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शशांक द्विवेदी का लेख : साइबर हमलों से सचेत रहना होगा

साइबर स्पेस सिक्योरिटी इस दौर की बड़ी जरूरत बन गई है। फिलहाल यह सवाल उठना बहुत लाजिमी हो गया है कि साइबर हमलों से निपटने के लिए हमारा देश कितना तैयार है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामला है जिस पर विचार करना बेहद जरूरी है। हम सब की इंटरनेट पर बहुत ज्यादा निर्भरता बढ़ने की वजह से आज के इस आधुनिक माहौल में साइबर सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो चली है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार भारत में जितने बड़े सर्वर मौजूद हैं, वे हैकिंग प्रूफ नहीं है। हमारे यहां भी तभी हम जागते हैं, जब कोई बड़ा साइबर अटैक हो। हैकर्स के नए तरीकों का सॉल्यूशन ढूंढने में महीनों लग जाते हैं।

शशांक द्विवेदी का लेख : साइबर हमलों से सचेत रहना होगा
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शशांक द्विवेदी 

शशांक द्विवेदी

एक बड़े साइबर हमले में एयर इंडिया के 45 लाख यात्रियों का डेटा लीक हुआ है। इस डेटा में भारत समेत अन्य देशों के यात्रियों की जानकारी भी शामिल है। यह हमला एयर इंडिया की सेवा प्रदाता कंपनी एसआईटीए (सीटा) के सर्वर पर हुआ है। सीटा एक जिनेवा स्थित प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो हवाई परिवहन संचार और सूचना प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता रखती है। सीटा यात्री प्रसंस्करण, आरक्षण प्रणाली आदि जैसी सेवाएं प्रदान करती है। 2017 में एयर इंडिया ने अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए सीटा के साथ एक समझौता किया था, जिसमे ऑनलाइन बुकिंग, प्रस्थान नियंत्रण प्रणाली, चेक-इन और स्वचालित बोर्डिंग नियंत्रण, बैगेज सुलह प्रणाली आदि सीटा के जिम्मे था।

यह डाटा लीक एयर इंडिया के सर्वर से नहीं बल्कि एयर इंडिया के सर्विस प्रोवाइडर यानी सीटा के सर्वर से लीक हुआ है। एयर इंडिया ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि इस अटैक में कंपनी के दुनियाभर के ग्राहकों की निजी जानकारी चोरी हो गई। इसमें ग्राहकों के नाम, जन्मतिथि, कॉन्टैक्ट इन्फर्मेशन, पासपोर्ट की सूचना, टिकट की सूचना और क्रेडिट कार्ड डेटा शामिल है। एयर इंडिया ने कहा कि लीक हुआ डेटा 11 अगस्त 2011 से 3 फरवरी 2021 के बीच यात्रा करने वाले लोगों का है। फिलहाल एयर इंडिया ने अपने यात्रियों को आश्वासन दिया है कि डेटा के किसी भी दुरुपयोग का कोई सबूत नहीं है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि लीक हुए डेटा में यात्रियों के पासपोर्ट और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारियां हैं, ऐसे में इस बात कि क्या गारंटी है कि भविष्य में यात्रियों के डेटा का दुरुपयोग नहीं होगा?

भारत सहित दुनियाभर में इस तरह के साइबर हमलों का खतरा मंडरा रहा है। पिछले एक साल में चीन ने भारत पर कई साइबर हमले किए हैं। जब पिछले साल अक्तूबर में मुंबई में ब्लैकआउट हो गया था और हाल में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का काम कई घंटे प्रभावित रहा। इसके पीछे चीन का साइबर हमला ही था। अब सवाल उठता है कि भारत इन साबइर हमलों के लिए कितना तैयार है। पिछले दिनों दिल्ली के थिंक-टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन के एक वर्चुअल कार्यक्रम में भारत के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टॉफ़ जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि चीन के पास भारत के खिलाफ साइबर हमले करने की क्षमता है और वो देश की व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकता है। 12 अक्तूबर 2020 को मुंबई के एक बड़े हिस्से में ग्रिड फेल होने के कारण बिजली चली गई थी। इससे मुंबई और आस-पास के महानगर क्षेत्र में जनजीवन पर गंभीर असर पड़ा था। इसकी वजह से लोकल ट्रेनें अपने सफर के बीच में ही रुक गई थीं और कोरोना महामारी के बीच हो रही छात्रों की ऑनलाइन कक्षाएं भी बाधित हुई थीं।

