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भारत-वियतनाम के नए रिश्ते

इसके उत्तर में चीन, उत्तर पश्चिम में लाओस, दक्षिण-पश्चिम में कम्बोडिया और पूर्व में दक्षिण-चीन सागर स्थित है।

भारत-वियतनाम के नए रिश्ते
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की चार दिवसीय वियतनाम यात्रा कूटनीति दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी मौजूदगी में दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवा और तेल निर्यात को लेकर समझौते हुए हैं। भारत के लिए दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस की तलाश से सम्बन्धित समझौता भी इसमें शामिल है। भूटान, नेपाल, जापान के बाद अब वियतनाम से भारत की नजदीकी से चीन में घबराहट है। वियतनाम एक ऐसा देश रहा है जिसके सैनिक अमेरिका और चीन दोनों को चुनौती दे चुके हैं। वियतनाम ने हाल में रूस से एक दर्जन सुखोई लड़ाकू विमान लिए हैं। सुखोई एसयू 30 एमके-2 ध्वनि की दो गुनी गति से यात्रा कर सकते हैं। वियतनामी सैनिकों को इन विमानों को उड़ाने का प्रशिक्षण भारतीय जवान देंगे। भारत और वियतनाम की इस प्रकार की साझेदारी चीन के लिए चिंता का विषय है।
यह दक्षिण पूर्व एशिया के हिंदचीन प्रायद्वीप के पूर्वी भाग में स्थित एक देश है। इसके उत्तर में चीन, उत्तर पश्चिम में लाओस, दक्षिण-पश्चिम में कम्बोडिया और पूर्व में दक्षिण-चीन सागर स्थित है। द्वितीय विश्वयुद्घ के बाद वह दो भागों उत्तरी वियतनाम और दक्षिणी वियतनाम में बंट गया था और बहुत वर्षों तक दोनों भाग अलग-थलग राहों पर चलते रहे। सत्रहवें अक्षांश के साथ गुजरने वाली एक अस्थायी सीमा रेखा द्वारा देश के दक्षिणी भाग से पृथक्कृत वियतनाम जनवादी जनतंत्र ने बहुत कम समय में ही उत्तरी भाग में बुनियादी सामाजिक व आर्थिक सुधार कर दिखाए और समाजवाद की ओर बडे-बड़े डग भरे। इसके विपरीत दक्षिणी वियतनाम अमेरिकी उपनिवेशवादियों द्वारा जनवादी वियतनाम के विरुद्घ युद्घ छेड़ने और हिंदचीन में संयुक्त राज्य अमेरिका के साम्राज्यवादियों का प्रभुत्व कायम करने के लिए अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा।
अमरीकी साम्राज्यवादियों व उनकी दक्षिण वियतनामी कठपुतलियों द्वारा नवोदित वियतनामी समाजवादी राज्य के विरुद्घ और अपनी मातृभूमि के एकीकरण और सामाजिक प्रगति के लिए संघर्षरत सारी वियतनामी जनता के विरुद्घ छेड़ा गया विनाशकारी युद्घ वर्षों तक जारी रहा। वियतनाम की जनता को अपने जिस चिरस्वप्न के लिए अनगिनत कुर्बानियां देनी पड़ीं वह अंतत: साकार हो ही गया। 1976 में देश के दोनों भाग मिलकर एक राज्य बन गए। अभी भी विभाजित कोरिया के विपरीत सारा वियतनाम अब एक अविभक्त राज्य है, जो वियतनाम समाजवादी जनतंत्र कहलाता है। 1979 के आरम्भ में वियतनाम चीन के शासक हल्कों के आक्रमण का शिकार बना। किन्तु तत्कालीन सोवियत संघ, दूसरे समाजवादी देशों और विश्व की सभी प्रगतिशील शक्तियों के सर्मथन से वियतनाम समाजवादी जनतंत्र की जनता और सशस्त्र सेनाओं ने चीनी आक्रमण को नाकाम बना दिया। युद्घ से वियतनाम की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा। समाजवादी वियतनाम हिंदचीन प्रायद्वीप के दक्षिणी-चीन सागर द्वारा प्रक्षालित पूर्वी तट पर स्थित है। उसके दक्षिण में श्याम की खाड़ी और उत्तर में टोकिन की खाड़ी है। इस 2500 किलोमीटर लंबे सागर तट पर हाइफांग, हो ची मिन्ह (सैगोन) और दूसरे बंदरगाह स्थित हैं।
