Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

चीन की भारत विरोधी मुहिम फिर उजागर

सरहद पर सेना की ताकत और संख्या बढ़ाने के पीछे चीन की असल मंशा क्या है, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

चीन की भारत विरोधी मुहिम फिर उजागर
X

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की मानें तो चीन भारतीय सीमा पर अपनी सेना बढ़ा रहा है। उसने हाल में तिब्बत में स्थित अपने सैन्य कमांड का दर्जा बढ़ाते हुए उसे खुद फैसले लेने

के अधिकार भी सौंपे हैं। सरहद पर सेना की ताकत और संख्या बढ़ाने के पीछे चीन की असल मंशा क्या है, इसका अंदाजा तो अभी तक नहीं लगा है, परन्तु यह घटना ऐसे समय घटी

है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ घटनाएं तेजी से घटी हैं। हाल में चीन ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की भारत को सदस्यता दिए जाने का विरोध किया है, जबकि

वाशिंगटन ने फिर से भारत की दावेदारी का सर्मथन किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने स्पष्ट किया है कि भारत मिसाइल तकनीक नियंत्रण व्यवस्था की सभी

शर्तें पूरी करता है।

गौरतलब है कि चीन के साथ-साथ पाकिस्तान भी भारत की एनएसजी की सदस्यता का विरोध करता आ रहा है। भारत, पाकिस्तान, इजरायल और दक्षिण अफ्रीका चार ऐसे देश हैं,

जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संधि का मकसद परमाणु अस्त्रों के प्रसार को रोकना है। समूह के नियमों के मुताबिक एनएसजी समूह का

सदस्य बनने के लिए संबंधित देश को या तो संधि पर हस्ताक्षर करने होते हैं अथवा उस देश के परमाणु रिकॉर्ड को देखते हुए कोई सदस्य देश संबंधित देश की सदस्यता का प्रस्ताव

करता है। इस पर आम सहमति से फैसला लिया जाता है। अमेरिका द्वारा खुलकर भारत की सदस्यता का सर्मथन करने से जाहिर है, चीन और पाकिस्तान के प्रयासों को धक्का लगा

है।

शुक्रवार को चीन ने दरअसल दावा किया था कि भारत को एनएसजी की सदस्यता दिए जाने का उस सहित कई देश विरोध कर रहे हैं। दरअसल, चीन की कुल कोशिश यही है कि या

तो भारत को भी सदस्यता नहीं दी जाए या फिर पाकिस्तान को भी साथ में सदस्य बनाया जाए। आपको स्मरण होगा कि कुछ ही समय पहले चीन ने पाकिस्तानी आतंकवादी सरगना

मसूद अजहर के खिलाफ यूएन में लाए गए एक प्रस्ताव का चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए विरोध कर दिया था। इस पर भारत ने गहरी नाराजगी जताते हुए चीन से कहा

था कि आतंकवाद को लेकर इस तरह से संरक्षणवादी रवैया अपनाए जाने के गंभीर नतीजे पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं। भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के नए आयामों

को चीन और पाकिस्तान पचा नहीं पा रहे हैं।

पिछले दिनों दोनों देशों ने सैन्य सहयोग के एक अहम दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने की सहमति दी है, जिसके चलते अमेरिकी सेना जरूरत के समय सीमित समय के लिए भारत की

धरती का इस्तेमाल कर सकेगी और उसके लड़ाकू व दूसरे विमान फ्यूल वगैरह भी ले सकेंगे। हाल में कुछ और महत्वपूर्ण घटनाएं भी घटी हैं, जिनसे पता चलता है कि पाकिस्तान और

चीन की जुगलबंदी बढ़ रही है और पाकिस्तानी हुकूमत की उम्मीदों व मंसूबों को अमेरिका ने बड़ा झटका दिया है। पाकिस्तान चाहता था कि अमेरिका उसे एफ-16 लड़ाकू विमान भी दे

और उसे खरीदने के लिए ऋण भी मुहैया कराए। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए साफ कर दिया कि पाकिस्तान को विमानों की पूरी रकम खुद चुकानी होगी।

इस पर पाकिस्तान की ओर से यह धमकी भरा बयान आया कि वह कहीं और से एफ-16 विमान हासिल कर लेगा। दक्षिण चीन सागर में जिस तरह की घटनाएं पिछले कुछ समय में

हुई हैं, उससे इस पूरे क्षेत्र में तनाव पसरा हुआ है। चीन ने वियतनाम में भारतीय कंपनियों द्वारा तेल की खोज के अभियान में भी अड़ंगे डालने की कोशिश की थी, जिसका भारत ने

कड़ा जवाब देते हुए साफ कर दिया था कि वह ऐसी धमकियों में नहीं आएगा। ऐसे हालातों में भारतीय सरहद पर चीनी सेना की बढ़ती ताकत पर गौर करने की जरूरत है। भारत को

इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top