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जिंदगी की असलियत को दर्शाता व्यंग्य: नए जमाने की पैट शॉप

इधर जिंदगी में दो बातें एक साथ हुर्इं।

जिंदगी की असलियत को दर्शाता व्यंग्य: नए जमाने की पैट शॉप

हर किस्म की नस्ल के सर! देसी से लेकर विदेसी तक। ऐतिहासिक से लेकर पौराणिक तक। पर्सनल पैट, फैमिली पैट, कैजुअल पैट, फार्मल पैट, स्पोर्ट्स पैट, पार्टी पैट, म्यूजिक पैट, डांसिंग पैट और भी बहुत से.... आप प्लीज बस अपनी जरूरत बताएं तो हमारे पास हर वर्ग के, हर रेंज के पैट्स हैं सर पर..

इधर जिंदगी में दो बातें एक साथ हुर्इं। एक तो रिटायर हुआ और दूसरी ओर रिटायर होते ही दमकता चेहरा दूसरे दिन ही रंगहीन हो गया। गंधहीन तो पहले ही था। इसे गंधयुक्त बनाने के लिए पता नहीं इस पर क्या-क्या नहीं मलता रहा। पर बाद में पता चल गया कि जिस तरह से पुरानी र्इंटों पर नया पलस्तर नहीं चिपकता उसी तरह पक गए चेहरे पर कोई भी गंध अपना असर नहीं छोड़ती।

जवानी के दिनों में जिस खूबसूरती को मजाक समझता रहा था, बुढ़ापा आते ही उसके लिए पागल हो उठा। ऐसा ही होता है भाई साहब! एक समय में आप जिस चीज की कद्र नहीं करते, समय बीत जाने के बाद जब उस चीज की जरूरत लगे तो बाद में वह आपके आगे घास तक नहीं डालती। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। असल में खूबसूरत चेहरों के साथ तो आंखें बंद कर गधा भी खड़ा हो जाता है पर बूढ़े चेहरों के साथ उसका अपना चेहरा तक खड़ा होने में अपनी तौहीन महसूस करता है।

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रिटायरमेंट के बाद एक तो बुझा हुआ चेहरा, ऊपर से साथ कोई नहीं। जिसे अपने पास बुलाने की कोशिश करो, वही आपके पास से यों गायब हो जाए ज्यों गधे के सिर से सींग। तब हार कर मैंने तय किया कि मन बहलाने के लिए एक पैट (पालतू जानवर) ले लिया जाए। ये सोचते ही मैं बाजार की ओर लपका। मेरे एक दोस्त ने मुझे बताया कि बाजार में आजकल पैट, आदमी से अधिक काबिल मिल रहे हैं। एक से एक उम्दा विश्वसनीय नस्ल के। सो जेब में पर्स डाला और किसी को भी बिन बताए, दुम दबाए बाजार की ओर हो लिया।

बाजार की गलियों से अपना पर्स संभाले मंद-मंद गति से आगे बढ़ता इधर-उधर देखता ज्यों-ज्यों दोस्त द्वारा बताई शॉप का पता देखते चला जा रहा था तो सामने एक बोर्ड लगा देखा, ‘पैट एंड ब्यूटी पार्लर’ देख चौंका। इस पैट और ब्यूटी पार्लर का आपस में रिश्ता क्या होगा भाई साहब! क्या यहां कुत्ते अपने सौंदर्य को निखारने आते होंगे? वाह रे सौंदर्य बोध! अपना पर्स पकड़े बड़ी देर तक उस साइन बोर्ड को देख पता नहीं क्या-क्या सोचता रहा।

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जब अति सोचने के बाद भी मन की जिज्ञासा शांत न हुई तो पैट एंड ब्यूटी पार्लर की सीढ़ियां सांस फूलने के बाद भी एक ही सांस में चढ़ गया। ज्यों ही दरवाजे पर पहुंचा कि सामने रिसेप्शन पर बैठा जवान बुझा सा चेहरा मेरी ओर लपका, ‘क्या करवाना है आपको सर? हमारे यहां सुंदर बनाने की लेटेस्ट तकनीक मौजूद है।’ ‘आदमी की या कुत्तों की? असल में मैं एक पैट खरीदना चाहता हूं सोलह आने वफादार।’ मैंने अपनी नेचर का पैट इधर-उधर ढूंढ़ते उससे कहा। ‘इतनी जल्दी भी क्या है सर! पहले आप बैठिए तो सही।’ उसने बहुत अदब से कहा। ‘तो आपके पास कौन-कौन सी नस्ल के कुत्ते आई मीन पैट हैं?’

‘हर किस्म की नस्ल के सर! देसी से लेकर विदेसी तक। ऐतिहासिक से लेकर पौराणिक तक। पर्सनल पैट, फैमिली पैट, कैजुअल पैट, फार्मल पैट, स्पोर्ट्स पैट, पार्टी पैट, म्यूजिक पैट, डांसिंग पैट और भी बहुत से.... आप प्लीज बस अपनी जरूरत बताएं तो हमारे पास हर वर्ग के, हर रेंज के पैट््स हैं सर पर..’ ‘पर क्या?’ ‘सर! माफ कीजिएगा, पहले आपको अपना लुक चमकाना पड़ेगा,’ उसने बड़ी षालीनता से कहा तो मन खुश हो गया। किसी को तो मेरे लुक का ख्याल है। पूछा, ‘वह क्यों?’

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‘क्या है न सर कि असली चेहरों के साथ तो अपने घर तक के नहीं बैठते। ये तो ठहरे पैट््स। आज तो गली का कुत्ता तक सुंदर चेहरों के साथ ही रहना चाहता है। उसे दो रोटी कम मिले तो कोई गम नहीं, पर इन्हें ऐसे चेहरे कतई पसंद नहीं कि मालिक का चेहरा देखकर ही उनकी आधी भूख खत्म हो जाए।’ ‘मतलब?’ ‘इसलिए हम पैट बेचने से पहले उसको उसके मालिक से मिलवा लेते हैं। ताकि उसके साथ बेइंसाफी न हो। अगर उसे अपना मालिक पसंद आ जाए तो ठीक है वरना कई बार ऐसा भी हुआ है कि कुत्ते मालिक को छोड़ कर यहां आकर हमें कोसते हैं। अब हमने यह रिस्क लेना छोड़ दिया है।’

‘मतलब इस उम्र में अपने परिवारवालों से तो महरूम हो ही रहा हूं अब पैट से भी।’ मैंने अपने चेहरे पर हाथ फेरा तो सुबह ही दाढ़ी करने के बाद भी वह बंदर सी महसूस हुई तो मैं कांपा।

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उसने मुझे सहमते हुए देखा तो गुर्राता बोला, ‘इसीलिए तो सर!हम नहीं चाहते कि कोई कुत्ता किसी आदमी को रिजेक्ट करे, आदमी को आदमी ही रिजेक्ट करने वाले बहुत खड़े हैं। सो, हम पहले आपका चेहरा पैट के माफिक बनाएंगे, उसके बाद आपको आपके मन माफिक पैट से मिलवाएंगे ताकि कहीं कोई गड़बड़ न हो। आप भी खुश और पैट भी खुश।’ मैं असमंजस में पड़ गया। यह भी कोई बात हुई कि आए थे बुढ़ापे का सहारा पैट लेने और अब रहना पड़ेगा उसके ही मुताबिक!

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