वियतनाम की प्राकृतिक परिस्थितियां विकसित समाजवादी अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए काफी अनुकूल है। देश के पश्चिमी और कुछ अंतर्वर्ती भागों में गहरी-गहरी घाटियों वाले, दुर्गम और जंगलों से ढके हुए पहाड़ फैले हुए हैं। वियतनाम के भूगर्भ में कोयला, लोहा, तांबा, सीसा, टिन, सोना, फास्फोराइट, नमक और अन्य खनिज पाए जाते हैं। वियतनाम में जिसकी आबादी 9 करोड़ से अधिक है, प्रचुर जनशक्ति है। देश की कुल र्शम-सक्षम आबादी पांच करोड़ से ज्यादा है। आबादी में बहुसंख्या वियतनामी जाति के लोगों की है, जिनकी संस्कृति बहुत प्राचीन है और जो अपनी कर्मठता के लिए प्रसिद्घ है। समाजवाद के निर्माण में देश की अन्य जातियां भी सक्रिय भाग ले रही हैं, जिन्हें वियतनामियों के समान ही अधिकार मिले हुए हैं। समाजवाद की ओर सारे देश के आगे बढ़ाने के लिए उत्तरी वियतनाम की समाजवादी क्रांति का अनुभव बहुत ही मूल्यवान सिद्घ हुआ। उत्तरी वियतनाम में अमरीकियों के आक्रमण से पहले ही कृषि-भूमि सुधार, सामंतवाद के अवशेषों का उन्मूलन और कृषि का सहकारीकरण कर लिया गया था। उद्योगों के राष्ट्रीयकरण के साथ नए उद्यमों का निर्माण किया गया। सांस्कृतिक क्रांति के जरिए सारी व्यस्क आबादी साक्षर बना दी गई और आर्थिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित कर्मियों का अभाव खत्म कर दिया गया। कुल मिलाकर समाजवाद के भौतिक आधार की रचना, समाजवादी उत्पादन संबंधों की स्थापना और मेहनतकशों के रहन-सहन व संस्कृति के स्तर के उत्थान के लिए बहुत कुछ किया गया।
औद्योगिक विकास में प्रमुखता ईंधन उद्योग, इंजीनियरिंग, रसायन और ऐसे दूसरे उद्योगों को दी गई है, जो उत्पादन साधनों का उत्पादन करते हैं। इसके साथ ही उपभोक्ता मालों के उत्पादक हल्के और खाद्य सामग्री उद्योगों के विकास में तेजी लाई जा रही है। सहकारी कृषि के ढांचे में सुधार करके कृषि मालों-चावल, तिलहन, पशु-उत्पाद, कपास, चाय, काफी, रबड़, गन्ना आदि के उत्पादन में वृद्घि लाई जा रही है। वियतनाम की जनता का सारा ध्यान अर्थव्यवस्था के सार्वजनिक क्षेत्र के विकास, सहकारी क्षेत्र के साथ उसके सम्बन्धों के सुदृढ़ीकरण और निजी तथा कुटीर उद्योग-धंधों के प्रबन्ध में सुधार पर केन्द्रित है। देश के उत्तरी भाग के अनुभव व सहायता के सहारे दक्षिणी भाग में भी समाजवादी परिवर्तन लाए जा रहे हैं। मिर्शित उद्यमों के निर्माण और निजी उत्पादन पर समाजवादी राजकीय नियंत्रण की स्थापना के जरिये अर्थव्यवस्था के पूंजीवादी क्षेत्र का पुनर्गठन किया गया है। देहातों में छोटे व मंझोले भूमिधर किसानों को सहकारी खेती के लिए प्रोत्साहित करके बड़े पैमाने की समाजवादी कृषि की नींव रखी गई है।

इस सब कदमों का उद्देश्य दक्षिणी वियतनाम में भी समाजवादी उत्पादन संबंधों की स्थापना करना और इस तरह देश के दोनों भागों में प्रचलित उत्पादन सम्बन्धों के बीच मौजूद अंतर को मिटाना है। देश में समाजवादी औद्योगीकरण को यानि उन्नत अर्थव्यवस्था के आधार के निर्माण को प्राथमिक महत्व दिया जा रहा है। समाजवादी राष्ट्रमंडल के देशों के साथ सहयोग समाजवादी वियतनाम के आर्थिक, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक विकास में बहुत सहायक सिद्घ हो रहा है। तत्कालीन सोवियत संघ ने वियतनाम समाजवादी जनतंत्र को भारी उद्योगों की स्थापना, कृषि की प्रगति तथा परिवहन व्यवस्था के विकास में सभी प्रकार की सहायता दी है। इस तरह से प्रगति के पथ पर वियतनाम से भारत के कूटनीतिक-सामरिक संबंध दोनों देशों के लिए हितकर साबित होगा।

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