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योगी भाजपा के नए आदित्य

योगी आदित्यनाथ के कामों का प्रभाव सिर्फ गोरखपुर तक सीमित न रहकर जिस प्रकार पूरे पूर्वांचल में है वह भी किसी से छिपा नहीं है।

योगी भाजपा के नए आदित्य
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उत्तर प्रदेश में अपनी प्रचंड विजय के बाद भी भाजपा ने वहां अपना मुख्यमंत्री चुनने में चाहे पूरा एक सप्ताह लगा दिया, लेकिन उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का नाम भाजपा के लिए एक नई शक्ति, नया उत्साह और नई आशाओं का कुछ ऐसा ही प्रतीक बन गया है, जैसे कुछ बरस पहले गुजरात में मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी का नाम गूंजने लगा था।

हालांकि नरेंद्र मोदी को बड़ी लोकप्रियता गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के कुछ समय बाद मिली, लेकिन योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपना नाम घोषित होने के कुछ घंटों बाद ही पूरे देश में ही ऐसी सुर्खियों में छा गए जिसकी कल्पना नहीं की थी।

जो टीवी चैनल कुछ दिन पहले तक योगी आदित्यनाथ के हिंदुत्व एजेंडे और उनके बयानों को लेकर उनका मजाक बनाने और उनकी बातों को काटने में मजा लेते दिख रहे थे वे सब भौंचक्के रह गए। कुछ ही देर में अधिकतर चैनल ठीक ऐसे ही योगीमय हो गए जैसे इन चुनावों में भाजपा की जबरदस्त जीत के बाद वे मोदीमय हो गए थे।

हालांकि इस बार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए हैं और पाँचों राज्यों में पिछले मुख्यमंत्री के स्थान पर नया मुख्यमंत्री आया है। पंजाब और गोवा में बेशक वहां पहले भी मुख्यमंत्री रह चुके चेहरों की एक अंतराल के बाद वापसी हुई है, लेकिन उत्तराखंड में भी भाजपा को प्रचंड जीत मिली, जिसके बाद वहां त्रिवेंद्र रावत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन वह कहीं चर्चा में नहीं आए।

यहां तक आज अधिकांश लोग उत्तराखंड के नए सीएम का नाम नहीं बता पाएंगे, लेकिन आज उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चप्पे-चप्पे से ही नहीं देशभर में योगी, योगी योगी हो रहा है। यूं योगी आदित्यनाथ के नाम से पहले उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में जिन तीन नाम की सर्वाधिक संभावना थी उनमें राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा और सतीश महाना अपने इसी क्रम में थे। यह आशंका भी थी कि स्वयं राजनाथ सिंह देश के गृहमंत्री जैसा बड़ा पद त्यागकर यूपी नहीं जाना चाहेंगे। ऐसे में बाकी दो नामों में एक इस पद पर विराजमान हो जाएगा। केशव प्रसाद मौर्या को उपमुख्यमंत्री या राज्य में गृहमंत्री बना दिया जाएगा।

यूं योगी का नाम मुख्यमंत्री के रूप में विभिन्न मौकों पर प्रस्तावित तो बराबर होता रहा, लेकिन कुछ कारणों से लगता था कि भाजपा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री शायद योगी को यह जिम्मेदारी नहीं सौपेंगे, लेकिन भाजपा ने योगी पर अपना दाव खेलना ज्यादा पसंद किया, जो भाजपा के लिए एक वरदान साबित होता दिख रहा है। अब आदित्यनाथ आगे चलकर अपने कार्यों से आर्थिक रूप से कमजोर और बदहाल उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश कैसे बनाते हैं।

साथ ही अपराध पर नियंत्रण के साथ राज्य विकास और हिंदु मुस्लिम आदि में संतुलन बनाने में वह कितने सफल होते हैं, उसी के बाद आदित्यनाथ की असली ऊर्जा का पता लगेगा, लेकिन योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके वक्तव्य बता रहे हैं कि योगी स्वयं को एक अच्छा मुख्यमंत्री साबित करके ही दम लेंगे। योगी पिछले पांच बार से जिस तरह हर लहर, हर मौसम में अपने एक ही संसदीय क्षेत्र गोरखपुर से 1998 से चुनाव जीत रहे हैं, वह यह स्पष्ट करता है कि उनके क्षेत्र के लोग उनसे खुश, संतुष्ट हैं तभी उन्हें हर बार पिछली बार से अधिक मतों से बड़ी जीत मिल रही है़।

