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जयंतिलाल भंडारी का लेख : कोविड में बढ़ा कृषि निर्यात

कोविड-19 की चुनौतियों (challenges) के बीच देश से कृषि निर्यात तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। स्पाइसेस बोर्ड के मुताबिक भारत से अप्रैल-जुलाई 2020 के बीच 7760 करोड़ रुपये मूल्य के मसालों का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष 2019 में इसी अवधि में 7028 करोड़ रुपये मूल्य के मसालों का निर्यात किया गया था। कोरोना (Corona) महामारी के बीच इम्युनिटी बढ़ाने वाले अदरक, हल्दी जैसे मसालों का निर्यात छलांगें लगा रहा है।

जयंतिलाल भंडारी का लेख : कोविड में बढ़ा कृषि निर्यात
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कोविड-19 की चुनौतियों के बीच देश से कृषि निर्यात तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture) द्वारा जारी रिपोर्ट 2020 के अनुसार इस वर्ष मार्च से जून 2020 के दौरान कृषि निर्यात करीब 23 प्रतिशत बढ़कर 25,552 करोड़ रुपये रहा, पहले वर्ष 2019 में इसी अवधि में कृषि निर्यात 20,734 करोड़ रुपये का रहा था।

इसी तरह स्पाइसेस बोर्ड के मुताबिक भारत से अप्रैल-जुलाई 2020 के बीच 7760 करोड़ रुपये मूल्य के मसालों का निर्यात हुआ। जबकि पिछले वर्ष 2019 में इसी अवधि में 7028 करोड़ रुपये मूल्य के मसालों का निर्यात किया गया था। कोरोना महामारी के बीच इम्युनिटी बढ़ाने वाले अदरक, हल्दी जैसे मसालों का निर्यात छलांगे लगा रहा है।

केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक कृषि निर्यात भारत के लिए चमकीली संभावनाओं (possibilities) का क्षेत्र है, अत: शीर्ष कृषि निर्यातक देश बनने की संभावनाओं को साकार करने के रणनीतिक प्रयत्न किए जा रहे हैं।

पिछले वर्ष 2019-20 में देश का कृषि निर्यात 30 अरब डॉलर से अधिक रहा है, लेकिन सरकार ने 2022 तक कृषि उत्पादों का निर्यात 60 अरब डॉलर करने का जो लक्ष्य रखा है उसे पूरा करने के लिए कृषि मंत्रालय ने व्यापक कार्य योजना तैयार की। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये की जिस वित्तपोषण सुविधा को लॉन्च किया है, उससे कृषि निर्यात बढ़ सकेगा। इसके अलावा अब तक शुरू की गई दो किसान ट्रेन भी कृषि निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती दिखती है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019-20 में देश में खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। कोविड-19 के बीच भी कृषि क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन पाया गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच जहां अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं केवल कृषि एकमात्र ऐसा सेक्टर रहा, जिसमें 3.8 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है।

स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि देश से कृषि निर्यात बढ़ने का प्रमुख कारण खाद्यान्न, सब्जियों और फलों का भरपूर उत्पादन रहा, वहीं कोविड-19 के कारण कृषि जिंसों की कमी का सामना कर रहे देशों को प्राथमिकता के साथ कृषि निर्यात बढ़ाया गया। देश से कृषि निर्यात बढ़ने के कई अन्य कारण भी दिखाई दे रहे है। सरकार ने कृषि निर्यात नीति के तहत ज्यादा मूल्य और मूल्यवर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा दिया है।

कृषि निर्यात के प्रक्रिया मध्य खराब होने वाले सामान, बाजार पर नजर रखने और कृषि पदार्थों की साफ-सफाई के मसले पर ध्यान केंद्रित किया है। निर्यात किए जाने वाले कृषि जिंसों के उत्पादन व घरेलू दाम में उतार-चढ़ाव पर लगाम लगाने के लिए कम अवधि के लक्ष्यों तथा किसानों को मूल्य समर्थन मुहैया कराने और घरेलू उद्योग को संरक्षण दिया है। साथ ही राज्यों की कृषि निर्यात में ज्यादा भागीदारी, बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स में सुधार और उत्पादों के विकास में शोध गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया है।

अब कृषि निर्यात को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कृषि उत्पाद केंद्रित निर्यात संवर्धन मंच गठित किए गए हैं। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के अंतर्गत अंगूर, आम, केला, प्याज, चावल, पोषक तत्व वाले अनाज, अनार और फूलों की खेती के लिये ईपीएफ का गठन किया गया है। मौजूदा कृषि-क्लस्टरों को मजबूत करने और थोक मात्रा और आपूर्ति की गुणवत्ता की खाई को पाटने के लिए उत्पाद-विशेष वाले क्लस्टर बनाने पर भी जोर दिया गया है।

