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सर्च ऑपरेशन से आतंक के सफाए में मदद मिलेगी

घाटी में करीब साढ़े तीन महीने से अशांति जारी है।

सर्च ऑपरेशन से आतंक के सफाए में मदद मिलेगी
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बारामूला में सुरक्षा बलों के 'सर्च ऑपरेशन' को कश्मीर में आतंकवाद के सफाये अभियान की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है। शायद यह पहली बार है जब सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने कश्मीर के किसी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर इस तरह का सर्च अभियान चलाया है। घाटी में करीब साढ़े तीन महीने से अशांति जारी है। और इस अशांति के पीछे सीमा पार के सर्मथन से हिज्बुल जैसे आतंकी व स्थानीय अलगाववादी गुट हैं। इन्हीं गुटों के लोग 8 जुलाई को हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से कश्मीर में हिंसा और उपद्रव जारी रखे हुए हैं।

जम्मू-कश्मीर की सरकार और सेना की लगातार कोशिश के बावजूद घाटी की फिजा में प्रायोजित अशांति घुली हुई है। इसमें 90 के करीब उपद्रवी मारे गए हैं और तीन हजार जवान समेत पांच हजार से ज्यादा घायल हुए हैं। आखिरकार सेना, जम्मू और कश्मीर पुलिस, बीएसएफ और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने आतंकी ठिकानों के गढ़ माने जाने वाले दक्षिण कश्मीर के क्षेत्र बारामूला के काजी हमाम, गनाई हमाम, तावीद गंज, जामिया व संवेदनशील इलाकों में बड़ा सर्च अभियान चलाया। इसे अशांति के कारणों की तह में जाने की कोशिश माना जा सकती है।

चौंकाने वाली बात है कि करीब 700 घरों की खोजबीन के दौरान विस्फोटकों समेत राष्ट्रविरोधी कई चीजें मिलीं। सर्च अभियान में संदिग्धों के घरों से पेट्रोल बम, आतंकवादी गुटों- लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद के लेटरहेड पैड, अनॉथराइज्ड मोबाइल फोन और चीनी व पाकिस्तानी झंडे बरामद किए गए। लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद पाक स्थित आतंकी गुट हैं। इससे साफ है कि पाक कश्मीर में अशांति के पीछे है। लेकिन संदिग्ध आतंकी ठिकानों से चीनी झंडे मिलना चिंता की बात है। यह चीन के लिए शुभ संकेत नहीं है।

अब तक कश्मीर में आतंकियों व उपद्रवियों के पास से पाक झंडे ही मिलते थे। लेकिन पहली बार चीनी झंडे मिले हैं। इसकी दो वजहें हो सकती हैं। एक तो चीन जिस तरह से जैश सरगना अजहर मसूद को अंतराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिश को नाकाम करता रहा है, उससे आतंकियों को लगा हो कि चीन हमारे साथ है और वे पाक के साथ चीनी झंडे भी अपने पास रखने लगे हों। दूसरा यह कि आतंकी गुट साजिश के तहत पाक व चीन के ज्वाइंट फ्लैग का इस्तेमाल कर रहे हों, ताकि पकड़े जाने पर भारत और चीन के रिश्ते और बिगड़े।

जबकि चीन खुद आतंकवाद के खिलाफ है और वह इस मसले पर पाक के साथ खड़ा नहीं दिखना चाहता है। इसलिए भारतीय सुरक्षा बलों को चीनी झंडे के मसले को संजीदगी से हैंडिल करना चाहिए। साथ ही चीन को भी सतर्क हो जाना चाहिए कि कोई आतंकी गुट या आतंकी चीनी झंडे का इस्तेमाल क्यों कर रहा है और इस दरम्यान चीनी सुरक्षा एजेंसियां कैसे आंख मूंदे हुई हैं। इस सर्च ऑपरेशन में 44 संदिग्धों की गिरफ्तारी भी बड़ी बात है। इनसे आतंक के स्रोतों का पता लगेगा। कश्मीर से आतंकवाद के खात्मे के लिए इस तरह का सर्च ऑपरेशन जरूरी है, लेकिन इसमें किसी बेकसूर को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
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