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आतंकवाद व अपराध के खिलाफ कार्रवाई जरूरी

सिमी जैसे कट्टर इस्लामी संगठन राष्ट्र की एकता व अखंडता को घुन की तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं।

आतंकवाद व अपराध के खिलाफ कार्रवाई जरूरी
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भारत को आतंकवाद से जितना खतरा बाहरी ताकतों से है, उतना ही अंदरूनी विघटनकारी कट्टर शक्तियों से भी है। एक तरफ देश पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का सामना कर रहा है, तो दूसरी तरफ प्रतिबंधित सिमी जैसे कट्टर इस्लामी संगठन राष्ट्र की एकता व अखंडता को घुन की तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में भोपाल जेल से भागे सिमी के आठ आतंकियों को एनकाउंटर में मार गिराना मध्य प्रदेश पुलिस की बड़ी सफलता है। जिस तत्परता और मुस्तैदी से एमपी पुलिस ने करीब आठ से नौ घंटे के अंदर भोपाल जेल से फरार हुए आठों कैदियों को ढूंढ़ निकाला और जवाबी मुठभेड़ में मार गिराया, वह काबिलेतारीफ है।
मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने खुद भी एनकाउंटर में मदद करने वाले स्थानीय लोगों और पुलिस फोर्स की तारीफ की है। हालांकि जेल से फरार होने को मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी गलती भी मानी। सरकार ने कहा कि जेल प्रबंधन की गलती की वजह से ऐसा हुआ। सोमवार सुबह सीएम चौहान ने जेल एडीजी और डीआईजी समेत पांच अफसरों को सस्पेंड कर दिया और आतंकियों को जल्द से जल्द अरेस्ट करने का भरोसा दिलाया था। पर कुछ घंटे बाद ही पुलिस को सफलता मिली। सीएम शिवराज ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भी घटना की जानकारी दी। चूंकि जेल से भागना ही देश के कानून में गंभीर अपराध है। किसी को भी कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। आतंकवाद किसी भी रूप में हो, अपराध किसी भी प्रकार का हो, देश और समाज के लिए दोनों खतरनाक हैं। ऐसे में प्रतिबंधित संगठन सिमी के आठ सदस्यों का भोपाल जेल से भागना बड़ा अपराध है। और अगर अपराधियों पर आतंकवाद फैलाने का आरोप हो, तो वह अपराध और भी संगीन हो जाता है।
सिमी के ये आतंकी जेल में तैनात एक सुरक्षा जवान को मार कर रविवार रात दो बजे के करीब भागे थे। इनमें तीन आतंकी ऐसे थे जो तीन साल पहले 2013 में खंडवा जेल से भागे थे। उन्हें बाद में पकड़कर भोपाल जेल में रखा गया था। भोपाल जेल में बंद सिमी के 30 आतंकियों में से ही ये आठ मुठभेड़ में मारे गए हैं। ये सभी आतंकी ज्यूडिशियल कस्टडी में थे। यानी अंडर ट्रायल थे। इन आतंकियों के ऊपर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा था। भागे आतंकियों के पास हथियार मिलना तीसरे हाथ का संकेत देता है। सिमी एमपी से ही ऑपरेट करता है। एमपी का मालवा सिमी आतंकियों का गढ़ माना जाता है। केंद्र सरकार ने 2001 में सिमी यानी स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगाया था। सिमी देश विरोधी आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहा है। लेकिन देश में आतंकवाद पर भी राजनीति होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछेक राजनीतिक दल, चाहे सेना हो या पुलिस, आतंकियों के खिलाफ उसकी कार्रवाई पर सवाल उठाते रहे हैं। इस बार भी सिमी आतंकियों के खिलाफ एमपी पुलिस की कार्रवाई पर सियासत शुरू हो गई है।
कांग्रेस नेता कमलनाथ ने ज्यूडिशियल जांच की मांग की है। एमआईएम के सांसद असदुद्दीन औवेसी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरे मामले की जांच की मांग की है। हालांकि इन मांगों से पहले ही एमपी सरकार ने पूर्व डीजीपी की अघ्यक्षता में जांच के आदेश दे दिए हैं। सुरक्षित मानी जाने वाली भोपाल जेल से सुरक्षाकर्मी को मारकर सिमी आतंकियों का फरार होना सरकार के जेल प्रबंधन पर सवाल उठाता ही है। सरकार जांच के जरिये ही अपनी कमियों को दूर कर सकती है। लेकिन देश से आतंक की जड़ों का खात्मा जरूरी है। समयानुसार इस मुद्दे पर वो आधा-पौन घंटे का व्याख्यान सामने वाले की सेहत का ख्याल करे बिना चिपकाने का माद्दा रखता है। जिनके बाप-दादाओं ने भी कभी जीवन में खेत-खलिहान नहीं देखे हों वे हमें बताते हैं कि बारिश का गिरता पानी फसलों के लिए लाभप्रद है या नुकसानदायक। गेहूं खरीद के अवसर पर भी ये गेहूं के दानों को हाथ में उछाल-उछाल कर इसकी गुणवत्ता पर अपने ज्ञान के छींटे मारते रहते हैं।
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