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भारत के प्रति नजरिया बदले विश्व जगत

आज भारत एक महाशक्ति के तौर पर उभर रहा है।

भारत के प्रति नजरिया बदले विश्व जगत
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अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स में छपा कार्टून इस बात का गवाह है कि भारत और भारतीयों के प्रति विदेशियों की सोच अभी भी कितनी गलत है। भारत कहां से कहां पहुंच गया है, परंतु अभी भी वे इसे पुरातन चश्मे से देखने को आदी हैं। हालांकि, भारतीयों के कड़े विरोध के बाद अखबार ने सोमवार को इस विवादास्पद कार्टून के लिए माफी मांग ली। दरअसल, 28 सितंबर को प्रकाशित काटरून में दिखाया गया है कि छोटी धोती एवं इंडिया शब्द लिखी शर्ट पहने एक भारतीय पुरुष एक गाय के साथ उस कमरे के दरवाजे को खटखटा रहा है जिस पर लिखा है एलीट स्पेस क्लब यानी विशिष्ट अंतरिक्ष क्लब।

अखबार ने अपनी सफाई में कहा है कि उसका मकसद भारत का मजाक उड़ाना या अपमान करना नहीं था, बल्कि कार्टून के जरिए यह दर्शाने की कोशिश थी कि अंतरिक्ष अभियान पर अब अमीरों का ही कब्जा नहीं रह गया है, जिसका मतलब पश्चिमी देशों से था, परंतु कार्टून देखकर कहीं से कार्टूनिस्ट का यह नजरिया स्पष्ट नहीं होता है। इससे यही आभास होता है कि भारत अभी भी धोती पहनने वालों और गाय-भैंस चारने वालों का देश है। अर्थात दुनिया के दूसरे देश अभी भी इस पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं कि भारतीय जानवर चराने वाले लोग हैं। यह कार्टून अमीर देशों के भारत के प्रति उनकी नस्लीय मानसिकता का भी परिचायक है। इस कार्टून की टाइमिंग भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि कार्टून छपने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के मैडिसन स्क्वायर से साफ शब्दों में कहा था कि भारत सपेरों का देश नहीं है।

आज भारत एक महाशक्ति के तौर पर उभर रहा है। यह दिनों-दिन सभी क्षेत्रों में उपलब्धि के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। हाल ही में भारत मंगल पर पहुंचने वाला दुनिया का चौथा देश बना है। इसरो का मंगल मिशन अंतरिक्ष के क्षेत्र में कितनी बड़ी सफलता है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि विकसित कहे जाने वाले देशों में से किसी देश को पहली बार में यह सफलता नहीं मिली थी। वहीं अमेरिका, रूस और यूरोपियन यूनियन देशों ने जितनी लागत में अपना मंगल मिशन भेजा है, उससे कई गुना कम लागत में भारत ने यह कारनामा कर दिखाया है। इस मिशन के साथ भारतीय वैज्ञानिकों की एक और उपलब्धि जुड़ी है, जहां विकसित देशों को ऐसे मिशन भेजने में सालों लगे हैं वहीं इसरो ने इस मिशन को रिकॉर्ड 15 माह में पूरा किया गया है।

अंतरिक्ष जगत में भारत की बढ़त के कारण ही आज दूसरे देश अपने उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए इसरो के पास आ रहे हैं। भारत अब सामरिक क्षेत्र में भी महारत हासिल कर रहा है। हमारे वैज्ञानिक स्वदेशी तकनीकी से पनडुब्बी, हल्के लड़ाकू विमान, मिसाइल और युद्धपोत का निर्माण कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था में भी हम महाशक्ति बन रहे हैं। खरीद शक्ति के आधार पर भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हम हैं ही। आईटी के क्षेत्र में हमारी क्षमता जगजाहिर हो चुकी है। हमारी संस्कृति और सभ्यता दुनिया में अनूठी है जो एकता, न्याय और भाईचारे का संदेश देती है। लिहाजा, अब विश्व जगत भी को भारत के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है।

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