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दुनिया सुरक्षित नहीं तो अकेले अमेरिका कैसे सुरक्षित रहेगा

भले ही अमेरीका में 9/11 के बाद उतना बड़ा हमला नहीं हुआ लेकिन पूरी दुनिया में अब भी चरमपंथ है।

दुनिया सुरक्षित नहीं तो अकेले अमेरिका कैसे सुरक्षित रहेगा
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नई दिल्ली. पंद्रह साल पहले 11 सितंबर को अमरीका के वल्र्ड ट्रेड सेंटर और रक्षा मुख्यालय पेंटागन पर चरमपंथी हमले हुए थे जिनमें करीब तीन हजार लोग मारे गए थे। इन पंद्रह सालों में इस घटना ने पूरी दुनिया में बहुत कुछ बदल दिया। चरमपंथ को लेकर अमेरीकी नीति में बदलाव और भविष्य की योजनाओं पर अमेरीकी सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ क्या कहते हैं आइये जानते हैं-
भले ही अमेरीका में 9/11 के बाद उतना बड़ा हमला नहीं हुआ लेकिन पूरी दुनिया में अब भी चरमपंथ है। दुनिया में कई जगह चरमपंथी हमले हुए हैं। अमरीका में अब वो माहौल नहीं रहा जो 9/11 के तुरंत बाद था। बहुत से अमरीकी कहते हैं कि दो जंगें इराक और अफगानिस्तान में बगैर किसी वजह की लड़ लीं। इससे अमरीका को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। जहां तक दुनिया की बात है तो अमरीका कई सारे देशों को चरमपंथियों का सर्मथन करने से रोक नहीं पाया और ना ही चरमपंथ को पूरी तरह से खत्म कर पाया है।
अमेरीका को चरमपंथ खत्म करने के लिए सोची समझी रणनीति से काम लेना होगा। आधे-अधूरे मन से काम नहीं चलेगा। इस्लामिक स्टेट (आईएस) सारे मुसलमानों को ना सही, लेकिन जिन थोड़े-बहुत मुसलमानों को अपनी गिरफ्त में लेने में कामयाब हुए हैं, उसकी बदौलत वो दुनिया में कई जगह चरमपंथी वारदातों को अंजाम देने में कामयाब हो रहा है। इसकी वजह से खुद मुसलमानों को बहुत नुकसान हो रहा है। चरमपंथ की वजह से दुनिया में मारे गए लोगों में मुसलमानों की संख्या ही सबसे ज्यादा है।
अमेरीका जैसी अंतर्राष्ट्रीय ताकतों को इसमें पूरे मन से दिलचस्पी लेनी होगी, नहीं तो दुनिया के कई हिस्सों में चरमपंथ के जजीरे (टापू) बन जाएंगे और इससे चरमपंथ पूरी दुनिया में फैलेगा। दो जंग लड़ने के बाद अमरीका ने सबक लिया कि खुद सामने से जाकर भिड़ने की जगह संबंधित देशों की नीतियों को बदला जाए। लेकिन अगले कुछ सालों में यह भी बदल सकती है क्योंकि इस नीति का कोई बहुत अच्छा नतीजा नहीं निकला है। अमरीका पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों की नीतियों में कोई खास बदलाव नहीं ला सका है।
इसलिए मेरे ख्याल से अब एक नई सोच सामने आएंगी जिसमें दोनों चीजों का समन्वय होगा, कि कैसे संबंधित देशों की नीतियों को बदला जाए और कैसे सीधे तौर पर चरमपंथियों से निपटा जाए। चरमपंथ की वजह से दुनिया में कई जगह मुसलमानों को लेकर एक नापसंद करने का रवैया कई लोगों में देखा गया है। इसकी आड़ में कुछ लोग इस्लाम के खिलाफ प्रौपेगेंडा करने में भी कामयाब हो गए हैं। 9/11 के बाद इस्लामोफोबिया पूरी दुनिया में बढ़ गया है लेकिन इस्लामोफोबिया और इस्लामी चरमपंथ दोनों का मुकाबला एक साथ करना होगा। इसमें कई साल लग सकते हैं।
इसके लिए सोच-समझ और एक पूरी योजना की जरूरत है जो कि अभी शुरू हुई है, मुकम्मल नहीं हुई। जहां तक सिर्फ़ खुद को सुरक्षित करने की बात है, तो अमरीका में कुछ लोगों का मानना है कि अमरीका का पहला काम खुद को सुरक्षित करना है, ना कि पूरी दुनिया का चौकीदार बनना। जबकि कुछ लोग यह मानते हैं कि जब तक पूरी दुनिया सुरक्षित नहीं होगी, तो अमरीका अकेले कैसे सुरक्षित रहेगा।
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