बिजली गुल होने से उस दौरान मुंबई सेंट्रल, थाणे, जोगेश्वरी, वडाला, चेंबूर, बोरीवली, दादर, कांदीवली और मीरा रोड जैसे इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए थे। 2020 की शुरुआत से ही रिकॉर्डेड फ्यूचर्स इनसिक्ट ग्रुप को चीन के इस प्रोयोजित समूह की ओर से भारतीय प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर लक्षित घुसपैठ की गतिविधि देखने को मिली है। पूर्वी लद्दाख में संघर्ष और एलएसी पर लगातार घुसपैठ करने की कोशिश में जुटा चीन भारत में हजारों लोगों की जासूसी करा रहा है। इन सबके बीच एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीनी कंपनी अलीबाबा भारतीय यूजर्स का डेटा चुरा रही है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब चीनी सरकार पर किसी देश के लोगों का डेटा चुराने का आरोप लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह डेटा वार का जमाना है। हम जब डेटा को टुकड़ों में देखते हैं तो नहीं समझ पाते हैं कि आखिर इससे कोई क्या हासिल कर सकता है, लेकिन इन्हीं छोटी जानकारियों को एक साथ जुटाकर और खास मकसद से हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। देश के आतंरिक मुद्दों, राष्ट्रीय नीति, सुरक्षा, राजनीति, अर्थव्यवस्था सबमें सेंधमारी के प्रयास किए जा सकते हैं।

भारत में कोरोनाकाल में एक तरफ जहां कोरोना वायरस ने लोगों की मुसीबतें बढ़ाई, तो दूसरी तरफ हैकर्स ने इसमें इजाफा किया। देश के लिए 2020 ऐसा साल रहा जब यूजर्स पर सबसे ज्यादा मैलवेयर अटैक किए गए। साइबर सिक्योरिटी फर्म सोनिकवॉल की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर और अक्टूबर के बीच में मैलवेयर अटैक का वॉल्यूम तीन गुना से भी ज्यादा रहा। सोनिकवॉल साइबर थ्रेट रिपोर्ट 2021 में कहा गया कि देश में दिसंबर 2020 में 25 मिलियन (2.5 करोड़) से अधिक मैलवेयर अटैक हुए। महामारी के दौरान सबसे ज्यादा साइबर अटैक वर्क फ्रॉम होम करने वाले यूजर्स पर किए गए। कई ऑर्गेनाइजेशन अटैक से बचने के लिए पावरफुल क्लाउड-बेस्ड टूल और क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल किया। साइबर क्राइम करने वालों के लिए 2020 सबसे बेहतर समय रहा है। बीते साल साइबर आर्म्स के लिए रेस लगी रही। महामारी ने रिमोट वर्किंग के साथ पॉलिटिकल क्लाइमेट, क्रिप्टोकरंसी की कीमतें, स्लाउड स्टोरेज और टूल्स सभी पर साइबर अटैक को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे कोविड-19 ने ज्यादा शक्तिशाली और आक्रामक हमलों के लिए पर्याप्त अवसर हैकर्स को दिए। साइबर अपराधी जब टारगेट पर अटैक करने के लिए सिलेक्शन करते हैं तो उनके लिए किसी तरह की आचार सहिंता नहीं है। निष्कर्ष से पता चला कि ग्लोबली रैंसमवेयर में 62 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, उत्तरी अमेरिका में सबसे ज्यादा 158 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

साइबर स्पेस सिक्योरिटी इस दौर की बड़ी जरूरत बन गई है। फिलहाल यह सवाल उठना बहुत लाजिमी हो गया है कि साइबर हमलों से निपटने के लिए हमारा देश कितना तैयार है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामला है जिस पर विचार करना बेहद जरूरी है। हम सब की इंटरनेट पर बहुत ज्यादा निर्भरता बढ़ने की वजह से आज के इस आधुनिक माहौल में साइबर सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो चली है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार भारत में जितने बड़े सर्वर मौजूद हैं, वे हैकिंग प्रूफ नहीं है। हमारे यहां भी तभी हम जागते हैं, जब कोई बड़ा साइबर अटैक हो। हैकर्स के नए तरीकों का सॉल्यूशन ढूंढने में महीनों लग जाते हैं।

कुल मिलाकर अब भारत को इस तरह के साइबर हमलों के लिए सचेत और सतर्क होना होगा और केंद्र सरकार को डिजिटल इंडिया की तर्ज पर साइबर सुरक्षा के लिए विशेष रणनीति और असाधारण प्रयास करने होंगे, क्योकि जब सब कुछ इंटरनेट के भरोसे हो जाएगा तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता में होना चाहिए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।

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