Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

कई सबक दे गया 16वीं लोकसभा का यह चुनाव

राजनीति की गरिमा तो गिर ही रही है, चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष मानी जाने वाली संवैधानिक संस्था की छवि का भी क्षरण हो रहा है।

कई सबक दे गया 16वीं लोकसभा का यह चुनाव
X

आखिरकार लोकसभा की सबसे लंबी चुनाव प्रक्रिया समाप्त हो गई। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब नेताओं के बीच अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमेगा। इसमें कोईदो राय नहीं कि इस बार का चुनाव प्रचार तीखेपन की सारी सीमाओं को पार कर गया था। भले ही चुनाव प्रचार के लिए कुछ लोग इसे जायज ठहरा रहे हों परंतु स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह ठीक नहीं है कि जीतने के लिए कोई उम्मीदवार भाषाई र्मयादाओं की हदों को लांघ जाए। लिहाजा इस चुनाव को नेताओं द्वारा आरोप लगाने के लिए प्रयोग की जाने वाली अर्मयादित भाषा के लिए भी याद किया जाएगा।

वहीं इस बार का यह महापर्व अन्य कई मायनों में न केवल अहम रहा, बल्कि इसने नए आयाम भी गढ़े। इस चुनाव ने दिखा दिया कि भारतीय लोकंतत्र की विकास यात्रा आगे भी जारी रहने वाली है। जिस तरह से मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी दर्ज की गई है, यहां तक कि नक्सली इलाकों में भी जहां नक्सलियों ने मतदान का बहिष्कार कर रखा था, उससे यह सिद्ध हुआ है कि लोगों का लोकतंत्र में विश्वास बढ़ रहा है और वे सारी समस्याओं का बुलेट से नहीं बैलेट से ही समाधान होते देखना चाहते हैं। 16वीं लोकसभा के लिए चुनाव को भारतीय लोकतंत्र के संक्रमणकाल के लिए याद किया जाएगा।

जिसमें प्रचार के तौर तरीके तो बदले, ऐसा लगा किमतदाता सांसद नहीं सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव कर रहे हैं। साथ ही चुनावों में सोशल मीडिया की भूमिका भी स्थापित हो गई। इसके अलावा चुनाव ने एक बड़ी समस्या की ओर भी हमारा ध्यान आकर्षित किया है। इसने दिखाया हैकि राजनीति की गरिमा तो गिर ही रही है, चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष मानी जाने वाली संवैधानिक संस्था की छवि का भी क्षरण हो रहा है। हालांकि इस हालात के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार उन नेताओं को ही माना जाएगा, जिन्होंने यह मान रखा है कि राजनीति में सब कुछ जायज होता है।

यह सही है कि उम्मीदवार विरोधियों को पटकनी देने के लिए व्यंग्य कसते हैं और गड़े मुर्दे उखाड़ते हैं, लेकिन इसकी आड़ में राजनीतिक माहौल को खराब करने से बचना चाहिए। क्योंकि इसका सीधा असर समाज पर पड़ता है। इसकी अनेदखी कतई नहीं की जा सकती। इसे रोकने की उचित व्यवस्था चुनाव आयोग की ओर से होनी चाहिए। साथ ही राजनीतिक दलों को इसके प्रति ज्यादा सजग होने की जरूरत है। आखिर यह मामला उन्हीं से जुड़ा है।

चुनाव आयोग भले ही कहे कि उसने कई नेताओं पर कार्रवाई की, पर उनका प्रभाव नहीं दिखा। नेताओं और राजनीतिक दलों में चुनाव आयोग का कोई भय दिखा हो ऐसा एक भी वाक्या सामने नहीं आया है। 16वीं लोकसभा के लिए चुनाव प्रचार के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन के हजारों मामले सामने आए हैं, परंतु निश्चित रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि इनमें से कितनों पर कार्रवाई हो पाएगी जिससे नेताओं और पार्टियों को सबक मिल सके। यदि हालात ऐसे ही रहे तो सच मानिए आदर्श आचार संहिता केवल नाम की ही रह जाएगी। बहरहाल, यह चुनाव एक बड़े सबक के रूप में हमारे सामने है, जिससे सीख लेकर भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को और गहरा कर सकते हैं।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top