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दिलों में धड़कते रहेंगे अटल जी

कालजयी राजनीतिज्ञ, जानेमाने कवि, प्रखर वक्ता, सशक्त पत्रकार, ओजस्वी व्यक्तित्व और जननायक देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद समूचे देश में शोक की लहर है, लोगों की आंखें नम हैं, पूरा राष्ट्र गमगीन है। पड़ोसी मुल्कों में भी शोक की लहर है।

दिलों में धड़कते रहेंगे अटल जी
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कालजयी राजनीतिज्ञ, जानेमाने कवि, प्रखर वक्ता, सशक्त पत्रकार, ओजस्वी व्यक्तित्व और जननायक देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद समूचे देश में शोक की लहर है, लोगों की आंखें नम हैं, पूरा राष्ट्र गमगीन है। पड़ोसी मुल्कों में भी शोक की लहर है। सबको लग रहा है कि उनका अपना कोई चला गया है।

यह दिखाता है कि अटल ने केवल देश पर शासन नहीं किया, बल्कि आवाम के दिलों पर राज किया। राजनीति के आजातशत्रु माने जाने वाले वाजपेयी जी बेशक पंचतत्व में विलीन हो गए, लेकिन वे अपने कर्मों से, विचारों से, सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों से सदा हमारे बीच रहेंगे, देश का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

देश की राजनीति, राष्ट्र की नई पीढ़ी के लिए वे हमेशा प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। राजनेता के रूप में, व्यक्तित्व के रूप में उनकी स्वीकार्यता ही है कि देश के सभी विचारों के राजनीतिज्ञ उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। यह उनका असाधारण व्यक्तित्व ही था कि विचारधारा को लेकर मतभेद के बावजूद विपक्षी दलों के बड़े नेता भी इस जननेता के आखिरी दर्शन के लिए स्मृति स्थल पहुंचे।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, मुलायम सिंह यादव, नीतीश कुमार, राज्यों के मुख्यमंत्री, गवर्नर समेत सभी विपक्षी दलों के नेता मौजूद रहे। पांच किलोमीटर की अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने अश्रूपूर्ण नेत्र से अपने नेता को विदाई दी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल देश के विरले नेताओं में शुमार हो गए, जिनकी अंतिम यात्रा में जनमानस उमड़ पड़ा।

यह उनके व्यक्तित्व की आभा है कि उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए भारत से बाहर दूसरे देशों के नेता भी शरीक हुए। बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद, नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावाली, भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामगेयाल वांगचुक, श्रीलंका के कार्यकारी विदेशी मंत्री लक्ष्मण किरीला और पाकिस्तान के कानून मंत्री अली जफर अटल जी के अंतिम संस्कार में शामिल होने नई दिल्ली आए।

अमेरिका, चीन ने श्रद्धांजलि दी। अटल ने कविता के जरिए पहले ही अपने अंतिम सफर का जिक्र करते हुए कहा था, 'मौत की उम्र क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?' देश-विदेश में बसे भारतीय अब उनकी इन पंक्तियों के जरिए अपने प्रिय नेता को याद कर रहे हैं।

जब नातिन निहारिका ने वाजपेयी के पार्थिव शरीर पर से तिरंगा ग्रहण किया, उस पल स्मृति स्थल पर मानों घड़ी की सुई कुछ देर के लिए ठिठक गई, पूरा माहौल गमगीन था। स्मृति स्थल पर मौजूद हर किसी की आंखों में आंसू थे। अटल थे ही कुछ ऐसे, उनका कवि मन सदैव संवेदनाओं से भरा होता था। उनकी आत्मीयता, समरसता, मधुरता और सादगी लोगों को बांध लेती थी।

सियासत की दुनिया का उन्हें अजातशत्रु' कहा जाता था क्योंकि उन्होंने हमेशा दोस्त बनाए, दुश्मन उनका कोई नहीं था। अटल जी की शख्सियत ही ऐसी थी कि उनके चाहने वाले सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों में भी हैं। पाकिस्तान के होने वाले प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी इस उपमहाद्वीप की बड़ी राजनीतिक हस्ती थे।

भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहतर करने के उनके प्रयास हमेशा याद रखे जाएंगे। इस कठिन घड़ी में हम भारत के साथ खड़े हैं। विदेशी मीडिया ने वाजपेयी को निडर और शांतिप्रिय नेता के रूप में याद किया। देश-विदेश के मानस पटल में अटल हमेशा बसे रहेंगे। अटल की अंतिम यात्रा हमेशा यादगार बनी रहेगी। वे हमेशा देश के दिलों में धड़कते रहेंगे।

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