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इंटर बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5: भारत का रक्षा तंत्र हुआ मजबूत, चीन पाकिस्तान परेशान

इंटर बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 के सफल परीक्षण से भारत का रक्षा तंत्र और मजबूत हुआ है। स्वदेश निर्मित यह परमाणु क्षमता वाली जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल 5,000 से 8,000 किलोमीटर तक के दायरे में निशाना साध सकती है।

इंटर बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5: भारत का रक्षा तंत्र हुआ मजबूत, चीन पाकिस्तान परेशान

इंटर बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 के सफल परीक्षण से भारत का रक्षा तंत्र और मजबूत हुआ है। स्वदेश निर्मित यह परमाणु क्षमता वाली जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल 5,000 से 8,000 किलोमीटर तक के दायरे में निशाना साध सकती है। भारत के सामने चीन और पाकिस्तान सबसे बड़ी रक्षा चुनौती है। भारत से अलग होने के समय से ही पाकिस्तान देश की सुरक्षा के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

चीन के साथ दशकों से सीमा विवाद है। हाल में चीन की विस्तारवादी महत्वाकांक्षा ने सीमा विवाद को और हवा दी है। भारत और चीन के बीच करीब 3488 किमी की सीमा है, जिनमें अधिकांश जगहों पर दोनों मुल्कों के बीच विवाद है।

चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक व सामरिक दोस्ती भारत के लिए और भी खतरनाक है। चीन खुद भारत के साथ नहीं उलझकर पाकिस्तान के सहारे भी नुकसान पहुंचा सकता है।

ऐसे में भारत को अपने रक्षा तंत्र को हमेशा मजबूत करते रहना जरूरी है। इस एटमी मिसाइल से भारत चीन के किसी भी हिस्से में टारगेट को भेद सकता है। इस मिसाइल के साथ ही भारत बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस देशों के समूह में शामिल हो गया है।

अभी यह क्षमता अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के ही पास है। अग्नि सीरीज की मिसाइलों को चीन और पाकिस्तान को ध्यान में रखकर जमीन पर मार करने लिए तैयार किया गया है।

भारत ने अग्नि-1, अग्नि-2 और अग्नि-3 मिसाइलों को पाकिस्तान के खिलाफ बनाई गई रणनीति के तहत तैयार किया है, जबकि अग्नि-4 और अग्नि-5 को चीन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है।

अग्नि-5 भारत का अब तक का सबसे तकनीकी रूप से विकसित बैलिस्टिक मिसाइल है। बैलिस्टिक मिसाइल की खासियत होती है कि यह धरती के वायुमंडल से बाहर जा कर एक पैराबोलिक पाथ में जाती है और फिर से धरती के वायुमंडल में आ जाती है।

‘अग्नि-5'सीरीज का यह छठा सफल परीक्षण है। इस सीरीज का पहला परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को, दूसरा 15 सितंबर 2013, तीसरा 31 जनवरी 2015, चौथा 26 दिसंबर 2016 और पांचवा 18 जनवरी 2018 को हुआ था। सभी परीक्षण सफल रहे थे।

इंटर बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 डेढ़ टन एटमी हथियार के साथ सतह से सतह पर 5000 किलोमीटर तक सटीक निशाना साध सकती है। इसकी रेंज में आधी दुनिया है। अमेरिका को छोड़कर पूरा एशिया, अफ्रीका और यूरोप इसके दायरे में हैं।

भारत की इस सबसे ताकतवर मिसाइल की जद में पूरा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, ईरान, करीब आधा यूरोप, चीन, रूस, मलेशिया, इंडोनशिया और फिलीपींस आते हैं। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान और चीन चुप हैं।

वे दोनों भी अपने मिसाइल सिस्टम को मजबूत कर रहे हैं। पाकिस्तान ने जहां बाबर सीरीज की मिसाइल का परीक्षण किया है, पर वह भारत के मुकाबले बहुत पीछे है, वहीं चीन ने इसी साल जनवरी में अपने सबसे आधुनिक हाइपर सोनिक बैलिस्टिक मिसाइल डीएफ-17 का सफल परीक्षण किया है।

हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल हाइपर सोनिक ग्लाइड मिसाइल होती है, जिसमें क्रूज़ और बैलिस्टिक दोनों की ही खूबियां शामिल होती हैं। डीएफ-17 की मारक क्षमता 12 हजार किमी तक है।

यानी भारत समेत पूरा अमेरिका चीनी मिसाइल की जद में है। डीएफ-17 अमेरिका की एंटी मिसाइल थाड सिस्टम को नाकाम करते हुए टारगेट पर भेद्य सकती है। चीन की मिसाइल क्षमता को देखते हुए भारत रूस से एस-400 एंटी मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है।

भारत ने इजराइल से बराक-8 मिसाइल का सौदा भी किया है। भारत ने मिसाइल, टैंक, फाइटर प्लेन और हथियार सभी क्षेत्र में अपने को मजबूत किया है। यूं तो हमारी नीति में युद्ध और आक्रमण नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अग्नि-5 से निश्चित ही भारत चीन और पाक के खतरे से निपटने में सक्षम रहेगा।

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