजट में एमएसएमई को राहत देने के लिए इन सभी नए जरूरी कदमों को आगे बढ़ाया जाएगा तो इस क्षेत्र की इकाइयां कारोबार आय वृद्धि, रोजगार वृद्धि में भूमिका निभाएंगी।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)


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