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आधुनिकता में लोक भाषा का समागम

भालचंद्र जोशी के कहानी संग्रह ‘हत्या की पावन इच्छाएं’ की कहानियों में लोक भाषा की कविताओं, कहावतों के प्रयोग किए गए हैं।

आधुनिकता में लोक भाषा का समागम
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अवधेश श्रीवास्तव

आधुनिक साहित्य में लोक भाषा, किस्सागोई, कहावतों और मुहावरों का अभाव होता जा रहा है। सुपरिचित लेखक भालचंद्र जोशी के कहानी संग्रह ‘हत्या की पावन इच्छाएं’ की कहानियों में सहज और स्वाभाविक रूप से लोक भाषा की कविताओं, कहावतों के प्रयोग किए गए हैं। जो रचना के परिवेश को और अधिक जीवंत करते हैं। संग्रह में दस कहानियां हैं। शीर्षक कहानी ‘हत्या की पावन इच्छाएं’ एक पारंपरिक कलगी-तुर्रा शैली की निमाड़ी कविता से शुरू होती है।
इसी कविता को कहानी के माध्यम से विस्तार दिया गया है। कहानी में एक वीर पुरुष के राजा एक तलवार को सम्मान स्वरूप दिया गया है, जिसका प्रयोग उस वीर पुरुष को किसी की हत्या करके करना है पर हत्या जिसकी करनी है, उसकी स्वीकृति लेकर। इस तरह से उस वीर पुरुष की तलवार का निर्मम प्रयोग एक मासूम बच्चे की गर्दन और एक गर्भावती के पेट पर होता है।

‘नदी के तहखाने में’ कहानी, घर वापसी, स्मृतियां और प्रकृति के प्रति प्रेम और बाढ़ की भयावह स्थितियों का मार्मिक चित्रण है। ‘पल-पल परलय’ में किसानों की बेबसी और सरकार द्वारा उनके हित में कहकर भेजी जा रही योजनाओं का विद्रूप चरित्र, अधिकारियों के लोन के लुभावने वायदे और योजनाओं के लिए पैसे का बंदरबांट, कर्ज के बोझ, किसानों की मौतों का सजीव अभिव्यक्ति है। ‘बोरचिंदी तक’ कहानी बैंक द्वारा दिए गए लोन में कमीशन को लेकर नौकरशाही का चेहरा बेनकाब करती है-‘कितनी अजीब बात है?
इसी भूमि विकास बैंक में लाखों के बारे न्यारे हो जाते हैं। पहले से खुदे कुओं को नया बताकर लोन स्वीकृत किया और पैसे बांट लिए (पृष्ठ 68)। कहानी से यह कहावत चरितार्थ होती है कि भ्रष्टाचार ऊपर से चलता है नीचे से नहीं। कहानी ‘राजा गया दिल्ली’ में उन दो गरीब कालू और जगन की गांव से लेकर अपने प्रदेश की राजधानी की यात्रा है, जहां उन्हें लगता है कि विभागीय मंत्री से मिलकर नर्मदा किनारे डूब में आए उनके खेत के मुआवजे की समस्या का हल हो जाएगा।
हालांकि वहां के अधिकारी का रिकॉर्ड यह कहता है कि उनको मुआवजा दे दिया गया है जब कि उन्हें फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है। ‘रिहाई’ सांप्रदायिक सद्भभाव को लेकर एक उत्कृष्ट कहानी है, जहां अपनी ही बच्ची की एक हिंदू सहेली बच्ची के प्रति प्रेम, शांति की एक मिसाल बन जाती है और एक मुस्लिम शिक्षक का हृदय परिवर्तन हो जाता है। ‘प्रार्थना’ और ‘प्रेम गली अति सांकरी’ कहानी में प्रेम को कई दृष्टिकोणों से कहानी में पिरोया गया है।
पुस्तक- हत्या की पावन इच्छाएं
लेखक - भालचंद्र जोशी
मूल्य - 250 रुपए
प्रकाशक - राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
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