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अलका आर्य का लेख: नर्सों की कमी से जूझता विश्व

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रहे हमलों की निंदा की है और दुनिया को स्वस्थ रखने में उनके योगदान के महत्व को समझने की अपील की है।

अलका आर्य का लेख: नर्सों की कमी से जूझता विश्व

अलका आर्य

कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं में सबसे पहले स्वास्थ्य के पेशे से जुड़े कर्मचारियों की हौसला अफजाई के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने की दरकार है, समाज को इस संकट के समय यह याद रखना चाहिए कि इस जंग को जीतने के लिए चिकित्सकों, नर्सों की जरूरत सबसे अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रहे हमलों की निंदा की है और दुनिया को स्वस्थ रखने में उनके योगदान के महत्व को समझने की अपील की है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि 7 अप्रैल को प्रत्येक वर्ष विश्वभर में मनाए जाने वाले विश्व स्वास्थ्य दिवस की इस बार टैग लाइन 'स्ापोर्ट द नर्सेस एंड मिडवाइफ' थी। विश्वभर में इस समय डाक्टर, नर्स अपने परिवार को भूलकर मानवजाति ें कल्याण और उनको कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में नर्सों को अहम कड़ी के रूप में स्वीकारते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में विश्व में इनकी स्थिति पर द स्टेट आॅफ द वल्डर्स नर्सिंग 2020 रिपोर्ट जारी की है। यह अपनी तरह की पहली रिपोर्ट है। इसके साथ यह भी याद रखना होगा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन 2020 को अंतरराष्ट्रीय नर्स व मिडवाइफ वर्ष के तौर पर मना रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में 60 लाख नर्सों की कमी है और अगर विश्व को 2030 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को हासिल करना है तो नर्सों व मिडवाइफ की भर्ती, उन्हें प्रशिक्षित करने व उनके लिए ढांचागत सुविधाएं मुहैया कराने, उनके वेतन में वृद्धि करने व उन्हें सुरक्षित माहौल देने आदि के लिए राष्ट्रों को निवेश करना होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रस एडहोनन का कहना है कि नर्सें व मिडवाइफ प्रत्येक स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ की हड्डी हैं और 2020 में हम हर राष्ट्र से नर्सों व मिडवाइफ पर निवेश करने का आह्वान कर रहे हैं, यह सभी के लिए स्वास्थ्य के प्रति की गई उनकी प्रतिबद्वता का हिस्सा है।

गौरतलब है कि 2015 में अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने टिकाऊ विकास लक्ष्य यानी एसडीजी को 2030 तक हासिल करने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी। सभी के लिए स्वास्थ्य भी टिकाऊ विकास लक्ष्य की सूची में शामिल है। यही नहीं नर्सों की शिक्षा, नौकरी और उनके नेतृत्व में निवेश करने से केवल स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्य को ही हासिल करना नहीं होगा बल्कि यह शिक्षा संबंधी टिकाऊ विकास लक्ष्य 4, लैंगिक संबंधी टिकाऊ विकास लक्ष्य 5, गरिमापूर्वक कार्य और आर्थिक वृद्धि संबंधी टिकाऊ विकास लक्ष्य को भी हासिल करने में योगदान देगा। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन, इंटरनेशनल कौंसिल आफ नर्सेस और नर्सिंग नाऊ के द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट दुनियाभर में नर्सों व मिडवाइफ की जरूरत, जरूरत के अनुपात में उनकी कम संख्या, निम्न आय वाले देशों में उनकी कमी, नर्स व मिडवाइफ की चुनौतियों सरीखे अहम बिंदुओं के साथ-साथ इन सब के समाधान पर भी बात करती है। विश्व के स्वास्थ्य कर्मियों की कुल तादाद में नर्सों की संख्या अंदाजन 59 प्रतिशत है। दुनियाभर में 27.9 मिलियन नर्स कार्यबल है, जिसमें 19.3 मिलियन पेशेवर नर्स हैं। 2030 तक विश्व को करीब 60 लाख नर्सों की जरूरत होगी।

इस कोविड-19 महामारी के दौर में नर्सों की कमी विशेष तौर पर दुनियाभर में महसूस की जा रही है। कोरोना वायरस नामक इस जानलेवा महामारी ने कई मुल्कों में चिकित्सकों, नर्सों की भी जान ले ली है और कई स्वास्थ्यकर्मी इस समय कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। उनकी जिंदगी पर जो खतरा मंडरा रहा है, उससे टिकाऊ विकास लक्ष्य (एसडीजी) भी प्रभावित हो सकते हैं। विश्वभर में 80 प्रतिशत नर्सें विश्व की 50 प्रतिशत आबादी को सर्व करती हैं। नर्सों का वितरण भी असमान है। यह सभी के लिए चिंता का विषय है। अफ्रीका और कुछ अमेरिकी मुल्कों में नर्सों की बहुत कमी है। दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्वी मध्य क्षेत्र में मांग व आपूर्ति के बीच बहुत बड़ा फासला है। जरूरत के अनुपात में वहां नर्सें बहुत बड़ी संख्या में कम हैं।

भारत की बात करें तो इस मुल्क में प्रति हजार की आबादी पर 1.7 नर्स है, जोकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से काफी कम है। पूरे भारत में 3.07 पंजीकृत नर्स हैं, इसकी जानकारी सरकार ने 3 मार्च 2020 को राज्यसभा में दी थी। गांवों में जहां करीब 65 प्रतिशत आबादी बसती है, वहां तो नर्सों की बहुत ही कमी है। एक तरफ आने वाले समय में 2030 तक सब के लिए स्वास्थ्य वाले एसडीजी को हासिल करने के वास्ते दुनिया में करीब 60 लाख नर्सों की जरूरत है, वहीं यह रिपोर्ट इस बाबत चेताती भी है कि आने वाले सालों में नर्सों की उपलब्धता वाली स्थिति और खराब हो सकती है, क्योंकि दुनियाभर में नर्स स्टाफ की सबसे अधिक सप्लाई करने वाले दो मुल्कों फिलीपींस व भारत ने ऐसे संकेत दिए हैं। इन दोनों मुल्कों की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा खुद ही नर्सों की कमी से जूझ रही है।

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