Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

जीएसटी दरों से सभी वर्गों को राहत मिलेगी

यदि एक जुलाई से जीएसटी लागू हो जाता है तो देश की जनता को अप्रत्यक्ष टैक्स की पेचीदगियों से मुक्ति मिलेगी।

जीएसटी दरों से सभी वर्गों को राहत मिलेगी

सरकार जीएसटी लागू करने के अंतिम चरण में पहुंच गई लगती है। सबसे पेचीदा काम वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स की दरें तय करना था। आखिरकार सरकार ने 1200 से अधिक वस्तुओं व सेवाओं पर टैक्स की दरें तय कर दीं।

सरकार ने जीएसटी के लिए टैक्स की चार दरें तय की थीं। पांच फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी। पहले कहा जा रहा था कि अधिकतम टैक्स 18 फीसदी के करीब रहेगा, लेकिन दरें तय करते वक्त सरकार ने अधिकतम टैक्स 28 फीसदी तय किया। इसकी आलोचना भी हुई।

कश्मीर में वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की हुई दो दिवसीय बैठक में 1211 वस्तुओं पर तय की टैक्स दरें की खास बात है कि सरकार ने रोजमर्रा की वस्तुओं व सेवाओं को या तो कर के दायरे से बाहर रखा है, या फिर पांच फीसदी के दायरे में रखा है।

मोदी सरकार की कोशिश भी है कि गरीब व मध्यवर्ग को अधिक राहत पहुंचाई जाए। इससे अर्थव्यवस्था को दोहरा लाभ होगा। महंगाई को काबू करने में मदद मिलेगी और खपत भी बढ़ेगी। खपत बढ़ेगी, तो जहां उत्पादन बढ़ेगा, वहीं करों की वसूली भी बढ़ेगी।

शून्य टैक्स या पांच फीसदी टैक्स दायरे में आने वाले सभी तबके के प्रयोग की वस्तुओं पर जीएसटी की दरें तय करते वक्त सरकार ने निश्चित ही आम आदमी और विकास को ध्यान में रखा है। सोने समेत दो से तीन कैटेगरी की वस्तुओं व सेवाओं पर कर की दरें जीएसटी परिषद की तीन जून को होने वाली अगली बैठक में तय कर दी जाएंगी।

जीएसटी से लगभग 20 तरह के अप्रत्यक्ष टैक्स खत्म हो जाएंगे। मेक इन इंडिया मुहिम को सबसे अधिक लाभ होगा। कारण रॉ मैटेरियल पर देशभर में एक प्रकार की कर दरें होंगी। इससे औद्योगिकीकरण में पिछड़े बिहार, उत्तर प्रदेश, नॉर्थ-ईस्ट, ओडिशा, बंगाल जैसे राज्यों को अधिक लाभ होगा।

आजादी के बाद भारत का सबसे बड़ा कर सुधार जीएसटी देश के टेढ़ी टैक्स व्यवस्था को पटरी पर लाएगा और लाल फीताशाही को कम करेगा। उच्च कर दरों और लाल फीताशाही के चलते देरी के कारण वर्तमान में कारोबार को 5-10 प्रतिशत का नुकसान होता है। जीएसटी लागू होने के बाद औद्योिगक निवेश में और तेजी आएगी।

चूंकि जीएसटी के तहत देश में उत्पादन और खपत की कड़ी में अंतिम छोर पर कर लगाया जाएगा, तो इससे खपत वाले राज्यों को अधिक लाभ होगा। अभी देश जिन राज्यों में उद्योग हैं, वहां सामान के बनने के तुरंत बाद ही टैक्स लगा दिया जाता है, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स वो राज्य सरकारें वसूलेंगी जहां उत्पाद की खपत होती है।

इससे उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अधिक उपभोक्ताओं वाले राज्यों का कर राजस्व बढ़ेगा। जीएसटी में कर के अधीन वस्तुओं का दायरा बढ़ाया गया है, इससे टैक्स राजस्व अधिक मिलेगा।

एक और अहम बात है कि राज्य सरकारों के राजस्व के लिए अहम माने जाने वाले ईंधन-पेट्रोल व डीजल, रीयल एस्टेट और आबकारी विभाग जीएसटी से अलग हैं, यानी राज्यों के मूल कर राजस्व पर अधिक असर नहीं पड़ेगा।

जीएसटी की यह व्यापकता ही है कि विश्व बैंक इसे भारत के लिए गेम चेंजिंग टैक्स रिफॉर्म मानता है। शिक्षा और स्वास्थ्य को कर दायरे से बाहर रखना संकेत देता है कि सरकार इन दोनों क्षेत्रों में व्यापक प्रगति चाहती है।

यदि एक जुलाई से जीएसटी लागू हो जाता है तो देश की जनता को अप्रत्यक्ष टैक्स की पेचीदगियों से मुक्ति मिलेगी। जीएसटी के बाद केंद्र सरकार को प्रत्यक्ष करों में सुधार करना चाहिए।

Next Story
Top