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खिलाड़ियों को डोपिंग के साये से बचाना जरूरी

2016 की रिपोर्ट के मुताबिक रूस और इटली के बाद भारत डोपिंग मामले में तीसरे नंबर पर है।

खिलाड़ियों को डोपिंग के साये से बचाना जरूरी
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ओलंपिक की रेसलिंग स्पर्धा में भारतीय उम्मीदों को झटका सुखद नहीं है। सवा सौ करोड़ की आबादी वाले देश भारत से ओलंपिक रेसलिंग में इकलौता कोटा हासिल हुआ था। लेकिन डोप टेस्ट में भारतीय पहलवान नरसिंह यादव के दो सैंपल फेल पाए गए हैं। राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी (नाडा) ने पुष्ट कर दिया कि नरसिंह के बी नमूने में भी प्रतिबंधित स्टेरायड के अंश पाए गए हैं। इसके बाद उनके ओलंपिक जाने पर ग्रहण लग गया है। मूत्र सैंपल से डोप टेस्ट किए जाते हैं। ए टेस्ट में पॉजीटिव आने पर खिलाड़ी बी टेस्ट के लिए एंटी डोपिंग पैनल में अपील कर सकता है। यदि ‘बी’ टेस्ट भी पॉजीटिव आए तो खिलाड़ी को सजा हो सकती है। डोपिंग में दवाओं की पांच र्शेणियों-स्टेरॉयड, पेप्टाइड हार्मोन, नार्कोटिक्स, डाइयूरेटिक्स और ब्लड डोपिंग के टेस्ट होते हैं।

खिलाड़ी का डोप टेस्ट विश्व डोपिंग विरोधी संस्था (वाडा) या उसके देश की एजेंसी राष्ट्रीय डोपिंग विरोधी (नाडा) करती है। अंतरराष्ट्रीय खेलों में ड्रग्स के बढ़ते चलन रोकने के लिए वाडा की स्थापना 10 नवंबर, 1999 को स्विट्जरलैंड में की गई थी। उसके बाद हर देश में नाडा की स्थापना की गई। डोपिंग के दोषियों को दो साल से लेकर आजीवन पाबंदी तक सजा का प्रावधान है। विवादों के बीच नरसिंह का चयन हुआ था। 74 किलोग्राम वर्ग में सुशील कुमार की जगह नरसिंह यादव को मौका मिला था। सुशील इस बात को पचा नहीं पाए थे और इस चयन के खिलाफ अदालत चले गए थे, लेकिन अदालत ने चयन में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए सुशील को कड़ी नसीहत दी थी कि इससे पहले के ओलंपिक में उनका चयन भी उसी प्रक्रिया सेहुआ था, तो उस समय वह सही कैसे था और आज जब आपका चयन नहीं हुआ है तो वह प्रक्रिया गलत कैसे हो गई?
उसके बाद सुशील कुमार शांत हुए थे। नरसिंह ने 2015 में वल्र्ड चैम्पियनशिप में ब्रॉन्ज जीतकर ओलिंपिक कोटा हासिल किया था। उन्हें ओलिंपिक में व्यक्तिगत खेल स्पर्धा में लगातार दो मेडल बीजिंग-2008 में ब्रॉन्ज व लंदन-2012 में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय रेसलर सुशील कुमार की जगह इस बार रियो ओलंपिक के लिए भारत की टीम में शामिल किया गया था। पांच जुलाई को नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने सोनीपत में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के सेंटर में पहलवानों का डोप टेस्ट किया था। इसमें नरसिंह के पॉजीटिव होने की रिपोर्ट है। सोमवार को रियो की तैयारी के लिए जॉर्जिया जा रहे भारतीय पहलवानों के दल से भी उनका नाम हटा दिया गया है। ब्राजील के रियो में पांच अगस्त से ओलंपिक शुरू हो रहा है। अब बस दस दिन बचे हैं। अंतिम रूप से अगर नरसिंह फेल हो जाते हैं, तो भी सुशील कुमार को मौका मिलने का चांस नहीं है।
भारतीय ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष रामचंद्रन र्शीनिवासन के मुताबिक नरसिंह के नहीं जा पाने पर भारत का 74 किलोग्राम कोटा खाली रहेगा, क्योंकि एक तो सुशील ने ट्रायल में हिस्सा नहीं लिया था, दूसरा खिलाड़ियों के नाम भेजने की मियाद भी खत्म हो चुकी है। वैसे नरसिंह यादव और भारतीय कुश्ती संघ ने डोप टेस्ट में फेल होने को साजिश करार दिया है, लेकिन दो सैंपल फेल हुए हैं, इसलिए साजिश के आरोप में दम नजर नहीं आ रहा है। अब सारा दारोमदार नाडा व वाडा पर है। इससे पहले भी कई भारतीय खिलाड़ी डोप टेस्ट में फेल पाए गए हैं। 1968 के मेक्सिको ओलंपिक के दौरान पहली बार भारत में डोपिंग का मामला सामने आया था। जनवरी 2009 से जुलाई 2013 के बीच साढ़े चार साल में 500 भारतीय एथलीट डोप टेस्ट में फेल हुए थे। वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक रूस और इटली के बाद भारत डोपिंग मामले में तीसरे नंबर पर है। इसलिए देश के खिलाड़ियों को डोपिंग के साये से बचाने की जरूरत है।
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