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रिपोर्ट में बड़ा खुलासा : मासूमों पर जुल्म कर रही ''नापाक सेना''

विदेशों के कुछ प्रमुख पत्रकारों ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा किया और जगह-जगह जाकर आम जनता से बात की। अपने निष्कर्ष में उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान में आम जनता की हालत दिनों-दिन बद से बदतर हो रही है। वहां पर आम जनता को खाने के लिए पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा है। 25 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। आम जनता को अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के पास कोई काम नहीं है।

रिपोर्ट में बड़ा खुलासा : मासूमों पर जुल्म कर रही

विदेशों के कुछ प्रमुख पत्रकारों ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा किया और जगह-जगह जाकर आम जनता से बात की। अपने निष्कर्ष में उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान में आम जनता की हालत दिनों-दिन बद से बदतर हो रही है। वहां पर आम जनता को खाने के लिए पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा है। 25 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। आम जनता को अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के पास कोई काम नहीं है।

पाकिस्तान का निर्यात तेजी से गिर रहा है। भारत की तुलना में निर्यात बहुत ही कम है। यहां तक कि बांग्लादेश की तुलना में भी पाकिस्तान का निर्यात बहुत कम हो गया है। देश की आर्थिक हालत बहुत ही खराब है और भुगतान संतुलन बुरी तरह लड़खड़ा गया है। निकट भविष्य में यदि ऐसा ही रहा तो पाकिस्तान में आम जनता की हालत बद से बदतर हो जाएगी।

पूछने से पता चला कि पाकिस्तान की बदलती हुए आर्थिक हालात के लिए वहां की सेना जिम्मेदार है। सेना में जो लोग भर्ती हैं वे बेरोक टोक काला धन कमा रहे हैं। वे लोग जो सेना में उच्च पदों पर हैं या उससे थोड़े नीचे हैं, उन्होंने बेशुमार धन इकट्ठा कर लिया है। सैनिकों में बड़ी एकता है और वे एक दूसरे के खिलाफ सरकार को कोई शिकायत नहीं करते हैं।

जब से पाकिस्तान आजाद हुआ वहां अधिकतर समय सेना का ही शासन पर वर्चस्व रहा और सेना आम जनता को भारत के विरूद्व भड़काती रही और अपना उल्लू सीधा करती रही। सेना हमेशा लोगों को यह डर दिखाती रही कि यदि भारत को कूचला नहीं जाएगा तो इस्लाम खतरे में पड़ जाएगा और पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।

इस बीच पाकिस्तान की सेना ने चीन से दोस्ती गांठ ली या यूं कहें कि पाकिस्तान की सरकार ने चीन को सेना के कहने पर गले लिया। चीन ने पाकिस्तान को परमाणु बम बनाना सीखा दिया और अब पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों को ब्लैकमेल कर रहा है। पाकिस्तान कहता है कि या तो हमें भरपूर आर्थिक सहायता दो, अन्यथा हम आपके क्षेत्र में परमाणु बम गिरा देंगे।

इस कारण कई देश पाकिस्तान की गैर जिम्मेदाराना हरकतों के कारण डरे हुए हैं। चीन के साथ दोस्ती करके पाकिस्तान ‘चाइना-पाकिस्तान इकनोमिक कोरिडोर' जिसे संक्षेप में ‘इसीपीइसी' कहते हैं, बना रहा है। इसके लिए चीन ने पाकिस्तान को भरपूर आर्थिक कर्ज दिया है। परन्तु इसमें एक पेच यह है कि यह रकम अमेरिकी डालर में दी गई है और इसमें अंततः भारी ब्याज पाकिस्तान को चीन को देना होगा।

पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान ने लोगों से वायदा किया है कि वे उनकी सारी समस्याओं का समाधान कर देंगे। परन्तु उनकी सबसे बड़ी सिरदर्दी यह है कि चीन से पाकिस्तान के पिछले आकाओं ने जो भारी-भरकम कर्ज लिया है, वह उसे कैसे चूकता करंेे। अभी तो कर्ज का ब्याज भर चुकाने के लिए पाकिस्तान के पास पैसा नहीं है।

