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इंसान गिरना छोड़ दे तो रुपया नहीं गिरेगा

कई दिनों से मैं बराबर देख रहा था कि नारद जब भी जंबू द्वीप का चक्कर लगाकर वहां की खबर देने नारायण के दबार में पहुंचते कि नारद के कुछ कहने से पहले ही नारायण के हाथपांव फूलने लगते कि पता नहीं अब नारद उन्हें जंबूद्वीप की क्या बुरी खबर सुना दें। असल में अब वे जंबू द्वीप की खबरों से तंग आने लगे थे। वहां का सुशासन उन्हें परेशान करने लगा था।

इंसान गिरना छोड़ दे तो रुपया नहीं गिरेगा
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कई दिनों से मैं बराबर देख रहा था कि नारद जब भी जंबू द्वीप का चक्कर लगाकर वहां की खबर देने नारायण के दबार में पहुंचते कि नारद के कुछ कहने से पहले ही नारायण के हाथपांव फूलने लगते कि पता नहीं अब नारद उन्हें जंबूद्वीप की क्या बुरी खबर सुना दें। असल में अब वे जंबू द्वीप की खबरों से तंग आने लगे थे। वहां का सुशासन उन्हें परेशान करने लगा था।

अचानक नारद नारायण नारायण का जाप करते जब उनके दरबार में पहुंचे तो कुछ देर पहले तक हसंते गाते नारायण एक बार फिर गंभीर हो गए मानों उनको हम मृत्युवासियों की तरह सांप सूंघ गया हो। प्रभु! नमस्कार! नारद ने नारायण के आगे दोनों हाथ जोड़े तो नारायण ने डरते हुए पूछा, कहो नारद! अब क्या नई खबर लाए हो और हां! वह मेरी ओर से वैधानिक चेतावनी, जंबू द्वीप की गिरती दीवारों पर चिपकवा दी न कि, हां प्रभु।

आपकी वह चेतावनी वहां के लोकसंपर्क विभाग ने हर गिरती दीवार पर चिपकाने के सरकारी आदेश कर दिए हैं। इसी के साथ-साथ वहां के हर भाषा के अखबार के पहले पेज पर आपकी चेतावनी प्रकाशित करवा दी गई है कि अंतिम बार जंबू द्वीप के वासियों को सूचित किया जाता है कि भविष्य में नारायण के भरोसे कोई आत्महत्या न करे। जीव अपने जीने, मरने और आत्महत्या के लिए खुद जिम्मेदार था, है और रहेगा।

जब प्रभु अपने आप ही सेफ नहीं तो ऐसे में उनको लेकर जीव अपनी सेफ्टी की बात न करे। मृत्यु, आत्महत्या के बाद मोक्ष, स्वर्ग उनकी भी समझ से परे हैं। गुड! तो अब जंबूद्वीप की क्या खबर है। प्रभु! वहां पर आजकल गिरने का दौर चला है। गिरने का दौर बोले तो, नारायण ने घबराते हुए पूछा। प्रभु! जिस रुपये को लेकर आप तक गिरते रहे, जंबूद्वीप में वही रुपया गिरकर गिरने के सबसे निचले स्तर पर आ पहुंचा है।

वहां इन दिनों बिन बरसात ही पुल गिर रहे हैं, बिन बेईमानी ही इनसानियत गिर रही है। नारायण! नारायण! तीन तीन चीजों की एक साथ गिरने की खबर पहली बार सुन रहा हूं नारद! पर खुशी है इस बात की कि अबके तुम कोई सरकार गिरने की खबर नहीं लाए। हे नारद! आखिर अब मेरे इस जंबू द्वीप को हो क्या गया सच कहूं तो एक साथ तीन तीन चीजों का गिरना सचमुच हैरान करने वाला है।

तो कुछ करो न प्रभु! प्रभु इससे पहले कि इन गिरने वालों में चौथा भी शामिल हो जाए प्लीज प्रभु! कुछ कीजिए। देखो नारद! अब मैं जंबू द्वीप के गिरने को लेकर कुछ नहीं कर सकता, कह नारायण ने लंबी सांस भरी, पर हां! एक बात हो सकती है। जाकर जंबूद्वीपों के जीवों से कहो कि वहां के इंसान गिरना बंद कर दें। इससे क्या हो गया प्रभु। सब गिरावटें खुदबखुद रूक जाएंगी।

मतलब यह चिरसत्य है कि इंसान के गिरने के साथ ही सब कुछ गिरने लगता है नारद! जब इंसान गिरता है तो सब कुछ गिर जाता है। इंसानियत में गिरावट आती है तो रुपया गिरता है। इंसानियत में गिरावट आती है तो जेठ महीने में पुल गिरने लगते हैं। इंसानियत में गिरावट आती है तो हम अपने गिरने के दोष औरों पर मढ़ने लगते हैं।

पर प्रभु ये रुपया तो जबसे हम आजाद हुए हैं तबसे ही गिर रहा है। कुबेर से इस बारे में कुछ बात करो तो गिरने तो जंबूद्वीप में तबसे ही सब लग गया था, पर तब गिरावट इतनी तेजी से नहीं थी नारद! तो अब मेरे नारायण इसका कोई उपाय। सब गिरावटों का बस एक समाधान है। वह क्या मेरे प्रभु मतलब सब मर्जों की एक दवाई, नारद चौंके।

हां! अगर जबूंद्वीप के सबकुछ खाकर पचाने वाले इंसान यह कसम भी खा लें कि वे कल से हर जगह गिरेंगे पर अपनी इनसानियत से बिल्कुल नहीं गिरेंगे तो उसी वक्त से रुपया गिरना बंद हो जाएगा। पुल गिरने बंद हो जाएंगे। असल में जंबूद्वीप का इंसान सबकुछ है पर उसमें अपने देश एवं समाज के प्रति ईमानदार नहीं है। जाकर जंबू द्वीप की सरकारजी से कहो कि जो वो रुपये को और गिरने से बचाना चाहते हों,

जो खुद को शर्म न होने पर चिलचिलाती धूप में पुलों को शर्म के मारे गिरने से और बचाना चाहते हों तो वे चरित्र प्रमाणपत्रों से लिंक्ड अपने इंसानों की ईमानदारी को धड़ाधड़ गिरने से तत्काल रोकने के लिये अपने यहां के इंसानों से मन से इंसानियत अपनाने का नैतिक आग्रह करें। तब ईमानदारी से सब दिनरात गिरता-गिरता अपने सबकुछ आप स्थिर हो जाएगा।

सब कुछ गिरने की जड़ में ही इंसान का गिरना है, वो नहीं गिरेगा तो कुछ भी नहीं गिरेगा। नारायण ने कहा तो नारद ने भावविभोर हो उनसे आगे पूछा, सच प्रभु! बस इत्ती सी बात। हां नारद! है तो बस इत्ती सी ही बात पर, नारद को प्रसन्न जाते देख नारायण मन ही मन बड़ी देर तक हसंते रहे।

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