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सीरिया पर बढ़ता टकराव, चिंता का विषय

अमेरिका अपने सहयागियों नाटो राष्ट्रों के साथ मिलकर सीरिया की बशर-अल-असद हुकूमत को उखाड़ फेंकने की जुगत में विगत अनेक वर्षों से जुटा हुआ है।

सीरिया पर बढ़ता टकराव, चिंता का विषय
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अमेरिका के युद्धपोतों द्वारा सात अप्रैल को प्रातःकाल तीन बजकर पैंतालिस मिनट पर सीरिया के एयरफोर्स बेस पर करीब साठ मिसाइलें दागी गईं हैं, जिसकी जबरदस्त अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया हुई है। रूस की पहल पर संयुक्त राष्ट्र की सिक्योरिटी काउंसिल की आपातकाल बैठक की गई है।

यूएन में रूस के कूटनीतिक प्रतिनिधि ने अमेरिका के युद्धपोतों द्वारा पर सार्वभौमिक राष्ट्र सीरिया की प्रभुसत्ता का उल्लंघन करके उस पर बर्बर हमले का आरोप लगाया है।

उल्लेखनीय है कि की बशर-अल-असद हुकूमत पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि सीरिया के एयरबेस पर रासायनिक हथियारों से लदे हुए फाइटर विमान खड़े हुए थे।

इससे पहले अमेरिका का हुकूमत ने सीरिया की सरकार पर इल्जाम आयद किया था कि उसने बर्बर तरीके से रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करके करीब सौ बेगुनाह नागरिकों को हलाक कर दिया था।

मार-ए-लागो रिजार्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने बयान जारी किया कि उन्होंने स्वयं ही सीरिया के एयरबेस को निशाना बनाकर मिसाइलें दागने का हुक्म दिया था।

मार-ए-लागो रिजार्ट में ही डोनॉल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी से मुलाकात की थी। अपने चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने कहा था कि वह सैद्धांतिक तौर पर सीरिया की असद हुकूमत के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई में अमेरिका की भागीदारी करने के खिलाफ हैं। सीरिया की असद हुकूमत पर अमेरिका के राष्ट्रपति के रुख में नाटकीय परिवर्तन आ चुका है।

अमेरिका अपने सहयागियों नाटो राष्ट्रों के साथ मिलकर सीरिया की बशर-अल-असद हुकूमत को उखाड़ फेंकने की जुगत में विगत अनेक वर्षों से जुटा हुआ है। इसके लिए मुजाहिद तंजीम अलनुसरा को खरबों डॉलर के हथियार उपलब्ध कराए गए, जो बगदादी के संगठन आाईएस के हाथों में पंहुच गए।

असद हुकूमत को रूस, चीन और ईरान आदि देशों का प्रत्यत्क्ष समर्थन हासिल रहा है। प्रारंभ में प्रतीत हो रहा था कि असद का राजनीतिक हश्र भी इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन, मिस्र के तानाशाह हुस्नी मुबारक और लीबिया के कर्नल गद्दाफी जैसा ही होगा, किंतु आश्चर्यजनक तौर पर असद इस क्रम में अभी तक अपवाद सिद्ध हुए हैं।

सीरिया के गृहयुद्ध में अभी तक करीब तीन लाख लोग मारे जा चुके हैं। सीरिया में साल 2000 में सत्तानशीन हुए राष्ट्रपति बशर-अल-असद की हुकूमत के विरुद्ध 2011 से अलकायदा से संबंधित और वहाबी विचारधारा से प्रेरित अलनुसरा और आईएस के जेहादियों का सशस्त्र संग्राम निरंतर जारी रहा है।

जिस आईएस ने जब इराक में अपनी फतह के झंडे गाड़ दिए थे, उसी वक्त उसके दहशतगर्दों को सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की फौज के हाथों जबरदस्त शिकस्त का सामना करना पड़ा है।

सीरिया की जंग में आईएस के विरुद्ध ब्लादिर पुतिन के नेतृत्व में रूस के खुलकर उतर आने से हालात में बहुत तेजी से असद हुकूमत के पक्ष में तब्दीली आ गई है।

यह स्थिति यकीनन अमेरिका और नॉटो राष्ट्रों को रास नहीं आई है। अतः बेबुनियाद आरोप लगाकर अमेरिका सद्दाम हुसैन की तरह ही असद की हुकूमत का खात्मा करने पर आमादा है, किंतु अब विश्व की स्थिति बदल चुकी है।

रूस फिर से शक्तिशाली हो उठा है और चीन का समर्थन प्राप्त है। अमेरिका एक ध्रवीय शक्ति नहीं है वरना रूस और चीन की संयुक्त सैन्य शक्ति अमेरिका और नॉटो राष्ट्रों के मुकाबले की है। ऐसे में क्या विश्व एक महायुद्ध की ओर कदम बढ़ा रहा है।

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