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क्या आरुषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपति ही दोषी हैं?

आरुषि-हेमराज हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत से फैसला आ गया है। इसी के साथ एक बहस भी शुरू हो गयी है।

क्या आरुषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपति ही दोषी हैं?

आरुषि-हेमराज हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत से फैसला आ गया है। इसी के साथ एक बहस भी शुरू हो गयी है। बहस यह कि जिस मामले में पहले सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट लगा चुकी थी, उसकी दोबारा हुई पड़ताल में उसके हाथ ऐसे कौन से साक्ष्य लग गये, जिसके आधार पर वह अदालत में तलवार दंपत्ति को आरुषि और घरेलू नौकर हेमराज की हत्या का दोषी साबित करने में सफल हुई। कई और सवाल उठे हैं, देश जिनके जवाब का इंतजार कर रहा है। बहुत संभव है, मंगलवार को जब गाजियाबाद की विशेष अदालत तलवार दंपत्ति को सजा सुनाए, तब जवाब मिल जाएं। किसी को हत्या का दोषी साबित करने के लिए जिस तरह के सबूतों-साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितिजन्य हालातों की जरूरत होती है, उनकी बात करें तो सीबीआई अंतिम समय तक भी असहाय नजर आती रही।

दूसरे, कानून के जानकार और विवेचनाओं से जुड़े रहे पूर्व पुलिस अधिकारी यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या केवल कल्पना के आधार पर गढ़ी गयी कहानी और हालात के आधार पर किसी को दोषी सिद्ध किया जाना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों पर खरा उतरता है? हालांकि किसी अपराधी से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि सहज रूप में अपना गुनाह कबूल कर लेगा। इस मामले में भी आरुषि के माता-पिता शुरू से खुद को पीड़ित ही बताते आ रहे हैं। ऐसे बहुत लोग हैं, जिनके गले से यह बात नहीं उतर रही कि अपनी बेटी को बेइंतहा प्यार करने वाले दंपत्ति क्या उसका कत्ल कर सकते हैं? लेकिन सीबीआई की दूसरी जांच-पड़ताल और नोएडा पुलिस की शुरुआती पड़ताल के नतीजे तो यही कहते हैं कि राजेश तलवार ने हेमराज और आरुषि को आपत्तिजनक अवस्था में देखा और उसी आवेश में उसने दोनों का कत्ल कर दिया। अभियोजन पक्ष का कथन है कि घर में चार ही लोग थे। दो का कत्ल हो गया और दो बच गये। यदि कातिल बाहर से आया तो उसने सिर्फ आरुषि और हेमराज को क्यों मारा? तलवार दंपत्ति को क्यों नहीं। दूसरे, किसी के घर में आने या जाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। कत्ल इतनी सफाई से किये गये कि मौके पर ऐसे साक्ष्य नहीं छोड़े गये, जिनसे किसी खास तरफ इशारा होता हो।

पूर्व आईपीएस किरण बेदी सहित बहुत से लोगों का यही मत है कि जब तक पुख्ता सबूत नहीं हों, किसी को हत्या जैसे जघन्य अपराध का दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। अतीत में सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भी आ चुकी है कि सौ गुनहगार बच जाएं परन्तु किसी बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिए। शुरू से ही मीडिया ने इस हत्याकांड को कुछ इस तरीके से पेश किया है जैसे यह ऑनर किलिंग का मामला है। नोएडा पुलिस की शुरुआती जांच के बाद तत्कालीन आईजी भी इसी नतीजे पर पहुंचे। हालांकि बाद में सीबीआई ने तलवार दंपत्ति को क्लीन चिट देते हुए कुछ दूसरे लोगों को गिरफ्तार किया परन्तु जांच के नतीजे फिर बदले और तलवार दंपत्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें ही अपनी बेटी के कत्ल का दोषी ठहराया गया। जो फैसला अदालत से आया है, वह किन साक्ष्यों पर टिका है और हत्या की वजह क्या थी यह तो मंगलवार को ही पता लगेगा, जब अदालत सजा सुनाएगी।

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