Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

लॉकडाउन पर डॉ. मोनिका शर्मा का लेख: रिश्तों की भी परीक्षा

विशेषज्ञों ने कोरोना की महामारी के सामाजिक असर को लेकर भी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अतिरिक्त तनाव या भय से घरों में अत्याचार की तीव्रता बढ़ जाती है। ऐसे में महिलाओं और बच्चों के लिए यह समय बेहद मुश्किलों भरा साबित हो रहा है।

लॉकडाउन पर डॉ. मोनिका शर्मा का लेख: रिश्तों की भी परीक्षा

कोरोना संक्रमण ने महिलाओं के जीवन के कई पहलुओं पर असर डाला है। वायरस के फैलाव को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन ने दुनियाभर में घरेलू हिंसा के आंकड़ों में इजाफा किया है। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया समेत यूरोप के कई देशों में लॉकडाउन का असर घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी के रूप में भी सामने आने लगा है। अमेरिका में डीसी सेफ नामक एक संस्था के अनुसार घरेलू हिंसा से जुड़े शिकायती फोन कॉल की संख्या दोगुनी हो गई है। ऑस्ट्रेलिया में भी घरेलू हिंसा के मामले 40 फीसदी बढ़ गए हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञों ने कोरोना की महामारी के सामाजिक असर को लेकर भी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अतिरिक्त तनाव या भय से घरों में अत्याचार की तीव्रता बढ़ जाती है। ऐसे में महिलाओं और बच्चों के लिए यह समय बेहद मुश्किलों भरा साबित हो रहा है।

हमारे यहां भी इन दिनों कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया है। हाल ही में राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी लॉकडाउन की में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा बढ़ने के मामलों को लेकर ट्वीट किया है। दरअसल परिस्थिजन्य दबाव मानवीय व्यवहार को गहराई से प्रभावित करता है। मौजूदा हालातों में भी कोरोना संक्रमण को लेकर भय, भ्रम और तनाव का परिवेश बना हुआ है। घरों के भीतर सिमटे लोग आर्थिक मंदी से लेकर चिंता में डूबे हुए हैं। दुखद है कि हमेशा की तरह भारत ही नहीं वैश्विक स्तर भी आधी आबादी ही इस बदले हुए सामाजिक-पारिवारिक परिवेश का सबसे ज्यादा शिकार हो रही हैं। ऐसे में इस वैश्विक आपदा में उनकी परेशानियां कई मोर्चों पर बढ़ा दी हैं। गृहिणियां हों या कामकाजी, न केवल उन पर काम का भार बढ़ गया है बल्कि रिश्तों से संयम और सहजता भी खो रही है। व्यस्तता और भागमभाग में बीत रही जिन्दगी में अचानक आया यह ठहराव हमारे घरों के भीतर बहुत कुछ बदल रहा है। यही वजह है कोरोना वायरस की मार जीवन के लगभग हर पहलू पर दिख रही है। आर्थिक ही नहीं सामाजिक-पारिवारिक मोर्चे पर भी इस संक्रमण के कारण बनीं रहने-जीने की परिस्थितियां गहरा असर डाल रही हैं। एक ओर इस खतरनाक वायरस ने दुनिया भर में हजारों लोगों की जिन्दगी लील ली है तो दूसरी ओर यह वैवाहिक रिश्तों में भी दूरिया ला रहा है। चीन में तो घर में कैद होकर एक-दूजे के साथ समय बिता रहे शादीशुदा दंपतियों के बीच कोरोना वायरस तलाक की वजह तक बन चुका है। गौरतलब है कि चीन के शिचुआन प्रांत में बीते दिनों 300 से ज्यादा दंपतियों ने तलाक की अर्जी दाखिल की थी।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के कहर के कारण भारत समेत दुनिया के कई देशों में सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने के दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। केंद्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने की बात कही है। कई कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से ही काम करने को कहा है। कम से कम घर से बाहर निकलने और सामाजिक मेलजोल कम रखने का उद्देश्य इस वायरस एक फैलाव को रोकने का है। ऐसे में घर के भीतर अपनों के साथ समय बिताना ही एक रास्ता रह गया है। हर उम्र, हर तबके के लोगों के लिए घर से बाहर समय बिताने का विकल्प बंद हो गया है। ध्यान देने वाली बात है कि पहले घर में होने वाली हिंसक प्रताड़ना से बचने के लिए औरतें मायके भी चली जाया करती थीं। इतना ही नहीं सामान्य दिनों में कामकाजी महिलाओं का लंबा समय दफ्तर, सामाजिक मेलजोल और सार्वजनिक स्थलों पर भी गुजरता था। इन दिनों परेशानियां बढ़ गई हैं। नौकरीपेशा की मुश्किलें और ज्यादा हैं। वर्क फ्रॉम होम करते हुए उन्हें घर के कामकाज भी देखने पड़ रहे हैं। ऐसे में आपसी संबधों में तकरार और उलझनों के नए समीकरण बन रहे हैं।



कोई हैरानी नहीं कि विपत्ति के समय में भी हर पल साथ रहना, रिश्तों में पल रही दूरियां सामने ले आया है। हालिया सालों में दुनियाभर में पारिवारिक-सामाजिक मोर्चे पर अपनों को धैर्य से सुनने और समझने का व्यवहार गुम हुआ है। स्मार्ट गैजेट्स की व्यस्तता में साथ होकर भी अकेले रहने की आदत बन चुकी है। टेलीकॉम कंपनी इटालिया एसपीए के अनुसार इस दौरान देश में इंटरनेट कनेक्शन की मांग में बढ़ोतरी हुई है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते आइसोलेशन के कारण इटली के लोग भी अपने घरों में कैद हैं। अधिकतर लोग ऑनलाइन गेम्स के जरिए अपना समय बिता रहे हैं। यानी तकलीफदेह हालातों में भी अपनों के साथ कम और इन्टरनेट पर ज्यादा समय बीत रहा है। दरअसल, ऐसी स्थितियां चौंकाने वाली जरूर हैं पर आज के रिश्तों का कटु सच भी लिए हैं। हालिया बरसों में साथ रहते हुए भी संबंधों में खालीपन बढ़ा है। जीवनभर के साथ वाले शादी के रिश्ते में एक दूजे को समझने और साथ देने का भाव कम हुआ है। ऐसे में परिस्थितिवश जब समय साथ बिताया जाता है, तब भी भावनात्मक जुड़ाव के बजाए शिकायतें और व्यवहार की आक्रामता ज्यादा सामने आती है। कहना गलत नहीं होगा कि लॉकडाउन का दौर पारिवारिक रिश्तों में संयम और साथ की परीक्षा भी है।

Next Story
Top