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व्यंग : तुम सबका आसरा है

उनके खास लोग लंबी सी गाड़ी से मेरे ढाबे के आगे उतरे और अपना पसीना पोंछते बोले,

व्यंग : तुम सबका आसरा है

अशोक गौतम

उनके खास लोग लंबी सी गाड़ी से मेरे ढाबे के आगे उतरे और अपना पसीना पोंछते बोले, यार! यू आर वैरी लक्की! मुबारकां! वे तुम्हारे ढाबे पर खाना खाकर अपनी गश खाकर गिर पड़ी पार्टी में जान फूंकेंगे! समझो अब तुम तर गए, तुम्हारे ढाबे के दिन फिर गए। अब तुम्हारा ढाबा आम ढाबा नहीं रहेगा। यह खास हो जाएगा। उनका आशीर्वाद रहा तो इतिहास हो जाएगा, तो सहज भाव से मैंने पूछा, साहब! ढाबे पर खाकर तो मेरे जैसे लोगों के शरीर में जान आती है।

ढाबों पर खाना खाकर पार्टी में भी जान आती है ये पहली बार आपसे ही पता चला,मेरे कहने पर वे कुछ नहीं बोले, बस, मेरी तरह आजू बाजू से टूटे मेरे ढाबे का मुआयना करते रहे। और उनके ढाबे पर खाना खाने के लिए सरकारी जमीन पर बने ढाबे का चयन होते ही मैं गदगद हो उठा। देखते ही देखते में मेरे ढाबे का कायाकल्प होने लगा। जो सड़क वाले हर रोज मुझे सरकारी जमीन पर मेरा ढाबा होने के चलते दड़का जाते थे, चाय-समोसा खा जाते थे, वही मेरे ढाबे के आगे की खाली जगह पक्की करने में जुट गए।

बरसों पहले जो मैंने अपने ढाबे पर फटी-पुरानी तिरपाल डाली थी, उसमें से अब जगह-जगह से सारी र्मयादाएं तोड़ आसमान ताकने लगा गया था। उन्होंने आते ही उसे हटवाया और उसकी जगह नई तिरपाल डाल दी तो मुझे अपने कपड़ों पर शर्म आई। मेरे ढाबे के आसपास की सफाई की गई और मेरे लिए नए खाना बनाने के नए बरतन दिए गए। आजतक मर गया था अपने ढाबे के चूल्हे में कच्ची लकड़ियां जलाते जलाते। फूंक मार मार कर आंखें फूट रही थीं।

साहित्य और सोशल मीडियाः विधाओं में तोड़फोड़

अगले दिन दूसरे आए और मेरे ढाबे पर गैस का चूल्हा रख गए। फिर तीसरे आए और खाना बनाने के लिए विलायती राशन छोड़ गए। साथ में हिदायत भी दी कि क्या क्या बनाना है। वे अचानक तुम्हारे ढाबे के आगे रुकेंगे। साथ में मीडिया वाले होंगे। तुम कैमरों की चमक देख परेशान मत होना। अपने को सहज रखना। मीडिया को ऐसा लगे कि ये सब फिक्सड नहीं। देखना, तब तुम्हारा ढाबा टीवी पर आएगा। अखबारों में छाएगा। और उसके बाद इस ढाबे का कद इतना ऊंचा हो जाएगा कि इसके आगे फाइव स्टार भी अपने को बौना पाएगा।
पर याद रखना, जब तक वे तुम्हारे ढाबे पर खाना नहीं खा लेते, यहां पर पुराने ग्राहकों का रोटी खाना प्रतिबंधित रहेगा तो मैंने कहा,पर साहब! अपना ढाबा तो चलता इन्हीं लोगों की वजह से है। चार दिन इनको रोटी नहीं खिलाऊंगा तो इनका तो हाल-बेहाल हो जाएगा। ये जीते ही मेरे ढाबे के आसरे हैं। अगर इनको नहीं खिलाऊंगा तो मेरे सारे ग्राहक मेरे दुश्मन के ढाबे पर चले नहीं चले जाएंगे?
अरे यहां तो लाखों मशहूरी पर खर्च करने के बाद भी माल नहीं बिकता और तू तो..।उसके बाद मैंने बड़े-बड़े सपने लिए और समझौता कर गया। मेरे जैसे लोगों की फितरत ही यही होती है। वे आए! उन्होंने खटाक से मेरे ढाबे के आगे गाड़ी रुकवाई तो मैंने अपनी जान सड़क पर लावारिस कुत्ते सी पाई। वे गाड़ी से उतर मेरे ढाबे की ओर बढ़े तो मैंने पानी से भरा तसला उनकी ओर करते कहा, पहले अपने पांव धुलवा लीजिए।
आपकी एक ही ललकार से दल फिलहाल स्वर्ग को चला गया। कहीं ऐसा न हो कि आपके मेरे ढाबे में पांव रखते ही..। तो वे बोले, हे मेरे केवट। तुमने अपनी नाव से राम को पार लगाया था। अब अपने ढाबे, जनरल डिब्बे में बैठा मेरी नाव पार लगा दो। मुझे अब तुम जैसों का ही सहारा है। तुम्हारी उंगली की स्याही में ही मेरा किनारा है।
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