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मोदी की लोकप्रियता का अब अमेरिका भी कायल

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के प्रति अमेरिकी कॉरपोरेट जगत, सीनेटर और वहां के आधिकारियों का नजरिया तेजी से बदल रहा है।

मोदी की लोकप्रियता का अब अमेरिका भी कायल
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के प्रति अमेरिकी कॉरपोरेट जगत, सीनेटर और वहां के आधिकारियों का नजरिया तेजी से बदल रहा है,तो इसकी वजह उनकी बढ़ती लोकप्रियता ही है।अमेरिका के इस रुख को आगामी लोकसभा चुनाव में यूपीए सरकार की वापसी की कम होती संभावनाओं और नरेंद्र मोदी के अहम किरदाररूप में उभरने के तौर पर भी देखा जा सकता है। अमेरिकी राजनीति में मोदी को लेकर किस तरह मतभेदों को भुलाया जा रहा है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि रिपब्लिकन सांसदों ने उनको कैपिटल हिल में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक समारोह को सैटेलाइट से संबोधित करने का निमंत्रण दिया है। अमेरिका की तरह कभी ब्रिटेन भी नरेंद्र मोदी के पूर्वाग्रह का शिकार था, लेकिन गुजरात में उनकी तीसरी बार जीत के साथ ही यह खत्म हो गया और ब्रिटेन के अधिकारियों ने उनके साथ काम करने की इच्छा जाताई। हाल ही में गोल्डमन सैक्स की रिपोर्ट आई है, जिसमें नरेंद्र मोदी की छवि को अलग अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि यह कोई पहली रिपोर्ट नहीं है। अमेरिका में इससे पूर्व भी कई अलग-अलग रिपोटरें में मोदी की राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ते कद के बारे में बात की जाती रही है। यह दिखाता हैकि अंतरराष्ट्रीय जगत में भी मोदी की स्वीकारोक्ति तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी विशेषज्ञ पहले से ही कहते रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी की सत्ता में लौटने की संभावनाएं तेजी से गिर रही हैं। यही वजह है कि मोदी को लेकर पिछले एक वर्ष में अमेरिका के रुख में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण बना हैकि एक सितंबर 2012 को आई यूएस कांग्रेस के इंडिपेंडेंट रिसर्च विंग ‘यूएस कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस’ की रिपोर्ट, जिसमें प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा के आगामी लोकसभा चुनाव में दोबारा लय में लौटने की संभावना जताई गई थी। रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया था कि जिन नरेंद्र मोदी को वीजा देने से इनकार किया गया था, वह भारत के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। अमेरिका ही नहीं भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर देश में भी उनके विरोधियों के बीच खलबली मची हुई है। वे भी मोदी की लोकप्रियता का बखान गाहेबगाहे करते रहे हैं। चुनावी सभाओं में इसका खौफ भी विरोधी दलों में साफ झलक रहा है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गोवा के पणजी में प्रेस कांफ्रैंस में स्वीकार किया है कि मोदी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती हैं। इससे पूर्व भी वे मान चुके हैं कि युवाओं में उनका क्रेज बढ़ रहा है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि नरेंद्र मोदी की अनदेखी करना भयंकर भूल होगी। 27 अक्तूबर को नरेन्द्र मोदी की पटना में रैली से पूर्वराष्ट्रपति का दो दिन का कार्यक्रम था, लेकिन रैली को देखते हुए राष्ट्रपति ने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया था। ये सब घटनाएं दिखाती हैं कि नरेंद्र मोदी को लेकर हर स्तर पर किस तरह के संकेत मिलने शुरू हो चुके हैं। अब अमेरिका से आ रही इस खबर के बाद कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया होती है, यह देखना भी कम दिलचस्प नहीं होगा।

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