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अगस्ता-वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले का सटीक विश्लेषण

अगस्ता-वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले (Agusta-Westland VVIP helicopter case ) में बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने ‘श्रीमती गांधी'' का नाम लेने के बाद यह बात महत्वपूर्ण हो गई है कि इस सौदे में बड़े नाम शामिल हो सकते हैं और इसलिए इसकी गहराई से जांच जरूरी हो गई है।

अगस्ता-वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले का सटीक विश्लेषण

अगस्ता-वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले (Agusta-Westland VVIP helicopter case ) में बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने ‘श्रीमती गांधी' का नाम लेने के बाद यह बात महत्वपूर्ण हो गई है कि इस सौदे में बड़े नाम शामिल हो सकते हैं और इसलिए इसकी गहराई से जांच जरूरी हो गई है।

ईडी ने दिल्ली की पटियाला कोर्ट में मिशेल से पूछताछ का ब्यौरा दिया है, जिसमें कहा गया है कि मिशेल ने कहा कि वह श्रीमती गांधी के संपर्क में था, ईडी ने कहा कि लेकिन उसने यह नाम किस संदर्भ में लिया यह अभी हम नहीं कह सकते। ईडी के मुताबिक मिशेल ने बताया कि ‘इतालवी महिला का बेटा' किस तरह भारत का प्रधानमंत्री बनेगा।

मिशेल दूसरे लोगों से बातचीत के दौरान किसी बड़े आदमी को ‘आर' कहकर बुलाता था। उसने अपने वकील के जरिये अगस्ता वेस्टलैंड से बात की, जिसमें उसने बार-बार ‘आर' का जिक्र किया। चूंकि अगस्ता-वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के समय 2010 की फरवरी में हुई थी, जिसमें उस वक्त सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष थीं,

यूपीए की चेयरपर्सन भी थीं और सलाहकार समिति की प्रमुख भी थीं, इस नाते सरकार में उनका खासा दखल था, इसलिए जब इस सौदे में बिचौलिये की भूमिका निभाने वाला आरोपित शख्स ‘श्रीमती गांधी' का नाम लेता है तो उस वक्त सत्ता के शक्ति केंद्र रहे दस जनपथ की ओर संदेह की उंगली उठती है। मिशेल के ‘आर' का इशारा किस तरफ है, क्या उस ‘आर' का आशय राहुल गांधी तो नहीं है,

आदि अनेक प्रश्न हैं, जिनके जवाब ईडी को ढूंढ़ना चाहिए। करीब 4 लाख करोड़ रुपये के इस हेलीकॉप्टर डील में 3600 करोड़ से अधिक दलाली देने का मामला सामने आया था। आरोपों के मुताबिक, यह दलाली तब की सरकार में इस डील में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों को दिए जाने की बात कही जा रही है।

यह किसी से छिपा नहीं है कि डा. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए की दस साल की सरकार में दस जनपथ मुख्य केंद्र में था और सरकार की अधिकतम फाइलें कथित तौर पर वहां से गुजरती थीं। यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार के अनेक आरोप भी लगे। टूजी, कोलगेट, आदर्श, राष्ट्रमंडल आदि बड़े घोटाले यूपीए के दौरान ही सामने आए।

अब 225 करोड़ रुपये दलाली लेने के आरोपित मिशेल के ‘श्रीमती गांधी' व ‘आर' कहने के बाद जिस तरह की संदेहास्पद परिस्थतियां उत्पन्न हुई हैं, उसमें दूध का दूध और पानी का पानी होना जरूरी है। कांग्रेस की तरफ से बेशक सफाई दी जा रही हो और ईडी के दावों को खारिज करने की कोशिश की जा रही हो,

लेकिन अगर धुआं उठा है तो कहीं न कहीं तो आग जली ही होगी। पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से ही कांग्रेस सरकारों का दामन भ्रष्टाचार से दागदार रहा है, बार-बार कांग्रेस सरकारों में कदाचार के छींटे पड़े हैं, ऐसे में ईडी पर गंभीर दायित्व है कि वह मिशेल के दावों की जांच करे और सत्य की तह तक जाए।

देश को सच जानने का हक है। बैक डोर से सत्ता को नियंत्रित करने व कदाचार करने का हक किसी को नहीं है। ऐसे लोग आवाम के सामने बेनकाब होना ही चाहिए। कांग्रेस समेत पहले की किसी भी सरकार ने डिफेंस डील को पारदर्शी नहीं बना सकी। आज जरूरत डिफेंस डील की प्रक्रिया को शीशे की तरह पारदर्शी बनाने की है।

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