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बैंकिंग तंत्र को फुलप्रूफ बनाना समय की मांग

सरकार को लोगों को नहीं घबराने की सलाह देनी पड़ी है।

बैंकिंग तंत्र को फुलप्रूफ बनाना समय की मांग
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भारतीय बैंकिंग इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी डाटा सेंधमारी से बैंकों, रिर्जव बैंक व सरकार का सन्न होना लाजिमी है। हैकरों ने बैंकों के 32 लाख डेबिट काडरें के डाटा में सेंध लगाई है। ये डेबिट कार्ड मुख्य रूप से एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, यस बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, सेंट्रल बैंक व आंध्रा बैंक के एटीएम धारकों के हैं। चोरी किए डाटा से चीन में पैसा निकालने की भी खबर है। इससे चीन के हैकरों पर डाटा चोरी करने का संदेह गहरा रहा है। यह सेंधमारी भारत की सबसे बड़ी साइबर चोरी साबित हो सकती है। साइबर अपराध का यह बड़ा मामला बनता दिख रहा है। इतने बड़े पैमाने पर एटीएम डाटा के हैक होने की खबर आने के बाद बैंकिंग जगत में सिचुएशन पैनिक है। देशभर के एटीएम धारकों में घबराहट है। सरकार को लोगों को नहीं घबराने की सलाह देनी पड़ी है।
वित्त मंत्रालय को बयान जारी कर कहना पड़ा है कि डेबिट कार्डस पूरी तरह से सुरक्षित हैं और कोई डाटा लीक नहीं हुआ है। यह केवल अफवाह है। डरने की जरूरत नहीं है। वित्त मंत्रालय ने बताया है कि 99.5 फीसदी कार्डस पूरी तरह से सुरक्षित हैं। सिर्फ 0.5 फीसदी डेबिट काडरें के डिटेल का ही समझौता हुआ है। इस समय देश में लगभग 60 करोड़ डेबिट कार्ड हैं, जिनमें 19 करोड़ तो रूपे कार्ड हैं जबकि बाकी वीजा और मास्टरकार्ड हैं। ये सभी सुरक्षित हैं। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने रिर्जव बैंक तथा बैंकों से एटीएम डाटा में सेंध तथा साइबर अपराध से निपटने के लिए तैयारी के बारे में डिटेल रिपोर्ट मांगी है। बैंक की तरफ से यह भी विचार हो रहा है कि जिन ग्राहकों के डेबिट कार्ड से डेटा चोरी के जरिए पैसे निकाले गए हैं, उन्हें उतनी रकम लौटाई जाए। माना जा रहा है कि हिताची पेमेंट्स सर्विसेज की प्रणाली में एक मालवेयर के जरिए सुरक्षा चूक हुई है। यह कंपनी यस बैंक को सेवा देती है। हिताची पेमेंट्स एटीएम सर्विसेज, प्वाइंट ऑफ सेल सर्विसेज, इर्मजिग पेमेंट्स सर्विसेज आदि के जरिए सेवाएं देती है। हालांकि हिताची पेमेंट सर्विसेज और मास्टरकार्ड ने किसी तरह की चूक से इनकार किया है।
एटीएम डाटा में सेंधमारी की खबर का असर शेयर बाजार पर भी पड़ा है। एसबीआई के शेयर में 1.46 फीसदी और एक्सिस बैंक के शेयर में 2.38 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। अन्य बैंकों के शेयर के भाव भी सुस्त रहे। आज जिस तरह भारत अपने पूरे तंत्र को डिजिटाइज कर रहा है और तेजी से पेपरलेस इकॉनोमी की ओर बढ़ रहा है, उसमें इतने व्यापक स्तर पर एटीएम डाटा में सेंधमारी कई सवाल भी खड़े करती है। क्या हमारा बैंकिंग सिस्टम फुलप्रूफ नहीं है? हम इतने समय से बैंक को डिजिटाइज कर रहे हैं, तो क्या हमने अपनी सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा है? सुरक्षा चूक का संदेह हिताजी पर जा रहा है, तो क्या जब हम किसी से सेवा का कांट्रेक्ट करते हैं, उनसे सुरक्षा का वादा नहीं लेते हैं? इन सवालों के जवाब बैंकों को ढूंढ़ने होंगे। केवल एटीएम के पिन बदलने व डेबिट कार्ड बदलने के लिए कहने से समस्या का स्थाई हल नहीं निकलेगा। इस तरह की सेंधमारी हमारे बैंक व हमारी अर्थव्यवस्था को चौपट कर सकती है। हमारे स्पेस, साइंस रिसर्च, डिफेंस, सिक्योरिटी और फाइनेंस सिस्टम डिजिटल बेस पर निर्भर है। ऐसे में हमें सबक लेते हुए अपने समस्त डिजिटल सिस्टम को पूर्ण सेफ व हैकप्रूफ करना होगा, ताकि ऐसी सेंधमारी की गुंजाइश ही न हो। सरकार को चाहिए कि सेंधमारी की जल्द जांच कराए, ताकि लोग राहत की सांस ले सकें।

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