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किताबें बयां करती हैं डॉ. कलाम का रामेश्वरम से राष्ट्रपति भवन तक का सफर

कलाम को सिर्फ वैज्ञानिक शख्सियत के तौर पर नहीं देखा जा सकता है।

किताबें बयां करती हैं डॉ. कलाम का रामेश्वरम से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
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नई दिल्ली. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने सोमवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। कलाम 83 वर्ष के थे। अब इस दुनिया में रह गई है कलाम की प्रेरणादायी जीवन की ऊर्जा।

कलाम को सिर्फ वैज्ञानिक शख्सियत के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। उनका पूरा जीवन ऐसा है जिससे हमेशा प्रेरणा ली जाती रहेगी। कलाम का लेखन भी उनके जीवन का ऐसा ही पक्ष है।

कलाम की किताबों में 'विंग्स ऑफ़ फायर', 'इंडिया 2020- ए विज़न फ़ॉर द न्यू मिलेनियम', 'माई जर्नी' तथा 'इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया', लिखी हैं।

विंग्स ऑफ फायर

इनमें चर्चित किताब विंग्स ऑफ फायर है। यह कलाम की आत्मकथा है जिसे उन्होंने अरुण तिवारी के साथ मिलकर लिखा है।इस किताब में अब्दुल कलाम के बचपन से लेकर लगभग 1999 तक के जीवन सफर के बारे में बताया गया है।

यह किताब मूल रूप से अंग्रेजी में है लेकिन विश्व की 13 भाषाओं में इसाक अनुवाद हो चुका है। हिंदी, गुजराती, तेलगु, तमिल, मराठी, मलयालम के साथ-साथ कोरियन, चीनी और ब्रेल लिपि भी इसमें शामिल है।

'इंडिया 2020- ए विज़न फ़ॉर द न्यू मिलेनियम',

यह किताब जापान, अमेरिका आदि देशों के अनुकरण पर भारत सरकार द्वारा कराए गए अध्ययन पर आधारित है जिसमें सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, समाजसेवी संस्थाओं, पत्रकारों तथा गाँवों तक के बहुत-से व्यक्तियों ने भाग लिया था।

नीचे की स्लाइड्स में पढिए, कलाम की अन्य किताबों की जानकारी-
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