विदेशी मुद्रा की तुलना में पाकिस्तानी रुपये का स्वतः अवमूल्यन हो रहा है। एक वर्ष के अन्दर पाकिस्तानी रुपये की कीमत डालर की तुलना में 30 प्रतिशत तक गिर गई है। कुछ वर्ष पहले पाकिस्तान का आर्थिक विकास प्रतिवर्ष 5.8 प्रतिशत था, वह तेजी से गिर रहा है। पाकिस्तान में खाना, बिजली, पीने लायक पानी के दाम बहुत अधिक बढ़ गए हैं।

पाकिस्तान के बड़े शहरों में आए दिन मजदूरों की छंटनी हो रही है और जो मजदूर काम पर हैं उनका कहना है कि पाकिस्तानी मुद्रा की कीमत इतनी गिर गई है कि जिन्हें 22 हजार रुपये तक महीने में तनख्वाह मिलती है, वे साधारण तरीके से भी अपने छोटे से परिवार का पेट नहीं भर पा सकते हैं। चिकित्सा सुविधाएं नहीं होने से डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों के इलाज में परिवार में कम से कम तीन हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं।

आम जनता के पास इतना पैसा नहीं है कि वे इलाज पर इतना खर्च कर सके। इसलिये साधारण सी बीमारी में भी लोग मौत के मुंह में समा रहे हैं। पाकिस्तान में बिजली की बहुत कमी है। विशेषज्ञों कहना है कि पाकिस्तान को प्रकृति द्वारा सौर उर्जा भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई है। इसलिए उसे कोयले से बिजली बनाने की जरूरत ही नहीं है।

परन्तु सेना के कुछ अधिकारियों के पास कोयले की बड़ी खदाने हैं, इसीलिये वे चाहते हैं कि उनके कोयले की खपत हो और कोयले से ही बिजली का उत्पादन हो। परन्तु वह बिजली बहुत ही महंगी और खर्चीली होती है और आम जनता के लिए इसका बोझ उठाना संभव नहीं हो रहा है। नतीजा यह है कि कल-कारखाने बिजली के अभाव में तेजी से बंद हो रहे हैं और देश का बहुत बड़ा भाग अंधेरे में डूबता जा रहता है।

सेना के आला अफसर कहते हैं कि चीन से दोस्ती पाकिस्तान के हित में है। यह दोस्ती हिमालय से ज्यादा उंची, समुद्र से ज्यादा गहरी, इस्पात से ज्यादा मजबूत और शहद से ज्यादा मीठी है। इसलिए चीन के साथ दोस्ती को किसी भी हालत में नजरान्दाज नहीं किया जाएगा। परन्तु जो लोग पाकिस्तान के अन्दरूनी हालात से वाकिफ हैं उनका यह मानना है कि यदि चीन से पाकिस्तान इस तरह चिपका रहेगा तो वह दिन दूर नहीं जब चीन पाकिस्तान को निगल जाएगा।

प्रशासन में सुधार लाने के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका के प्रसिद्व विश्वविद्यालय के एक नामी प्रोफेसर जिनका नाम आरिफ मिंयां है को अपना सलाहकार नियुक्त किया था। इस प्रोफेसर ने इमरान खान को सलाह दी कि पाकिस्तान भारत से संबंध मजबूत करे और भारत के साथ निर्यात को बढ़ावा दे।

उनकी इस सलाह को पाकिस्तानी सैनिक अधिकारियों ने ठुकरा दिया और प्रधानमंत्री इमरान खान पर दबाव बनाया कि इस अर्थशास्त्री को तुरन्त नौकरी से निकाल दिया जाए। लाचार होकर प्रधानमंत्री इमरान खान ने प्रोफेसर आरिफ मियां को उनके पद से हटा दिया। जो लोग पाकिस्तान के अन्दरूनी हालत से वाकिफ हैं,

उनका अनुमान है कि देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए इमरान खान को एक बहुत बड़ी रकम ‘आईएमएफ' से कर्ज में किसी भी हालत में लेनी होगी। परन्तु ‘आईएमएफ' पाकिस्तान की अन्दरूनी हालत का जायजा लेने के बाद इतनी बड़ी रकम कर्ज में देने को तैयार नहीं है। अब लाख टके का प्रश्न यह उठता है कि इन मजबूरियों के सामने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान देश की अर्थव्यवस्था को आखिर कैसे पटरी पर लाएंगे और क्या वे देर या सबेर देश के भ्रष्ट सैनिक अधिकारीयों के चंगूल से निकल पाएंगे?

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