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अन्ना के सवालों पर संदेह के घेरे में आप

अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेद होने की बात करीब साल भर से दबी जुबान में कही जाती रही है।

अन्ना के सवालों पर संदेह के घेरे में आप
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अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेद होने की बात करीब साल भर से दबी जुबान में कही जाती रही है। इस बीच अरविंद अपनी पार्टी ‘आप’ के जरिए भ्रष्टाचार के खिलाफ जनलोकपाल लाने के लिए शुरू हुए अन्ना आंदोलन को आगे बढ़ाने का दावा करते रहे और खुद अन्ना भी उनको ईमानदार और कर्मठ बताते रहे। परंतु अब जो बातें समाने आ रही हैं उससे स्पष्ट हो चला हैकि दोनों गुरु और शिष्य के बीच कुछ बिंदुओं पर मतभेद या गलतफहमी है। अन्ना हजारे ने अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी को लेकर जो बातें कही है, वो सचमुच में गंभीर हैं और वे चुनावी मौसम में केजरीवाल को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि अरविंद केजरीवाल की ईमानदारी पर बेशक कोई सवाल नहीं उठा सकता, खुद अन्ना हजारे ने भी कहा है, लेकिन उन पर अन्ना ने जो आरोप लगाए हैं उससे केजरीवाल और उनकी टीम की मंशा पर प्रश्न चिह्न् तो लगा ही है। साथ ही केजरीवाल और उनकी पूरी टीम अन्ना हजारे के सवालों से संदेह के घेरे में आ गई है। केजरीवाल की टीम और ‘आप’ का आधार ही अन्ना हजारे का आंदोलन है। आज से दो साल पहले हुए उस जनआंदोलन की आवाज केवल भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के लोगों के कानों तक पहुंची थी। अपने आप में एक अनोखा और बहुत बड़ा गैरराजनीतिक आंदोलन के मुखिया के रूप में अन्ना हजारे उभरे थे और केजरीवाल को उनके सहयोगी के रूप में पहचान मिली थी, लेकिन बाद में दोनों की राहें जुदा हो गईं। केजरीवाल ने राजनीतिक पार्टी बना ली, उन पर राजनीतिक रूप से महत्वाकांक्षी होने का आरोप तक लगा। ‘आप’ एक साल में ही इतनी लोकप्रिय हो गई है कि दिल्ली विधानसभा में दो राष्ट्रीय पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के होते अपनी पहचान दर्ज करने और कुछ सीटें हासिल करने की स्थिति में पहुंच गई है तो इसका र्शेय अन्ना आंदोलन को भी जाता है। पिछले दिनों अन्ना के एक सर्मथक ने नाराज होकर अरविंद पर स्याही फेंक दी, उसके बाद खुद अन्ना ने भी कहा अरविंद उनके नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। जबकि अन्ना स्पष्ट कर चुके हैं कि वे ‘आप’ को सपोर्ट नहीं करते, जब उन्होंने खुद को पूरी तरह से केजरीवाल से अलग कर लिया है तो उनके नाम का इस्तेमाल चुनाव के दौरान क्यों हो रहा है? उन्होंने इस पर चिट्टी लिखकर सफाई भी मांगी थी, लेकिन आप पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उसे सार्वजनिक कर दिया जिससे इस मुद्दे को हवा मिली। और उसके बाद आई सीडी जो पिछले वर्ष दिसंबर की है, जिसमें अन्ना आंदोलन के दौरान जमा किए गए पैसों को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर कर रहे हैं। वे कहे रहे हैं उस पैसे का दुरुपयोग हुआ है। हालांकि इस सीडी की टाइमिंग को लेकर ‘आप’ के सदस्यों का तर्क अपनी जगह ठीक है, यदि केजरीवाल और उनकी टीम खुद को अन्य दलों से अलग मानती है तो जो आरोप लगे हैं उसे शिद्दत के साथ स्पष्ट किया जाना चाहिए। हालांकि यह उतना बड़ा नहीं है जितना की ‘आप’ के सदस्यों ने बना दिया है। केजरीवाल कह चुके हैं कि उस पैसे के दुरुपयोग की बात सच हुई तो चुनाव नहीं लडेंगे, परंतु वे अन्ना हजारे को विश्वास कैसे दिलाएंगे।

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