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मशहूर व्यंगकार आलोक पुराणिक का व्यंग - पीएम ही पीएम मिल तो लें

जनता परिवार को ऐसी राजनीतिक पार्टी के तौर पर चिह्न्ति किया जा सकता है, जिसमें सबसे ज्यादा पीएम मटिरियल टाइप नेता हैं।

मशहूर व्यंगकार आलोक पुराणिक का व्यंग - पीएम ही पीएम मिल तो लें
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रिश्ते ही रिश्ते मिल लें, यह नारा हुआ करता था, दिल्ली करोलबाग के एक शादी-जोड़क कारोबारी का। मिल तो लें, रिश्ते ही रिश्ते हैं। हाल में जनता-परिवार के विलय, मिलन पर जो फोटुएं छपीं मीडिया में, उन्हें देखकर यह नारा खुद-ब-खुद बदल कर हो जाएगा-पीएम ही पीएम मिल तो लें। जनता परिवार में पीएम ही पीएम हैं। जनता परिवार को ऐसी राजनीतिक पार्टी के तौर पर चिह्न्ति किया जा सकता है, जिसमें सबसे ज्यादा पीएम मटिरियल टाइप नेता हैं।

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देवेगौड़ाजी तो बाकायदा पीएम रह चुके हैं इस मुल्क के, वह भूतपूर्व पीएम हैं। जो भूतपूर्व पीएम नहीं हैं, उन सबको यकीन है कि एक बार मौका मिलने पर वो देश के अभूतपूर्व पीएम होंगे। मुलायम सिंहजी तो ना जाने कब से पीएम मटिरियल हैं। यह बात अगर खुल कर कह दी जाए, तो लालूजी बुरा मान सकते हैं, वो भी पीएम मटिरियल हैं, अगर वह ना बन पाएं, तो उनके परिवार में से किसी एक को या बारी-बारी से सबको पीएम बनाना जनता परिवार की जिम्मेदारी है।

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यह बात अगर लालूजी जोर से कह दें, तो नीतीश कुमारजी बुरा मान सकते हैं। नीतीशजी का तो झगड़ा बीजेपी से इस बात पर हुआ था कि वह खुद को पीएम मटिरियल माने बैठे थे कि बीजेपी ने मोदी को अपना पीएम घोषित कर दिया। यह बात नीतीशजी बहुत जोर से नहीं कहते कि शरद यादवजी बुरा ना मान जाएं, शरद यादवजी तो पीएम मटिरियल हैं, ऐसा वह खुद बरसों से मानते रहे हैं।

जनता परिवार की मजबूती का आलम यह है कि एक परिवार और पीएम पोस्ट के आधा दर्जन उम्मीदवार, दो-तीन राज्यों में सिमटी किसी भी पार्टी के पास इतने भूतपूर्व और भावी पीएम ना होंगे, इसलिए जनता परिवार को बहुत मजबूत दल माना जाना चाहिए। और यह सब तब, जबकि पीएम पोस्ट अभी चार साल खाली नहीं है। हां बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। तो इत्ते सारे पीएम बिहार पर ही मार मचानेवाले हैं। खैर, नीतीशजी का हाल इस मेधावी बालक-सा हो गया है जो तैयारी तो करता है। आईएएस के लिए पर बाद में परिस्थितियों के दबाव में राज्य स्तरीय परीक्षाएं पास कर तहसीलदारी तक पर एडजस्ट करने के तैयार हो जाता है।

पर यहां भी पता चलता है कि तहसीलदारी भी इत्ती आसान ना है। जनता परिवार के कई नेताओं के परिवारी भी तहसीलदारी के लिए मार मचा रहे हैं। बिहार की जनता पर अभूतपूर्व दायित्व है, कई भूतपूर्व-संभावित पीएम उसकी ओर ताक रहे हैं। जनता परिवार में कच-कच ना हो, इसके लिए बिहार बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अगर जनता परिवार सत्ता में आए, जैसे नीतीशजी अगर बिहार में सरकार बनाएं, तो खुद को मुख्यमंत्री के बजाय बिहार का प्रधानमंत्री घोषित कर दें।

मुलायम सिंहजी को पदेन प्रधानमंत्री घोषित किया जाए, लालूजी को लगभग प्रधानमंत्री घोषित किया जाए। मुलायम सिंहजी और लालूजी के एक-एक बेटे को उप-प्रधानमंत्री घोषित किया जाना तो बनता है। शरद यादवजी मार्गदर्शक-प्रधानमंत्री घोषित हों। शरद यादवजी जनता-परिवार की पॉलिटिक्स में मार्गदर्शक गति की ओर बढ़ रहे हैं।

पहले अपने जनता दल के अध्यक्ष थे शरदजी। अब वह पद मुलायम सिंहजी के पास चला गया। खैर, अब मुझे उन विद्वानों के सवाल का जवाब मिल गया, जो कहते हैं कि भारत में नेतृत्व-क्षमता की भारी कमी है। अब ऐसे सारे सवाल-पूछकों के लिए मैंने जनता-परिवार का फोटो रख लिया है जो चीख-चीखकर कहता है-पीएम ही पीएम, मिल तो लें।

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