Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

अफ्रीकी छात्रों पर नस्ली हमला घोर निंदनीय

जिस तरह तीन दिनों के भीतर ग्रेटर नोएडा में ही दो बार अफ्रीकी छात्रों पर हिंसक हमला किया गया है, उसे नस्ली किस्म का हमला भी कहा जा सकता है।

अफ्रीकी छात्रों पर नस्ली हमला घोर निंदनीय

उत्तर प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद जहां कानून व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन के लिए अनेक कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गेटर नोएडा में अफ्रीकी छात्रों पर हमला चिंता पैदा करती है। तीन दिनों के भीतर ग्रेटर नोएडा में ही दो बार अफ्रीकी छात्रों पर हिंसक हमला किया गया है। जिस तरह की खबरें आ रही हैं, उसमें कहा जा रहा है कि यह नस्ली किस्म का हमला है।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की छवि के लिए यह घटना सही नहीं है। उत्तर प्रदेश पिछले पांच साल से अपनी लचर कानून व्यवस्था के लिए बदनाम रहा है। पूर्ववर्ती अखिलेश यादव की सपा सरकार कभी भी गुंडे व असामाजिक तत्वों पर लगाम नहीं लगा पाई थी। योगी सरकार से कानून व्यवस्था में सुधार की उम्मीद बनी है।

सत्ता संभालते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने ढीली कानून व्यवस्था के पेंच कसने भी शुरू किए हैं, इसके बावजूद अगर कोई नस्ल व रंग के नाम पर विदेशी छात्रों को निशाना बनाता है, इससे केवल यूपी की ही नहीं, भारत की छवि पर भी आंच आती है। दुनिया में भारत की पहचान धर्मनिरपेक्ष, अहिंसा के मार्ग पर चलने वाला, सभी के प्रति सहिष्णु व सर्वधर्म समभाव देश के रूप में है।

जब दुनिया के किसी अन्य हिस्से में नस्ली हमला होता है तो हम उसकी निंदा करते हैं। भारत को इस बात पर गर्व रहता है कि हम नस्लभेद या रंगभेद के नाम पर लड़ते नहीं हैं। दुनिया में रंग व नस्ल के नाम पर खुद को श्रेष्ठ कहने की यूरोपीय मानसिकता की विश्वभर में सदा आलोचना होती है। यूरोप द्वारा रंग व नस्ल के नाम पर दूसरे नागरिकों के साथ हिंसा और दुर्व्यवहार के उदाहरणों से विश्व इतिहास अटा पड़ा है।

विश्व इतिहास को देखें अफ्रीकियों ने सबसे अधिक रंगभेद का सामना किया है। रंगभेद के खिलाफ ही महात्मा गांधी ने अफ्रीका में बड़ी लड़ाई लड़ी। दक्षिण अफ्रीका से रंगभेद के खात्मे के लिए नेल्सन मंडेला को 27 वर्ष जेल काटनी पड़ी। उनके कठिन संघर्ष के बाद ही दक्षिण अफ्रीका को रंगभेद से मुक्ति मिली। अफ्रीका में गांधी के बहुमूल्य योगदान के चलते ही भारत और अफ्रीकी देशों के बीच मधुर रिश्ते बने हुए हैं।

इतिहास में रंगभेद व नस्लभेद की पीड़ा भुगतने के चलते ही अफ्रीकी किसी यूरोपीय देश जाना सहज रूप से पसंद नहीं करते हैं। इसके उलट सभी धर्मों व समुदायों के प्रति सहिष्णुता के चलते वे भारत आना पसंद करते हैं। अफ्रीकी देश- नाइजीरिया, केन्या, दक्षिण अफ्रीका, मोजांबिक आदि के छात्र भारत पढ़ने आते हैं। इससे हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में भी मदद मिलती है।

इस समय अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस में नस्ली हमले की घटनाएं हो रही हैं, वहां इसके पीछे एक कारण नौकरियों के छीनने की वजह से बाहरियों के खिलाफ गुस्से का भाव दिखता है और दूसरा कारण इस्लामिक आतंकवाद से खौफ का दिखता है, लेकिन भारत में इस तरह की कोई वजह नहीं दिखती है। अफ्रीकी यहां केवल पढ़ने आते हैं और उनके प्रति देश में किसी प्रकार के गुस्से का भाव भी नहीं है।

भारत जातिवाद से जरूर त्रस्त है, लेकिन नस्लभेद व रंगभेद से नहीं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में नई सरकार के आने के बाद नस्ल के नाम पर हिंसा की वजह की जांच की जानी चाहिए। सीएम योगी आदित्यनाथ को देखना चाहिए कि कोई साजिश के तहत उनकी हिंदुत्व छवि के पीछे उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए तो ये हमले नहीं कर रहा है। दूसरी ओर हम भारतीयों को अपनी उदारवादी परंपरा को नहीं छोड़ना चाहिए और सरकारों को भी देखना चाहिए कि कोई राज्य व देश की बहुलतावादी व उदारतावादी छवि को ठेस नहीं पहुंचाए।

Next Story
Top