Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

रेल यात्रियों की सुरक्षा प्रभु भरोसे, सुनिश्चित करनी होगी व्यवस्था

रेल प्रबंधन को सख्त, चुस्त और जवाबदेह बनना होगा।

रेल यात्रियों की सुरक्षा प्रभु भरोसे, सुनिश्चित करनी होगी व्यवस्था
X

देश में बार-बार रेल हादसे भारतीय रेलवे की खामियों की पोल खोलते हैं। एक और रेल दुर्घटना ने साबित किया है कि भारतीय रेल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं है। वह अपने कामकाज के तरीकों में बदलाव नहीं कर रहा है।

यूपी के मुजफ्फरनगर के पास कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के चौदह डिब्बे के पटरी उतरने के पीछे प्रारंभिक कारण सामने आए हैं कि आगे रेल ट्रैक पर मरम्मत का काम चल रहा था और ट्रेन के ड्राइवर को इमरजेंसी ब्रेक लगाना पड़ा, जिससे ये हादसा हुआ।

ट्रैक पर मरम्मत करने वाली टीम का नजदीकी स्टेशन के साथ कोर्डिनेशन नहीं था, जबकि दुर्घटना स्थल खतौली स्टेशन से नजदीक ही है। गाड़ी को हरी झंडी दिलाने वाले स्टेशन मास्टर को पता ही नहीं था कि आगे ट्रैक पर मरम्मत का काम चल रहा है।

इस संचार युग में कम्युनिकेशन गैप के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है। नियम के मुताबिक रेलवे ट्रैक पर जब भी कहीं मरम्मत का काम चलता है तो रिपेयर टीम ट्रैक के दोनों ओर के नजदीकी स्टेशन, स्टॉपेज सिग्नल स्टेशन और एरिया जोन स्टेशन को जानकारी देती है।

मुजफ्फरनगर रेल हादसे में रिपेयर टीम यह गलती कैसे कर सकती है? अभी तो मरम्मत करने वाली टीम की ही लापरवाही सामने आई है। हादसे के सभी पहलू की जांच हो। स्टेशन मास्टर की बात की सच्चाई का पता भी लगाया जाना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: आजादी के 70 साल: बदला है दुनिया का नजरिया

कहां पर कम्युनिकेशन गैप था व इसकी वजह क्या थी? दुर्घटना के शुरू में अनुमान लगाया गया था कि यह आतंकी साजिश हो सकती है और इसकी जांच के लिए यूपी एटीएस टीम भेजी भी गई। लेकिन जल्द ही यूपी सरकार ने साफ कर दिया कि यह आतंकी साजिश नहीं है।

यह रेलवे की अपनी चूक है। चूक भी ऐसी की 23 लोगों की जान ले ली। रेल देश की लाइफलाइन मानी जाती है। रोजाना दो करोड़ से ज्यादा लोग रेल में सफर करते हैं। सैकड़ों गाड़ियां रोज रेल ट्रैक पर दौड़ती हैं। ऐसे में इसकी देखभाल और सुरक्षा भी अहम है। खास कर यात्रियों के जान-माल की सुरक्षा।

लेकिन उत्कल एक्सप्रेस हादसे सहित पांच साल के दौरान देश में 586 रेल दुर्घटनाएं चुकी हैं। इनमें से करीब 53 फीसदी घटनाएं ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण हुई हैं। इससे साफ है कि सरकार किसी की भी हो, रेलवे खामियों और लापरवाहियों का जंक्शन ही बना हुआ है।

रेलवे को पता है सबसे अधिक ट्रेन के पटरी उतरने के चलते रेल हादसे हो रहे हैं, इसके बावजूद वह अपने सिस्टम को फुल प्रूफ नहीं बना रहा है। यह निश्चित ही चिंतनीय है। हम हाई स्पीड ट्रेन, बुलेट ट्रेन, फ्रेट कोरिडोर की योजना बना रहे हैं, जबकि हमारी वर्तमान रेल व्यवस्था रुग्ण है।

हमारे अधिकांश रेलवे ट्रैक पुराने हैं और हाई स्पीड सहन के लायक नहीं है। सिग्नल सिस्टम और गाड़ी संचालन का हमारा तरीका भी बेहद पुराना है। देश की 90 फीसदी से ज्यादा ट्रेनें घंटों देरी से चलती हैं।

इसे भी पढ़ें: भाजपा के आगे सिकुड़ने लगी वाम दलों की राजनीति

हम रेल बजट में सुरक्षा और संरक्षा की कसमें खाते हैं, लेकिन उसे हम जमीन पर नहीं उतारते हैं। आखिर ऐसा कब तक चलेगा। सरकार बदलती है, पर रेलवे की सूरत नहीं बदलती है।

हर हादसे के बाद सरकार, रेलमंत्री, रेल प्रबंधन शाेक प्रकट करते हैं, जांच का आदेश देते हैं और बाद में बदलाव लाने की बात भूला देते हैं। पिछले हादसों के कारणों की जांच के बाद अगर खामियों को दूर करने का प्रयास किया गया होता तो रेलवे में हादसे-दर-हादसे नहीं होते।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु को रेल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। रेलवे में सुधार के साथ बदलाव की जरूरत है। रेल प्रबंधन को सख्त, चुस्त और जवाबदेह बनाने होंगे और उसे यात्रियों की जान की कीमत समझनी होगी।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top