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विवेक शुक्ला का लेख: क्या जीवित हैं किम जोंग

उत्तर कोरिया दूतावास के बाहर उत्तर कोरिया का झंडा लहरा रहा है। इसके मेन गेट पर अंग्रेजी और कोरियाई में लिखा है, एंबेसी आफ दि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आफ कोरिया। इसके अंदर किम जोंग, उनके पिता किम जोंग-इल, दादा किम इल-सुंग की बहुत सारी फोटो टंगी हैं। किम जोंग ने अपने पिता और दादा की लाशों को आज भी संभाल के रखा हुआ है।

विवेक शुक्ला का लेख: क्या जीवित हैं किम जोंग

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की सेहत को लेकर में चल रही कयासबाजी के बीच राजधानी दिल्ली में जानी दुश्मन रहे उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के कोने आबाद हैं। उत्तर कोरिया का ग्रेटर कैलाश-पार्ट टू में स्थित दूतावास से फिलहाल ये जानकारी निकाल पाना असंभव है कि उनके एकछत्र नेता किस हाल में हैं। दूतावास लॉकडाउन के कारण बंद है। ग्रेटर कैलाश की ई-455 नंबर की कोठी से चलता है उत्तर कोरिया का दूतावास। ग्रेटर कैलाश आवासीय इलाका है, जिसमें कुछ देशों के भी दूतावास और उच्च्ाायोग हैं।

उत्तर कोरिया दूतावास के बाहर उत्तर कोरिया का झंडा लहरा रहा है। इसके मेन गेट पर अंग्रेजी और कोरियाई में लिखा है, एंबेसी आफ दि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आफ कोरिया। इसके अंदर किम जोंग, उनके पिता किम जोंग-इल, दादा किम इल-सुंग की बहुत सारी फोटो टंगी हैं। किम जोंग ने अपने पिता और दादा की लाशों को आज भी संभाल के रखा हुआ है।

कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने के लिए चल रहे लॉकडाउन के कारण उत्तर कोरिया दूतावास 21 मार्च से ही बंद है। हालांकि आम धारणा है कि भारत के उत्तर कोरिया से राजनयिक संबंध नहीं हैं। जबकि दोनों के संबंध लंबे समय से हैं। पूर्व विदेश मंत्री अब स्मृति शेष सुषमा स्वराज ने 25 अक्टूबर 2017 को कहा था कि भारत का उत्तर कोरिया में राजदूत रहना चाहिए। महत्वपूर्ण है कि भारत का भी दूतावास उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में है। इस बारे में इकनोमिक टाइम्स ने एक खबर छापी भी थी। भारत-उत्तर कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार साल 2016-17 तक 130 मिलियन डॉलर था। हालांकि वह आगे चलकर कम ही होता रहा।

दरअसल खबरें आ रही हैं कि उत्तर कोरिया के तानाशाह किम की कुछ समय पहले हार्ट सर्जरी हुई है। उसके बाद से ही वे पूरी तरह से स्वस्थ तो नहीं हैं। उनकी सेहत को लेकर अफवाहें इसलिए भी चल रही है क्योंकि किम पिछले काफी समय से अपने देश के टीवी या किसी अन्य कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए हैं। जानकारों का कहना है कि अगर तानाशाह किम की मौत हो गई होती तो उसके दिल्ली स्थित दूतावास में जरूर कुछ हलचल होती। यहां की खामोशी बता रही है कि किम अभी ठीक हैं। किम के दादा का जब 1994 निधन हुआ था तब दूतावास में शोक पुस्तिका रखी गई थी। तब पीवी नरसिंह राव देश के प्रधानमंत्री थे। राव दूतावास में गए थे ताकि वे शोक पुस्तिका में उत्तर कोरिया के नेता के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त कर सकें। जानने वाले जानते हैं कि जब राव साहब दूतावास पहुंचे थे तो दक्षिण कोरिया के राजदूत उनसे गले मिलकर बच्चों की तरह रोए थे। तब राव साहब के साथ गए सुरक्षा कमियों को राजदूत को उनसे अलग करना पड़ा था।

दिल्ली में दक्षिण कोरिया का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है। इसे कोरियन वार मेमोरियल कहा जाएगा। यह दिल्ली कैंट में थिमय्या पार्क में विकसित हुआ है। यह जगह आर्मी बेस अस्पताल के करीब है। दक्षिण और उत्तर कोरिया के बीच 50 के दशक में हुए युद्ध में भारत समेत 22 देशों ने दक्षिण कोरिया का साथ दिया था। पर इस तरह का कोरियाई युद्ध स्मारक सिर्फ भारत में ही नहीं है। दक्षिण कोरिया की एंबेसी ने इसे विकसित किया है। इसे कोरोना संकट की समाप्ति के बाद खोलने की योजना है। इस कोरियन वार मेमोरियल में कोरिया के आर्किटेक्चर की छाप साफ दिखाई देती है। इसमें गुरुदेव रविन्द्रनाथ टेगोर की एक अर्धप्रतिमा भी है। कहते हैं कि कोरिया में टेगोर बेहद लोकप्रिय कवि हैं। उन्होंने 1929 में कोरिया के गौरवशाली इतिहास पर एक कविता भी लिखी थी। थिमय्या पार्क में कोरिया वार मेमोरियल को सोच-समझकर ही स्थापित किया गया है। जनरल कोडन्डेरा सुबय्या थिमय्या ने उस भयानक युद्ध के दौरान दक्षिण कोरिया को लगातार इनपुट्स दिए थे, इसलिए यह युद्ध स्मारक उनके नाम पर बने पार्क पर तैयार हुआ है। आजाद भारत की थलसेना के पहले भारतीय जनरल थे थिमय्या।

दूसरी तरफ भारत में इस समय सात-आठ हजार दक्षिण कोरिया के पेशेवर रह रहे हैं। ये अधिकतर दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा में हैं। ये साउथ कोरिया की सैमसंग, एल जी और ह्युन्डई जैसी बड़ी और मशहूर कंपनियों में काम करते हैं। इसी कारण वे यहां रहते हैं। इन कंपनियों के उत्पाद भारत में खासे लोकप्रिय हैं। ये मानते हैं कि जब सारी दुनिया कोरोना के कारण खराब स्थिति में है, तब भारत ही एक आशा की किरण के रूप में उभरता है। इधर हालात इतने बिगड़े नहीं हैं। भारत में रहने वाले साउथ कोरिया के बहुत से नागरिकों ने अपने यहां स्टार्टअप भी शुरू किए हैं। इनमें से कुछ आटो सेक्टर की कंपनियों के लिए स्पयेर पार्ट भी बनाने लगे हैं। इस बीच, दिल्ली-एनसीआर में मकान मालिक दक्षिण कोरिया के नागरिकों को अपना घर रेंट पर देना पसंद करते हैं क्योंकि ये घर को बेहद साफ-सुथरा रखते हैं। ये लगभग सभी बौद्ध धर्म को मानते हैं। इन्हें भी भारत में आकर रहना और काम करना पसंद आता है। उन्हें भारत की संस्कृति बहुत अच्छी लगती है।

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