लेकिन अभी कृषि निर्यात की भारी संभावनाओं को साकार करने के लिए भारत को बड़े रणनीतिक कदमों की जरूरत है। भारत गेहूं उत्पादन के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है, लेकिन गनिर्यात के लिहाज से 34वें स्थान पर है। इसी प्रकार फलों के मामले में भारत दुनिया में दूसरा सबसे उत्पादक देश है, लेकिन फल निर्यात के मामले में वह 23वें स्थान पर है।

यह समझा जाना होगा कि कृषि निर्यात एक ऐसा महत्वपूर्ण उपाय है जिसके जरिए रोजगार और राष्ट्रीय आय में बढ़ोतरी की जा सकती है। कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए कई और जरूरतों पर ध्यान दिया जाना होगा। इस बात पर ध्यान दिया जाना होगा कि खाद्य निर्यात से संबंधित सबसे बड़ी चुनौती अपर्याप्त परिवहन और भंडारण क्षमता के कारण खेत से खाद्य वस्तुएं निर्यात बाजारों और कारखानों से प्रसंस्कृत वस्तुएं विदेशी उपभोक्ता तक पहुंचने में बहुत अधिक नुकसान होने से संबंधित है।

कृषि निर्यात से संबंधित नई तकनीक व प्रक्रियाओं, सुरक्षा और पैकेजिंग की नियामकीय व्यवस्था संबंधी कमी तथा कुशल श्रमिकों की कमी भी खाद्य निर्यात को प्रभावित कर रही है। निर्यात की जा रही कृषि मदों पर गैर-शुल्क बाधाएं, गुणवत्ता सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे अमरीकी और यूरोपीय संघ जैसे बाजारों में खाद्य उत्पादों के निर्यात में बढ़े अवरोधक बने हुए हैं। इन्हें दूर कराने के कारगर प्रयास करने होंगे।

अब कृषि निर्यातकों के हित में मानकों में बदलाव किया जाए जिससे कृषि निर्यातकों को कार्यशील पूंजी आसानी से प्राप्त हो सके। अन्य देशों की मुद्रा के उतार-चढ़ाव, सीमा शुल्क अधिकारियों से निपटने में मुश्किल और सेवा कर जैसे कई मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाना होगा। निर्यात बढ़ाने के लिए चिन्हित फूड पार्क विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाओं, शोध सुविधाओं, परीक्षण प्रयोगशालाओं, विकास केंद्रों और परिवहन लिंकज के साथ मजबूत बनाए जाने होंगे।

बेहतर खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता प्रमाणन व्यवस्था, तकनीकी उन्नयन, लॉजिस्टिक सुधार, पैंकेजिंग गुणवत्ता और ऋण तक आसान पहुंच की मदद से खाद्य निर्यात क्षेत्र में आमूल बदलाव लाया जा सकता है। यह भी जरूरी है कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को पृथक-पृथक राज्य निर्यात नीति तैयार करने को प्रोत्साहित किया जाए। इसके साथ-साथ विगत 31 जुलाई को 15वें वित्त आयोग द्वारा गठित कृषि निर्यात पर उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समूह ने जो सिफारिशें सरकार को सौंपीं हैं, उनका क्रियान्वयन लाभप्रद होगा।

हम उम्मीद करें कि 17 सितंबर को लोकसभा में ऐतिहासिक कृषि सुधारों से संबंधित जो दो विधेयक पारित किए गए हैं, उनसे जहां किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत होगी। वहीं इससे कृषि निर्यात भी तेजी से बढ़ेंगे। सरकार कृषि निर्यात की डगर पर आ रही मुश्किलों का प्राथमिकता से समाधान करेगी।

सरकार द्वारा कृषि निर्यात को बढ़ाने के लिए जो रियायतें व प्रोत्साहन घोषित किए गए हैं वे कारगर तरीके से कृषि निर्यातकों की मुठ्ठियों में पहुंचेगे। सरकार कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए चीन, अमेरिका, बांग्लादेश, थाईलैंड, यूएई, श्रीलंका, यूके, मलेशिया, इंडोनेशिया, जर्मनी, मोस्को, ईरान, पाकिस्तान, यूके तथा यूरोप के विभिन्न देशों में कृषि निर्यात को और अधिक बढ़ाने की रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी।

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