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चिंतन: इलाहाबाद से भाजपा का मिशन 2017 का संदेश

भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक उत्तर प्रदेश के लिए मिशन 2017 की तैयारी के रूप में है।

चिंतन: इलाहाबाद से भाजपा का मिशन 2017 का संदेश
असम में जीत के बाद आत्मविश्वास से भरी भाजपा की संगमनगरी प्रयाग में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक उत्तर प्रदेश के लिए मिशन 2017 की तैयारी के रूप में देखा जा सकता है। जिस तरह बैठक के पहले ही दिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मथुरा और कैराना मुद्दे के बहाने अखिलेश यादव की सपा सरकार पर निशाना साधा, उसका संकेत यही है कि कार्यकारिणी का एजेंडा 'यूपी फतह' के लिए रणनीति पर 'मंथन' ही है।
चूंकि उत्तर प्रदेश में अतीत में भाजपा सत्ता में रह चुकी है, इसलिए पार्टी को लगता है कि यदि वह मेहनत करे, तो उसे फिर मौका मिल सकता है। अभी बसपा प्रबल दावेदार है, लेकिन केंद्र में दो साल की सरकार के बाद भी जनता में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बरकरार रहना पार्टी के लिए शुभ संकेत है। पार्टी यूपी चुनाव में मोदी की साख को भुनाना चाहती है। इसके साथ ही असम की तर्ज पर स्थानीय नेता को चुनाव का चेहरा बनाना चाहती है।
भाजपा के लिए यूपी इसलिए भी प्रतिष्ठा का प्रo्न है कि यहां से उसके 73 सांसद हैं और दो उसके सहयोगी अपना दल के हैं। यानी एनडीए के पास 80 में से 75 सांसद हैं। सपा के खाते में केवल पांच सीटें हैं, वो भी बस मुलायम परिवार के पास। दूसरी बड़ी वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद बनारस से सांसद हैं। गृह राज्य गुजरात की वडोदरा सीट 2014 चुनाव परिणाम के बाद छोड़ दी थी। इलाहाबाद की इस कार्यकारिणी में पीएम मोदी ने पार्टी के भविष्य के एजेंडे की रूपरेखा खींची है, जिसमें उन्होंने युवाओं के हिसाब से बदलाव को प्रमुखता से रेखांकित किया है।
पीएम को पता है कि यूपी बड़ा सटेट है, बेरोजगार युवाओं की बड़ी फौज है, अखिलेश सरकार परफॉर्म नहीं कर पाई है, लॉ एंड आर्डर बड़ी समस्या बनी हुई है। इसलिए उन्होंने अपने संबोधन में बदलाव पर जोर दिया है। उनका कहना कि नई सोच एवं नए विचारों के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है और हमें हर हाल में आगे बढ़ना है, में कहीं न कहीं युवाओं को लक्षित करने का एजेंडा निहित है। कार्यकारिणी के दूसरे दिन पार्टी में हाशिये पर चल रहे नेता डा. मुरली मनोहर जोशी के साथ एक प्लेट में पीएम मोदी के नाश्ता करने को ब्राrाणों को भाजपा की ओर लुभाने की कोशिश मानी जा सकती है।
दूसरे दिन पीएम भावुक भी हुए और यूपी के विकास के लिए मुलायम व मायावती की जुगलबंदी से निजात पाने का आह्वान भी किया। हालांकि 2017 में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है, लेकिन उनमें यूपी व पंजाब ही बड़े राज्य हैं। अमित शाह का दलितों के घर भोजन करना वोटबैंक पॉलिटिक्स ही माना जा सकता है। खुद पीएम डा. अंबेडकर जयंती पर उनके पैतृक गांव मऊ जा चुके हैं और अपने भाषणों में कई बार भगवान बुद्ध व अंबेडकर का जिक्र कर चुके हैं।
इसका साफ संकेत है कि भाजपा दलितों को पार्टी से जोड़ना चाहती है। अभी तक उस पर अगड़ों की पार्टी का ठप्पा लगा हुआ है। संघ भी दलितों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इलाहाबाद में पीएम के दिए सात मंत्र- सेवाभाव, संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, संवाद और सद्भवना निश्चित ही भाजपा की मिशन 2017 की कामयाबी के आधार बनेंगे। मोदी ने साफ कर दिया है कि 'विकास' ही भाजपा का चुनावी एजेंडा होगा।
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