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फ्रॉड ही इस जग में सबसे बड़ा धर्म और सत्कर्म है

फ्रॉड कि हमारे फ्रॉड देख फ्रॉड के देवता का भी हीनता से सिर नीचा हो जाए। हेल्दी एवं चरित्रपूर्ण जीवन के लिए फ्रॉड पहनिए, फ्रॉड खाइए, फ्रॉड ओढ़ीये, फ्रॉड पीजिए। फ्रॉड ही इस जग में सबसे बड़ा धर्म है। फ्रॉड ही इस जग का सबसे बड़ा सत्कर्म है।

फ्रॉड ही इस जग में सबसे बड़ा धर्म और सत्कर्म है

फ्रॉड किस्म का प्राणी नहीं, पर मुझे कम्लीट फ्रॉड किस्म के जीव अति पसंद हैं। दूसरे शब्दों में कहूं तो मैं उनका मुरीद हूं। और प्योर फ्रॉडेरियन को तो मैं.....मत पूछो कि उनका मैं क्या हूं। आज की तारीख में सच पूछो तो आई हेट ईमानदारस। कल तक मुझे फ्रॉडेरियनों से बहुत नफरत थी। शायद तब मेरी इनके बारे में गलत धारणा बनी हुई थी।

इनके बारे में मुझे पर्याप्त ज्ञान नहीं था शायद मुझे। बस, इनको लेकर अनुमान ही लगाया करता था। और अनुमान तो कोरे अनुमान होते हैं दोस्तो! फ्रॉड किस्म के डियरों में वैसे तो बहुत सी विशेषताएं होती हैं पर इनकी एक खास विशेषता जिसका मैं बहुत कायल हूं और वह यह कि फ्रॉड किस्म के परमादरणीय जब कहीं फ्रॉड करते हैं, तो ऊपर से लेकर नीचे तक सब मिलजुल कर करते हैं।

फ्रॉड करते वक्त इनकी योजना देखने लायक होती है। ऐसे योजनाबद्ध तरीके से फ्रॉड करते हैं कि फ्रॉडों के पितामह के पितामह भी दांतों तले उंगली दबा खुशी खुशी कटवा लें। फ्रॉड के वक्त इनका भाईचारा देखने लायक होता है। लगता है जैसे उस वक्त ये सब मौसेरे भाई न होकर जुड़वां भाई हों। फ्रॉड से जो भी मिलता है, उसे पूरी ईमानदारी से बराबर बराबर मिल बांट कर खाते हैं, बिना कद काठी के हिसाब से।

ये फ्रॉड करने तक ही एक साथ नहीं रहते, बल्कि गलती से फंसने के बाद भी एक साथ रहते हैं। साथ ही मरने साथ ही जीने की भावना अगर देश में कोई देशवासी बचा हो तो मेरे हिसाब से उसे इनके पद चिन्हों का अनुसरण कर इनसे सीखनी चाहिए। सच कहूं तो ईमानदारों की अपेक्षा इन बंधुओं की पहुंच बहुत ऊपर तक होती है। इनके हाथ बहुत लंबे होते हैं।

इतने लंबे कि पता नहीं ये लोग अपने हाथ इतने लंबे कैसे कर लेते होंगे। इनका मन करे तो लेटे-लेटे स्वर्ग तक से फल तोड़ लाएं। दूसरी ओर ईमानदार को तो खुद ईमानदार तक नहीं जानता तो उसे समाज क्या खाक पहचानेगा। ओर इन गए गुजरे ईमानदारों का जब भी देखो बस सारे काम छोड़ देश की संपत्ति पर कुंडली मारकर बैठे हुए। अरे यार! यह जीवन बार बार थोड़े ही मिलेगा।

ईमानदारी से सबको बेईमानी का डटकर खिलाइए भी, और खुद खाइए भी। इस देश में आ ही गए हैं तो डटकर फ्रॉड कीजिए, खुलकर फ्रॉड कीजिए। औरों को भी करने दीजिए। ऊपरवाले ने हमें ये जीवन ईमानदारी करने को नहीं, फ्रॉड करने को दिया है। इसलिए जितने हो सके कदम-कदम पर फ्रॉड कीजिए, क्या जाने ऊपर वाला कब जीवन की डोर खींच ले।

इस किस्म के आदरणीय बंधु मेरे उन घटिया नस्ल के ईमानदार दोस्तों की तरह नहीं होते जो पहले तो मिलकर बेईमानी से फ्रॉड करवाते हैं और बाद में खुद ही मार गए सबका हिस्सा। तथाकथित ईमानदारों की तरह ये बिल्कुल फ्रॉड नहीं होते कि न तो खाते हैं के नाम पर अकेले-अकेले, चोरी-चोरी खाते रहते हैं, पर जब दूसरा खाने लगे तो गुर्राने लग जाते हैं।

फ्रॉडिए फ्रॉड कर खाते भी हैं और अपने संगियों को दिल खोलकर खिलाते भी हैं। बस, इनकी यही अदा तो मुझे जिंदा होते भी मार डालती है बाबा! बंधुओ! मैं कोई बाबा तो नहीं, पर इतना जरूर कहूंगा कि अगर इस देश में जन्म ले ही लिया है तो फ्रॉड करते करते अपने यहां जन्म लेने को सफल करिए। कारण, यहां आकर हर जीव का एकमात्र उद्देश्य फ्रॉड करना है।

कहीं ऐसा न हो कि मरने के बाद भगवान जब ऊपर जाकर पूछे कि हे जीव! वहां जाकर फ्रॉड किया था कि नहीं और आप सिर झुका कर कहें, भगवान नहीं। और वह गुस्साए आपको फिर फ्रॉड करने के लिए दूसरी बार जन्म लेने की जबरदस्ती करे। पता नहीं तबको इस देश में फ्रॉड करने की संभावनाएं बची भी हो या नहीं।

अतः मैं तो बस इतना ही कहूंगा कि जो यह जीवन मिला है तो डटकर फ्रॉड कीजिए। इतने फ्रॉड कि हमारे फ्रॉड देख फ्रॉड के देवता का भी हीनता से सिर नीचा हो जाए। हेल्दी एवं चरित्रपूर्ण जीवन के लिए फ्रॉड पहनिए, फ्रॉड खाइए, फ्रॉड ओढ़ीये, फ्रॉड पीजिए। फ्रॉड ही इस जग में सबसे बड़ा धर्म है। फ्रॉड ही इस जग का सबसे बड़ा सत्कर्म है।

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