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हरिभूमि संपादकीय लेख: बेहतर आपदा प्रबंधन से कम क्षति की आशा

मौसम विभाग के मुताबिक अम्फान की प्रक्रिया दोपहर ढाई बजे शुरू हुई थी। अम्फान सुंदरबन के पास पश्चिम बंगाल के दीघा और बांग्लादेश के हटिया के बीच टकराया। बांग्लादेश में तेज हवा और बारिश की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई।

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भू जलवायु परिस्थितियों के कारण भारत हमेशा से प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील रहा है। देश में बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप तथा भूस्खलन जैसी आपदाएं आम हैं। भारत के 60 फीसदी भू भाग पर भूकंप का खतरा बना रहता है। देश की 7,516 किलोमीटर लंबी तटरेखा में से 5700 किलोमीटर में चक्रवात का खतरा बना रहता है। बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में औसतन पांच या छह ऊष्ण-कटिबंधीय चक्रवात बनते हैं और वे भारतीय तट से टकराते हैं।

चक्रवात के तट पर पहुंचने पर उत्पन्न तेज हवाओं, भारी वर्षा व तूफान तथा नदी में बाढ़ के कारण जान-माल के नुकसान का खतरा हो जाता है। ऐसा ही खतरा सुपर साइक्लोन अम्फान के रूप में ओडिशा के रास्ते देश में प्रवेश कर गया है। भुवनेश्वर में तेज हवाएं चल रही हैं और बारिश हो रही है। इससे पहले चक्रवाती तूफान अम्फान पश्चिमी-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर मंगलवार को कमजोर होकर अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया था। इसके देखते हुए पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों से 5 लाख और ओडिशा से 1.5 लाख लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। तटीय जिलों की 1600 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है।

मौसम विभाग के मुताबिक अम्फान की प्रक्रिया दोपहर ढाई बजे शुरू हुई थी। अम्फान सुंदरबन के पास पश्चिम बंगाल के दीघा और बांग्लादेश के हटिया के बीच टकराया। बांग्लादेश में तेज हवा और बारिश की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई। माना जा रहा है कि ओडिशा के नौ जिले पुरी, गंजाम, जगतसिंहपुर, कटक, केंद्रापाड़ा, जाजपुर, भद्रक और बालासोर प्रभावित होंगे। पश्चिम बंगाल के तीन तटीय जिले पूर्वी मिदनापुर, 24 दक्षिण और उत्तरी परगना के साथ ही हावड़ा, हुबली, पश्चिमी मिदनापुर और कोलकाता पर इसका खासा असर नजर आएगा। इसी को देखते हुए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स टीम यानी एनडीआरएफ की 41 टीमों की तैनाती की गई है। दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर में नेवी के गोताखोर तैनात किए गए हैं। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 20 जैमिनी बोट के साथ रेस्क्यू और मेडिकल टीम को तैयार रखा है। विशाखापट्टनम में आईएनएस और अरकोणम में आईएनएस रजाली में नेवल एयरक्राफ्ट को किसी भी परिस्थिति में तैयार रहने को कहा है।

राहत कार्यों के लिए नौसेना के जहाज स्टैंडबाय पर हैं। यह प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने, सामान पहुंचाने और जरूरी मेडिकल सहायता देने के काम करेंगे। केंद्र और राज्य सरकारों ने वैसे ही प्रबंध किए हैं जैसे ओडिशा में आए फणी से निपटने में किए थे। इसी का परिणाम रहा है फणी वैसा नुकसान नहीं पहंुचा पाया जैसा 1999 में हुआ था। प्रचंड चक्रवातीय तूफान तूफान ने दस हज़ार से ज्यादा लोगों की जान ली थी। कई गांवों का नामोनिशान तक मिट गया था और एक ही रात में लाखों लोग बेघर हो गए थे, मगर पिछले 20 सालों में हमारी सरकारों ने तूफानों से टकराना सीख लिया है। इसका पहला उदहारण पाइलिन तूफान था। 12 अक्तूबर 2013 को 260 किलोमीटर प्रति घंटे की तेजी से पाइलिन तूफान ओडिशा के गोपालपुर तट से टकराया था, लेकिन मौसम विभाग की सही सूचना और बेहतर प्रबंधन के कारण हमने ज्यादा हानि नहीं हाेने दी। दरअसल बीस सालों में केंद्र व राज्य सरकारों के आपदा प्रबंधन पर बेहतरी से काम िकया है। एक बार फिर हमारे इन्हीं प्रबंधनों की परीक्षा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अम्फान भी हमारे प्रबंधों के सामने प्रभावहीन होकर निकल जाएगा।

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