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जानिए बैंकों के एटीएम क्यों कैशलेस हो गए

आंध्रा प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली में अचानक बैंकों के एटीएम क्यों कैशलेस हो गए, इसकी पड़ताल जरूरी है। शुरुआती जांच पड़ताल में जो कारण सामने आए हैं, वह थोड़ा चौंकाते हैं। सरकार की मानें तो पिछले पंद्रह दिन में कैश की मांग और निकासी अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है।

जानिए बैंकों के एटीएम क्यों कैशलेस हो गए
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आंध्रा प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली में अचानक बैंकों के एटीएम क्यों कैशलेस हो गए, इसकी पड़ताल जरूरी है। शुरुआती जांच पड़ताल में जो कारण सामने आए हैं, वह थोड़ा चौंकाते हैं। सरकार की मानें तो पिछले पंद्रह दिन में कैश की मांग और निकासी अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। आम तौर पर रिजर्व बैंक हर महीने बीस हजार करोड़ रुपये की आपूर्ति बैंकों के जरिए करता है।

पिछले कुछ महीनों में निकासी चालीस से पैंतालीस हजार करोड़ तक दर्ज की गई है, जो दोगुनी से भी ज्यादा है। अकेले अप्रैल की तरह तारीख तक ही निकासी पैंतालीस हजार करोड़ तक पहुंच गई । यह पूरी तरह चौंकाने वाली घटना है। सरकार की ओर से जो ब्यौरा दिया गया है, उसके मुताबिक नवंबर 2017 में एटीएम से 36 हजार 518 करोड़ रुपये निकले गए।

दिसंबर 2017 में 40 हजार 760 करोड़, जनवरी 2018 में 41 हजार 102 करोड़ और फरवरी में 37 हजार 126 करोड़ रुपये निकले गए। जबकि अप्रैल में तेरह तारीख तक ही यह रकम 45 हजार करोड़ को पार कर गई। नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण के तहत सरकार ने हजार और पांच सौ के पुराने नोट वापस लिए थे औए दो हजार व पांच सौ के नए नोट जारी किए थे। तब कुछ महीने तक लोगों को नकदी की कमी का सामना करना पड़ा था।

रिजर्व बैंक और नोटों की छपाई

रिजर्व बैंक के अनुसार लगातार नोटों की छपाई और आपूर्ति से सितंबर 2017 तक हर तरह की कमी को पूरा कर लिया गया था। उस समय तक देश में लोगों के पास करीब पंद्रह लाख करोड़ की नकदी थी, जो मार्च 2018 तक बढ़कर साढ़े सत्रह लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। रिजर्व बैंक की शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया है कि त्योहार होने के चलते नकदी की मांग एकाएक बढ़ी है।

नोट की जमाखोरी

दूसरी वजह दो हजार के नोट की जमाखोरी बताई जा रही है। तीसरा कारण किसानों को उनकी फसल का भुगतान नकदी में किया जाना बताया जा रहा है। एक वजह यह भी बताई गई है कि बड़ी संख्या में दो सौ के नोट रिजर्व बैंक के पास हैं परंतु एटीएम में उसके खांचे अभी तक नहीं बनाए गए हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली, वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल और रिजर्व बैंक की ओर से इस मौजूदा संकट पर बयान आ चुके हैं।

नकदी की कमी

उनका कहना है कि रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त मात्रा में नकदी है। अगले कुछ दिनों में उन राज्यों में नकदी पहुंचा दी जाएगी, जहां इसकी कमी देखी जा रही है। कुछ राज्यों के पास ज्यादा नकदी है। कुछ के पास कम है। अगले कुछ दिनों में यह संतुलन साध लिया जाएगा। सरकार और रिजर्व बैंक ने नकदी की कमी की जो भी वजहें गिनाई हैं, हो सकता है सही हों परंतु मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान पर भी गौर किए जाने की आवश्यकता है।

कैश क्रंच का जिमेदार कौन

उन्होंने इसके पीछे किसी साजिश की तरफ इशारा किया है। यह साजिश क्या हो सकती है। किसकी हो सकती है। इसकी जांच रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय को करानी चाहिए। यदि ऐसा कुछ है तो निश्चित रूप से गंभीर मसला है। लेकिन इस पूरे प्रकरण का एक और पहलू भी है। जैसे ही इस तरह की दिक्कत शुरू होती है, मीडिया का एक अंग इसे राष्ट्रव्यापी समस्या बताकर लोगों में दहशत और अविश्वास की भावना पैदा करना शुरू कर देता है।

विमुद्रीकरण के समय उत्पन्न हुए संकट

इससे जिन क्षेत्रों में समस्या नहीं भी होती है, वहां भी लोग बिना जरूरत के भी अतिरिक्त निकासी के लिए एटीएम और बैंकों के सामने लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं। मीडिया को भी ऐसे मामलों में और जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग करनी होगी। कुछ ने तो इस फौरी संकट की तुलना विमुद्रीकरण के समय उत्पन्न हुए संकट से ही कर डाली। ऊपर से विपक्षी दलों के उन नेताओं ने भी राजनीतिक रोटियां सेकना शुरू कर दिया जो प्रधानमंत्री की आलोचना के लिए मौके की तलाश में बैठे रहते हैं।

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