योगी आदित्यनाथ की बातों और उनके कामों का प्रभाव सिर्फ गोरखपुर तक सीमित न रहकर जिस प्रकार पूरे पूर्वांचल में है वह भी किसी से छिपा नहीं है। यहां तक उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों और बिहार के एक हिस्से के लोगों पर भी योगी का जादू सिर चढ़कर बोलता है। यह सही है कि देश के बाकी हिस्सों में अधिकतर लोग आदित्यनाथ को भाजपा के एक अग्निबाण नेता के रूप में जानते हैं। असल में योगी को सभी जगह अपनी एक अलग पहचान और लोकप्रियता अपने प्रखर मुस्लिम विरोधी वक्तव्यों से ही मिली है।

इस कारण वह भाजपा के कट्टर हिंदू चेहरे और मुस्लिमों पर हर पल प्रहार करते प्रतीत होते रहे हैं, लेकिन उनके इन अग्निबाणों के सामने उनके वे वक्तव्य अक्सर दबकर रह जाते हैं, जहां वह कहते हैं कि मैं इस्लाम विरोधी नहीं हूं। यहां तक कोई उन्हें उनकी जन्म जाति राजपूत से भी संबोधित करता है तो वह यह सहन नहीं करते। वह साफ कहते हैं कि मैं एक संन्यासी हूं और मैं जात पात पर विश्वास नहीं रखता।

असल में योगी आदित्यनाथ के क्रियाकलापों और वक्तव्यों को ध्यान से देखा-सुना जाए तो यह साफ हो जाता है कि वह इस्लाम या मुस्लिम विरोधी नहीं। वह उन मुस्लिमों के विरोधी हैं, जो भारत में रहकर पाकिस्तान के गीत गाते हैं, देश में दंगे करते, कराते हैं। अपने तिरंगे का अपमान कर पाकिस्तान का झंडा लहराते हैं, योगी तब भी विचलित होते रहे हैं जब मुस्लिम युवक हिंदू युवतियों को बहला फुसलाकर उनके साथ अनैतिक कर्म करते हैं या तब भी जब कोई देश में अहिस्णुता की बात कर यह देश छोड़ने की बात करता है या फिर तब भी जब वोट बैंक के चलते मुस्लिमों को विशेष सुविधाएं दी जाएं, लेकिन हिंदुओं के साथ भेदभाव करके उन्हें सुविधाओं के स्थान पर परेशान किया जाए, वर्ना गोरखपुर में उनके संसदीय क्षेत्र में उनकी संसदीय निधि से या उनके गोरखनाथ पीठ से चलाए जा रहे कार्यों में हिंदू मुस्लिम से भेदभाव नहीं किया जाता।

यहां तक कि मंदिर बनवाने से अन्य भवन निर्माण के कार्यों का जिम्मा भी वह मुस्लिमों को देते रहे हैं। साथ ही उनके अस्पतालों में मुस्लिम डॉक्टर भी हैं और वहां सभी धर्म के लोग उपचार कराते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते ही आदित्यनाथ जिस तेजी से लोकप्रिय हुए हैं वह अद्भुत है। उसे देखते हुए लगता है भाजपा को नरेंद्र मोदी के बाद एक और नया आदित्य, नया सूरज मिल गया है।

मोदी और योगी शब्द सुनने में तो एक जैसे लगते ही हैं, फिर योगी ने चाहे भगवा कपड़े पहनकर संन्यास लिया, लेकिन मोदी ने योगी से बरसों पूर्व घर परिवार छोड़कर उसी देवभूमि में तपस्या भी की जहां आदित्यनाथ का जन्म हुआ। दोनों ही अच्छे योग साधक हैं और योग शक्ति के बल पर सिर्फ चार घंटे की नींद लेकर या लंबे उपवास रखकर और अत्यंत सादे खान-पान के साथ लगातार घंटों परिश्रम के लिए जाने जाते हैं। दोनों ने अपने काम और वक्तव्यों से जनमानस पर अपनी अनुपम छाप छोड़ी है।

आज नरेंद्र मोदी का कोई सानी नहीं है, जबकि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री काल के दौरान लगता था कि वाजपेयी का कोई विकल्प नहीं है। चंद दिन पहले तक मोदी जैसा कोई और कद्दावर नेता भाजपा क्या देश में कहीं नजर नहीं आता था। अब मानो स्वयं मोदी ने आदित्यनाथ योगी के रूप में एक जूनियर मोदी राष्ट्र के सामने प्रस्तुत कर दिया है।

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